Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik
विटामिन-डी हमारे शरीर के लिए बहुत ही जरूरी होता है। इससे काफी ऊर्जा मिलती है, जिससे शरीर सही ढंग से काम कर पाता है। इसके कई सारे फायदे हैं, जैसे- यह हड्डियों, दांतों और मांसपेशियों को मजबूत करता है और उन्हें स्वस्थ रखता है। शोध में यह साबित भी हो चुका है कि विटामिन-डी शरीर को कैल्शियम और फॉस्फेट पचाने में मदद करता है, जो हड्डियों, दांतों और मांसपेशियों को मजबूत और स्वस्थ रखते हैं। इसे आमतौर पर धूप से मिलने वाले विटामिन के रूप में जाना जाता है, क्योंकि ये हमारे शरीर में तब बनता है जब त्वचा पर सूरज की किरणें पड़ती हैं। हालांकि विटामिन-डी प्राप्त करने के और भी कई स्रोत हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि शरीर में विटामिन-डी की मात्रा को बनाए रखना बहुत ही जरूरी होता है, क्योंकि इसकी कमी से कई सारी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
सावधान: विटामिन-डी की कमी से हो सकती हैं ये गंभीर बीमारियां, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
विटामिन-डी की कमी के लक्षण
- ब्लड प्रेशर बढ़ जाना
- चेहरे और हाथों में झुर्रियां पड़ने लग जाना
- हड्डियों में दर्द
- मांशपेशियों में कमजोरी महसूस होना
- थकावट, किसी भी काम में मन न लगना
- अधिक नींद आना, डिप्रेशन
विटामिन-डी की कमी से होने वाले रोग
- हड्डी की बीमारियां, ऑस्टियोमलेशिया और ऑस्टियोपोरोसिस
- हृदय रोग संबंधी बीमारियां
- डायबिटीज
- संक्रामक एवं सूजन संबंधी रोग
- कैंसर
विटामिन-डी के स्रोत
- तैलीय मछली
- लाल मांस
- अंडे की जर्दी
- दूध और इससे से बने उत्पाद, जैसे- पनीर
- टमाटर, मटर
- मूली, पत्तागोभी
अधिक विटामिन-डी लेने से क्या नुकसान?
- विशेषज्ञ कहते हैं कि लंबे समय तक और अधिक मात्रा में विटामिन-डी लेने से स्वास्थ्य संबंधी कई तरह के नुकसान भी हो सकते हैं। दरअसल, अधिक विटामिन-डी के सेवन से हड्डियों में कैल्शियम की मात्रा बढ़ सकती है, जिसकी वजह से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और साथ ही किडनी और हृदय को भी नुकसान पहुंच सकता है।
नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है।
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