दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में इस समय कोरोना का प्रकोप जारी है। भारत के संदर्भ में बात करें तो यहां आई अब तक कोरोना की तीन लहरों ने बुनियादी स्वास्थ्य ढांचे के लिए बड़ी चुनौतियां पेश की हैं। कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के कारण देश संक्रमण की तीसरी लहर झेल रहा है। संक्रमण की शुरुआत से ही बताया जा रहा है कि संक्रमित व्यक्ति के छीकने-खांसने से निकलने की बूंदों के संपर्क में आने से दूसरे लोगों को संक्रमण हो सकता है। पर क्या आप जानते हैं कि ड्रॉपलेट की एक छोटी से बूंद भी संक्रमण फैलाने के लिए काफी है?
वैज्ञानिकों की चेतावनी: छींक से निकली छोटी सी बूंद भी बन सकती है संक्रमण का कारण, जानिए कब पीक पर होता है वायरल लोड?
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छोटी सी ड्रॉपलेट भी संक्रमण के लिए काफी
कोरोना की संक्रामकता जानने के लिए वैज्ञानिकों ने उन लोगों पर अध्ययन किया जिन्हें जान-बूझकर वैक्सीन की केवल एक ही डोज दी गई थी। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि वैक्सीनेशन के बाद भी अगर आप संक्रमित हो जाते हैं, तो छींकने-खांसने से निकलने वाली छोटी सी भी ड्रॉपलेट, आसपास के लोगों में संक्रमण का कारण बन सकती है। वैज्ञानिकों ने पाया कि संक्रमण की शुरुआत सबसे पहले गले से होती है। संक्रमण में लगभग पांचवें दिन तक वायरस नाक में काफी अधिक मात्रा में बढ़ जाता है, ऐसे में पांचवें दिन तक संक्रमित से अन्य लोगों में संक्रमण का खतरा काफी अधिक हो जाता है।
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?
यह अध्ययन लंदन के रॉयल फ्री हॉस्पिटल में किया गया, जिसका निष्कर्ष नेचर प्री-प्रिंट सर्वर पर प्रकाशित किया गया है। अध्ययन की समीक्षा की जानी बाकी है। इंपीरियल कॉलेज लंदन के प्रोफेसर और परीक्षण के प्रमुख जांचकर्ता क्रिस्टोफर चिउ कहते हैं, अध्ययन के लिए वालेंटियर्स को वैक्सीन की केवल एक ही डोज की गई थी। 36 में से 16 लोगों को हल्के से मध्यम स्तर के लक्षणों जैसे बहती नाक, छींक आने और गले में खराश की शिकायत थी। कुछ ने सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान और बुखार का अनुभव किया। किसी में भी गंभीर लक्षण नहीं थे।
संक्रमण के पांचवे-छठे दिन पीक पर होता है वायरल लोड
प्रोफेसर क्रिस्टोफर चिउ बताते हैं, संक्रमण के पांचवे-छठे दिन लिए गए स्वैब सैंपल में वायरल लोड पहले दिन की तुलना में अधिक पाई गई। कुछ लोगों में नौ से 12वें दिन भी वायरल लोड काफी अधिक था। इस अवधि में गले की तुलना में नाक में वायरस की उपस्थिति अधिक पाई गई। इस आधार पर जांच में पता चलता है कि शरीर में वायरल लोड पीक पर पहुंचने पर ड्रॉपलेट की एक बूंद भी अन्य लोगों में संक्रमण के जोखिम को बढ़ा देती है।
क्या है अध्ययन का निष्कर्ष?
अध्ययन के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों ने बताया कि कोरोना से बचाव के लिए सभी लोगों के हमेशा अलर्ट रहने की आवश्यकता है। जिन लोगों को संक्रमण हो गया है उन्हें होम आइसोलेशन के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए, क्योंकि इस दौर घर-परिवार के लोगों में आपके कारण संक्रमण का जोखिc सबसे अधिक होता है। हमेशा खांसते-छींकते समय नाक और मुंह को कवर करके रखें और तुरंत हाथों को अच्छी तरह से साबुन से साफ करें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। अमर उजाला इस दावे की पुष्टि नहीं करता है।
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