ह्रदय में आघात के लक्षण तो पता चल जाते हैं लेकिन दिमाग में आने वाले पक्षाघात का पता बहुत देर से होता है। जिसकी वजह से मरीज को इलाज देर से मिल पाता है। कभी-कभी तो डॉक्टर भी इसके लक्षण पहचानने में देर कर देते हैं और दिमाग की नसों से बहुत ज्यादा खून बह जाता है जो मरीज के लिए जानलेवा भी हो सकता है। आइए जाने इससे होने वाले खतरे और लक्षण।
साइलेंट स्ट्रोक के लक्षण होते हैं बहुत ही मामूली, डॉक्टर ही कर पाते हैं पहचान
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साइलेंट स्ट्रोक का असर दिमाग के छोटे हिस्से पर पड़ता है। जिसकी वजह से वहां की कोशिकाएं काम करना बंद कर देती हैं। प्रभावित हिस्से की जगह भले ही छोटी होती है लेकिन इसका दिमाग पर गहरा असर होता है। साइलेंट स्ट्रोक के कारण चलने फिरने में दिक्कत, पाचन की क्रिया पर असर और दिमाग ठीक से काम करना बंद करने लगता है।
दिमाग की नसों में जब खून का थक्का जमने लगता है या फिर उच्च रक्तचाप की समस्या होती है जिससे ह्रदय की वाहिनियां सिकुड़ने लगती है तो स्ट्रोक का खतरा सबसे ज्यादा होता है। कभी-कभी सिर में गहरी चोट या डायबिटीज के कारण भी पक्षाघात हो जाता है।
स्ट्रोक के बाद दिमाग का एमआरआई और सीटी स्कैन करने पर उस हिस्से पर सफेद धब्बा सा नजर आता है जो निष्क्रिय हुए हिस्से को दिखाता है। लेकिन इसके अलावा भी कुछ बाहरी लक्षण होते हैं जो मरीज को पहले ही नजर आ जाते हैं लेकिन व्यक्ति समझ नहीं पाता है। जैसे संतुलन बनाने में दिक्कत, पेशाब पर नियंत्रण न होना, मूड में परिवर्तन, आंखों से धुंधला दिखने लगना, सोचने की क्षमता पर असर पड़ने लगता है।