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Study: ऑफिस में काम करने वाले ध्यान दें- लंबे समय तक बैठे रहना आपको डेमेंशिया का बना सकता है शिकार

Sun, 08 Jan 2023 06:39 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 08 Jan 2023 06:39 PM IST
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sitting for long periods may be harmful to the brain, affects formation of new memories
लंबे समय तक बैठे रहने से होने वाले नुकसान - फोटो : istock

ज्यादा देर तक बैठे रहने की आदत को स्वास्थ्य विशेषज्ञ कई प्रकार से संपूर्ण सेहत के लिए नुकसानदायक मानते हैं। शारीरिक निष्क्रियता बढ़ाने वाली यह आदत न सिर्फ वजन बढ़ने का कारण बनती है साथ ही इसका रक्तचाप पर भी नकारात्मक असर देखा गया है। यही कारण कि विशेषज्ञ सभी लोगों, विशेषकर ऑफिस में काम करने वालों को थोड़ी-थोड़ी देर पर सीट से उठकर वॉक करने की सलाह देते हैं।



लॉग सिटिंग के कई दुष्प्रभाव हो सकते हैं, हाल ही में किए गए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने इसके मानसिक स्वास्थ्य पर होने वाले दुष्प्रभावों को लेकर लोगों को सावधान किया है।

वैज्ञानिकों ने पाया कि 7-8 घंटे तक लगातार बैठे रहने की आदत समय के साथ मस्तिष्क के नई चीजों को संग्रहित करने की क्षमता को कमजोर कर सकती है, इसका याददाश्त पर भी असर हो सकता है। लंबे समय तक बैठे रहने वाले लोग वीक मेमेरी के शिकार पाए गए हैं। शोधकर्ताओं का कहना है, ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत काफी आम हो गई है, इसके दुष्प्रभावों को लेकर सभी लोगों को सावधान रहने की आवश्यकता है।

आइए इस अध्ययन के बार में विस्तार से जानते हैं।
 

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याददाश्त की बढ़ती समस्या के कारण - फोटो : pixabay

लॉन्ग सिटिंग का मस्तिष्क पर असर

लॉन्ग सिटिंग किस प्रकार से शरीर और मस्तिष्क को प्रभावित करती है, इस बारे में जानने के लिए सेमल इंस्टीट्यूट फॉर न्यूरोसाइंस एंड ह्यूमन बिहेवियर के वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन किया। इसके लिए 45-75 की आयु वाले 35 प्रतिभागियों को शामिल किया गया। इन लोगों से उनकी शारीरिक गतिविधि और दिन में कितने घंटे बैठे रहते हैं, इस बारे में पूछा गया।

इस तरह की आदत का मस्तिष्क पर किस प्रकार का प्रभाव होता है, इसे जानने के लिए प्रतिभागियों का एमआरआई स्कैन किया गया। कई स्तर पर किए गए विश्लेषण में वैज्ञानिकों को कई चौंकाने वाली बातें पता चलीं।

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मस्तिष्क में होने वाले बदलाव (सांकेतिक) - फोटो : Pixabay

अध्ययन में क्या पता चला?

प्लसवन जर्नल में प्रकाशित अध्ययन की रिपोर्ट के मुताबिक लंबे समय तक बैठे रहने वाले लोगों के मस्तिष्क का हिस्सा (टेम्पोरल लोब) समय के साथ प्रभावित हो सकता है। यह स्थिति मध्यम आयु वर्ग और वृद्ध लोगों में मस्तिष्क की कार्यक्षमता को प्रभावित करने के साथ डेमेंशिया के जोखिम को भी बढ़ा सकती है। डेमेंशिया दिमाग की बनावट में बदलावों के परिणामस्वरूप होने वाली समस्या है जिससे स्मृति, सोच तथा मनोभाव पर असर हो सकता है।

शोधकर्ताओं ने विश्लेषण में बताया, एक व्यक्ति जो दिन में 8 घंटे बैठा रहता है, उसके मस्तिष्क का हिस्सा (टेम्पोरल लोब) 4-5 घंटे तक बैठने वाले व्यक्ति की तुलना में 10 प्रतिशत पतला हो सकता है। टेम्पोरल लोब मस्तिष्क का वह हिस्सा है, जो यादों और ध्वनियों के लिए जिम्मेदार होता है। 

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लंबे समय तक बैठने से बचें - फोटो : Pixabay

शोध का निष्कर्ष

अध्ययन के प्रमुख लेखक प्रभा सिद्धार्थ बताते हैं, हमने पाया है कि अगर आप व्यायाम भी करते हैं और लंबे समय तक बैठने की आदत है तो भी इस तरह के दुष्प्रभावों के शिकार हो सकते हैं।
 
अगर आपको दिन में 8 घंटे ऑफिस में काम करना होता है तो कोशिश करें कि बैठने की बजाय ज्यादा देर खड़े होकर काम करें। इससे रक्त संचार को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है और मस्तिष्क के साथ अन्य शरीरिक दुष्प्रभावों को भी कम किया जा सकता है। थोड़ी-थोड़ी देर पर सीट से उठकर वॉक करने की आदत बनाएं। स्टैंडिंग वर्किग स्टेशन एक बेहतर विकल्प हो सकता है।



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स्रोत और संदर्भ 
Sedentary behavior associated with reduced medial temporal lobe thickness in middle-aged and older adults


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें

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