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अध्ययन: वर्क फ्रॉम होम कर रहे लोगों में इस वजह से बढ़ गया है स्ट्रोक का खतरा, जानिए बचाव के तरीके

Sat, 08 Jan 2022 05:51 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 08 Jan 2022 05:51 PM IST
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sedentary lifestyle due to work from home raises stroke risk, study warns
वर्क फ्रॉम होम औऱ स्ट्रोक का खतरा - फोटो : pixabay

देश में जारी ओमिक्रॉन वैरिएंट के संक्रमण ने तीसरी लहर की आशंकाओं को तेज कर दिया है। कोरोना के इस नए वैरिएंट के तेजी से बढ़ते मामलों को लेकर विशेषज्ञ चिंतित हैं। संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए तमाम राज्यों में एक बार फिर से आवश्यक प्रतिबंध लगने शुरू हो गए हैं। कोरोना से बचाव के मद्देनजर एक बार फिर से वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन क्लास शुरू हो रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जिस तरह से कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, ऐसे में लोगों को बाहर निकलने से बचना चाहिए। इस दिशा में वर्क फ्रॉम होम एक अच्छा विकल्प माना जाता रहा है, हालांकि इससे संबंधित कुछ खतरों को लेकर भी लोगों को सावधान रहने की आवश्यकता है।



स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले दो साल से ज्यादातर लोग घर से ही काम और पढ़ाई कर रहे हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि इसके चलते लोगों में शारीरिक निष्क्रियता, अस्वास्थ्यकर आहार के सेवन, मेटाबॉलिज्म संबंधी विकार और मोटापे का खतरा बढ़ गया है। एक अध्ययन से पता चला है कि कैसे लॉकडाउन संबंधी यह आदतें स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकती हैं? आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

sedentary lifestyle due to work from home raises stroke risk, study warns
ब्रेन स्ट्रोक का बढ़ रहा है खतरा - फोटो : Pixabay

शारीरिक निष्क्रियता के हो सकते हैं गंभीर दुष्परिणाम
जर्नल स्ट्रोक में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चलता है कि वर्क फ्रॉम होम ने लोगों में शारीरिक निष्क्रियता को काफी बढ़ा दिया है। जो लोग एक ही स्थान पर दिन में आठ घंटे से अधिक समय तक बैठे रहते हैं उनमें, अन्य लोगों की तुलना में स्ट्रोक का खतरा सात गुना तक अधिक हो सकता है। शारीरिक निष्क्रियता के कारण मोटापा और मेटाबॉलिज्म संबंधी विकार भी बढ़ रहे हैं, जिससे कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। 

sedentary lifestyle due to work from home raises stroke risk, study warns
बढ़ रही है शारीरिक निष्क्रियता - फोटो : Pixabay
सेडेंटरी लाइफस्टाइल ने बढ़ा दी है स्वास्थ्य जोखिम
अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि सेडेंटरी लाइफस्टाइल या गतिहीन जीवनशैली के कारण रक्त प्रवाह, लिपिड मेटॉबॉलिज्म, ग्लूकोज और शरीर में सूजन जैसी दिक्कतें बढ़ जाती हैं। समय के साथ, इनका रक्त वाहिकाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है जिससे दिल का दौरा और स्ट्रोक होने का खतरा कई गुना तक बढ़ सकता है। घर से काम कर रहे लोगों को इस बात को लेकर विशेष सावधान रहने की जरूरत है।
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बढ़ रहा है हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Pixabay

इन बातों का रखें ध्यान
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे लोगों को अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। काम के दौरान थोड़ी-थोड़ी देर पर आसपास टहल लें। इसके अलावा आहार का विशेष ध्यान रखें। एक ही जगह पर लंबे समय तक बैठे रहने की आदत मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित कर सकती है, जिससे कई प्रकार के रोगों का खतरा बढ़ जाता है। सभी लोगों के लिए नियमित व्यायाम और शारीरिक गतिविधि आवश्यक है। 

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शारीरिक गतिविधि जरूरी - फोटो : Istock

नियमित व्यायाम से दूर होगा खतरा
अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक व्यायाम और शारीरिक गतिविधि, सेडेंटरी लाइफस्टाइल के नकारात्मक प्रभावों को कम करने में मदद करते हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, वयस्कों को हर हफ्ते कम से कम 150 मिनट की मध्यम या 75 मिनट की जोरदार कसरत करनी चाहिए। रनिंग, साइकिलिंग या वॉकिंग जैसे अभ्यास के साथ योगासनों को जीवनशैली का हिस्सा बना लें। कोरोना से बचाव के लिए तो वर्क फ्रॉम होम अच्छा है लेकिन इसके दुष्प्रभावों को लेकर भी सतर्क रहने की आवश्यकता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 

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