कैंसर के कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। पुरुष हो या महिला सभी लिंग और उम्र वालों में कैंसर का खतरा हो सकता है। पुरुषों में लंग्स और मुंह के कैंसर के बाद प्रोस्टेट कैंसर के मामले सबसे ज्यादा देखे जाते रहे हैं। हर आठ में से एक पुरुष को प्रोस्टेट की समस्या या कैंसर का खतरा हो सकता है।
Cancer: कैंसर का जल्द पता लगाने में ये टेस्ट साबित हो सकता है वरदान, हर साल लाखों लोगों की बच सकेगी जान
प्रोस्टेट कैंसर और इसका खतरा
इस टेस्ट के बारे में जानने से पहले प्रोस्टेट कैंसर और इसके जोखिमों को समझना जरूरी है।
प्रोस्टेट कैंसर, प्रोस्टेट ग्रंथि में कोशिकाओं के तेजी से बढ़ने के कारण होता है, ये पुरुष प्रजनन प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण ग्रंथि है। यह पुरुषों में सबसे आम कैंसर है और संयुक्त राज्य अमेरिका में कैंसर से होने वाली मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण है।
डीएनए में कुछ परिवर्तन को इस कैंसर का प्रमुख कारण माना जाता है। जिन लोगों के परिवार में पहले किसी को ये समस्या रही है उनमें प्रोस्टेट कैंसर होने का जोखिम अधिक देखा जाता है। लाइफस्टाइल में गड़बड़ी और मोटापा भी इसका एक जोखिम कारक हो सकती है। डॉक्टरों की सबसे बड़ी चिंता इस कैंसर का समय रहते निदान न हो पाना रही है।
ट्रांसफॉर्म स्क्रीनिंग ट्रायल
प्रोस्टेट कैंसर के जल्द निदान और उपचार में क्रांतिकारी बदलाव लाने के उद्देश्य से यूके में स्क्रीनिंग ट्रायल शुरू किया गया है। 'ट्रांसफॉर्म' नाम से जाने जाने वाले इस ट्रायल को प्रोस्टेट कैंसर यू.के. द्वारा नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर रिसर्च सहित कई अन्य संस्थानों द्वारा वित्त पोषित किया गया है। अभी तक बीमारी का शुरुआती चरणों में ठीक से पहचान करने के लिए कोई स्क्रीनिंग टेस्ट नहीं है।
इस कैंसर के लक्षण भी अक्सर तब तक नहीं नजर आते हैं जब तक कि कैंसर फैल न जाए। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस स्क्रीनिंग परीक्षण की मदद से कैंसर का समय रहते पता लगाना आसान हो सकता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
प्रोस्टेट कैंसर यूके के शोध निदेशक डॉ मैथ्यू हॉब्स ने कहा, ट्रांसफॉर्म का उद्देश्य साफ है। हम बीमारी को उसके शुरुआती चरणों में पकड़ने के लिए सबसे प्रभावी, कम से कम हानिकारक तरीके खोजना चाहते हैं।
अभी तक पुरुषों के रक्त में प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन (पीएसए) नामक रसायन का पता लगाकर कैंसर का पता लगाया जाता रहा है। उच्च जोखिम वाले लोगों को बायोप्सी की सलाह दी जाती है। हॉब्स ने कहा समस्या यह है कि रक्त में पीएसए का स्तर बढ़े रहने का मतलब हर बार जरूरी नहीं है कि ये प्रोस्टेट कैंसर ही हो। वहीं बायोप्सी खर्चीला और दर्दनाक प्रक्रिया है और कभी-कभी इससे संक्रमण और सेप्सिस का भी खतरा रहता है।
प्रोस्टेट कैंसर का समय रहते निदान
हॉब्स ने कहा, ऐसा कोई प्रमुख जीन भी नहीं है जो किसी व्यक्ति को प्रोस्टेट कैंसर के बहुत अधिक जोखिम में डालता है, लेकिन लगभग 400 ऐसे जीन हैं जो मिलकर इसका खतरा जरूर बढ़ा सकते हैं। हम जीन के इसी पैनल का उपयोग करके यह देखने की कोशिश कर रहे हैं कि किसी व्यक्ति में प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम कितना हो सकता है?
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में यूरोलॉजी की प्रमुख प्रोफेसर कैरोलीन मूर ने कहा, प्रोस्टेट कैंसर के वैश्विक आंकड़े काफी चिंताजनक है। उम्मीद है कि भविष्य में हमारे पास बेहतर तकनीक होगी जिससे इस कैंसर का समय रहते पता लगाकर लोगों की जान बचाने में मदद मिल सकेगी।
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स्रोत और संदर्भ
TRANSFORM trial, the biggest prostate cancer screening trial
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