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अलर्ट: सिगरेट का धुआं बच्चों की सेहत पर डालता है बुरा असर, हो सकती हैं ये बीमारियां

Wed, 19 Jan 2022 03:35 PM IST
शिवानी अवस्थी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Wed, 19 Jan 2022 03:35 PM IST
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Second hand Smoke Can Affect Children health Higher Rheumatoid Arthritis Risk
सिगरेट का धुआं बच्चों के लिए खतरा - फोटो : pixabay

Medically Reviewed by Dr. Rajan Gandhi



डॉ. राजन गांधी
जनरल फिजिशियन, चाइल्डकेयर हॉस्पिटल, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, डिप्लोमा सी.एच
अनुभव- 25 वर्ष 


माता- पिता की सेहत से बच्चे की सेहत का जुड़ा होना लाजमी है। आप सोचेंगे कि जेनेटिक्स भी तो आखिर कोई चीज है। लेकिन जरा रुकिए, यह जेनेटिक्स से आगे का मसला है। क्या कभी आपने सोचा है कि आपकी कोई आदत आपके बच्चे को किस तरह से प्रभावित कर सकती है? खासकर अगर वह आदत बुरी हो तो। यहां बात अच्छा-बुरा सीखने से भी आगे की है। मतलब आपकी आदत आपके बच्चे के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाल सकती है। एक शोध में यह बात सामने आई है कि सेकंड हैंड स्मोकिंग, जिसे पैसिव स्मोकिंग भी कहा जाता है, यह आपके बच्चे के जोड़ों के लिए खतरा बन सकता है। शोध में पाया गया कि वे बच्चे (खासकर लड़कियां) जिनके माता-पिता उनके आस-पास सिगरेट पीया करते थे, वयस्क होने पर उनमें रयूमेटॉइड आर्थराइटिस होने की आशंका 75 प्रतिशत तक बढ़ गई। यानी धूम्रपान केवल आपके लिए नहीं, आपके बच्चों के लिए भी हानिकारक हो सकता है। जानिए क्या है सेकंड हैंड स्मोकिंग और यह बच्चों पर क्या प्रभाव डालती है?

Second hand Smoke Can Affect Children health Higher Rheumatoid Arthritis Risk
सिगरेट का धुआं बच्चों के लिए खतरा - फोटो : Pixabay

क्या है सेकंड हैंड स्मोकिंग ?

इसे साधारण शब्दों में आप दूसरों की गलती की सजा खुद को मिलने के रूप में परिभाषित कर सकते हैं। होता यह है कि जब कोई व्यक्ति सिगरेट या तम्बाकू युक्त धुआं किसी भी रूप में प्रयोग में लाता है तो उसकी सारी मात्रा उसके फेफड़ों में नहीं जाती, बल्कि वह धुआं हवा में फैल जाता है। जहां से कोई भी अपनी सांस के साथ उसे अपने शरीर के भीतर पहुंचा सकता है। यह धुआं उन लोगों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है जिन्होंने कभी सिगरेट या इस तरह की चीज को हाथ भी न लगाया हो। यही सेकंड हैंड स्मोक होता है और इस सीमा में सबसे आसान शिकार होते हैं बच्चे। घर के बाहर जहां सिगरेट पीने की मनाही होती है, वहां तो आप खुद पर काबू रखते हैं लेकिन इसकी सारी कसर आप घर पर रहकर पूरी कर लेते हैं। जब आप घर में, पार्क में, फैमिली के बीच धुआं उड़ा रहे होते हैं तो आपके बच्चे और अन्य बच्चे भी इस सेकंड हैंड स्मोक के शिकार हो जाते हैं। 

Second hand Smoke Can Affect Children health Higher Rheumatoid Arthritis Risk
सिगरेट का धुआं बच्चों के लिए खतरा - फोटो : Pixabay

रयूमेटॉइड आर्थराइटिस का खतरा:

रयूमेटॉइड आर्थराइस की स्थिति में आपका इम्यून सिस्टम ही आपके जोड़ों पर हमला कर देता है। नतीजा होता है सूजन और दर्द। यानी यह आपके चलने-फिरने, उठने-बैठने को मुश्किल कर सकता है। जिन लोगों को यह समस्या होती है उन्हें लम्बे समय तक इलाज और परहेज बरतने की आवश्यकता होती है। यदि ध्यान न दिया जाए तो समस्या स्थाई रूप से जोड़ों को क्षति पहुंचा सकती है और विकलांगता भी ला सकती है। 

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सिगरेट का धुआं बच्चों के लिए खतरा - फोटो : iStock

स्मोक से बढ़ता है आरए का खतरा:

यह भी एक तथ्य है कि रयूमेटॉइड आर्थराइटिस बहुत आम समस्या नहीं है लेकिन यह जोड़ों की एक जटिल समस्या जरूर है। इसलिए इससे बचाव भी आवश्यक हो जाता है। यह भी एक तथ्य है कि वे बच्चे जिनके परिवार में आरए यानी रयूमेटॉइड आर्थराइटिस या ऑटोइम्यून डिसीज की समस्या पहले से मौजूद हो, उनके लिए सेकहैंड स्मोक मुश्किल को और भी बढ़ा सकता है। 

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सिगरेट का धुआं बच्चों के लिए खतरा - फोटो : Istock

सेकंड हैंड स्मोक से होने वाली बीमारियां

सेकंड हैंड स्मोक केवल आरए की ही आशंका नहीं बढ़ाता। इसकी वजह से बच्चों में फेफड़ों संबंधी और भी कई समस्याएं पनप सकती हैं। विशेषज्ञों की मानें तो तम्बाकू के धुएं में 4000 से भी ज्यादा रासायनिक तत्व होते हैं जिनमें से कम से कम 250 बीमारी पैदा करने वाले होते हैं। फेफड़ों के अलावा यह दिल के रोगों की आशंका भी बढ़ाता है और कैंसर जैसी समस्याएं भी दे सकता है। यह उन लोगों के लिए अधिक खतरनाक है, जो सिर्फ इस धुएं के सम्पर्क में रहते हैं। जाहिर है कि बच्चों का शरीर विकास की अवस्था में होता है, ऐसे में उनके विकसित होते अंगों के लिए तम्बाकू का धुआं जहर की तरह काम करता है। 

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