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वैज्ञानिकों की चेतावनी: कोविड-19 के बाद अब आ सकता है कोविड-22, डेल्टा वैरिएंट से भी होगा खतरनाक

Tue, 24 Aug 2021 02:46 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Tue, 24 Aug 2021 02:46 PM IST
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Scientist warnings for super Corna variant 'Covid-22, more dangerous than delta variant
कोरोना का सबसे खतरनाक रूप (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

कोरोना का डेल्टा वैरिएंट दुनियाभर में संक्रमण के एकबार फिर से बढ़ते मामलों का मुख्य कारण माना जा रहा है। तमाम अध्ययनों में वैज्ञानिकों ने कोरोना के इस वैरिएंट को अपेक्षाकृत काफी संक्रामक और घातक बताया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इस वैरिएंट को लेकर चिंतित है। इस बीच हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनिया में कोरोना का कहर फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। आने वाले वर्षों में कोरोना के और भी घातक वैरिएंट्स सामने आ सकते हैं। इसी संबंध में स्विटजरलैंड के ईटीएच ज्यूरिख विश्वविद्यालय के इम्यूनोलॉजिस्ट ने कोविड-19 से घातक कोरोना के सुपर वैरिएंट 'कोविड-22' को लेकर लोगों को आगाह किया है।


वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना के संभावित नवीनतम खतरों को लेकर भी लोगों को विशेष सावधान रहने की आवश्यकता है। कोरोना का सुपर वैरिएंट, मौजूदा समय में दुनियाभर के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रहे कोरोना के डेल्ट वैरिएंट से कहीं अधिक खतरनाक हो सकता है।  कोरोना के इस संभावित सुपर वैरिएंट से मुकाबला करने के लिए सिर्फ वैक्सीन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं कि वैज्ञानिक सुपर वैरिएंट से संबंधित और किन खतरों को लेकर लोगों को सचेत कर रहे हैं।

Scientist warnings for super Corna variant 'Covid-22, more dangerous than delta variant
कोविड-22 हो सकता है बेहद खतरनाक (प्रतीकात्मक) - फोटो : iStock

कैसे हो सकेगा सुपर वैरिएंट से मुकाबला?
विश्वविद्यालय के इम्यूनोलॉजिस्ट प्रोफेसर डॉक्टर साई रेड्डी कहते हैं, भविष्य के इस गंभीर खतरे को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य संगठनों को अभी से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। कोरोना के सुपर वैरिएंट से मुकाबले के लिए हमें और अधिक शक्तिशाली वैक्सीन की आवश्यकता हो सकती है। वहीं जिन लोगों को तब तक वैक्सीन नहीं लग पाएगी वह कोरोना के संभावित सुपर-स्प्रेडर साबित हो सकते हैं। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि कोरोना का सुपर वैरिएंट शरीर में बनी प्रतिरक्षा को आसानी से चकमा दे सकता है, ऐसे में एक बार फिर से संक्रमण का खतरा सभी लोगों में हो सकता है। वहीं जिन्हें वैक्सीन नहीं लगी होगी, उनमें खतरा आज के मुकाबले कई गुना तक अधिक हो सकता है।



 

Scientist warnings for super Corna variant 'Covid-22, more dangerous than delta variant
कोरोना के डेल्टा वैरिएंट्स से भी खतरनाक हो सकता है कोविड-22 (प्रतीकात्मक) - फोटो : iStock

डेल्टा से भी हो सकता है ज्यादा खतरनाक
कोरोना के संभावित सुपर वैरिएंट कोविड-22 को लेकर लोगों को सचेत करते हुए डॉक्टर साई रेड्डी कहते हैं, कोरोना की जिस स्थिति का हम अभी सामना कर रहे हैं, कोविड-22 उससे कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। डेल्टा वैरिएंट से मुकाबले के साथ-साथ हमें भविष्य की इस गंभीर चुनौती को लेकर भी अभी से तैयार रहना होगा। डॉ रेड्डी कहते हैं, फिलहाल दुनियाभर में कोरोना के डेल्टा वैरिएंट का कहर जारी है। डेल्टा का वायरल लोड इतना अधिक है कि जिन लोगों का टीकाकरण नहीं हुआ है या जो भी लोग इस वैरिएंट से संक्रमित हो जाते हैं, वह इसके सुपर स्प्रेडर हो सकते हैं। यही कारण है कि सभी लोगों को जल्द से जल्द टीकाकरण करा लेना चाहिए।

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Scientist warnings for super Corna variant 'Covid-22, more dangerous than delta variant
कोविड-22 से बचने के लिए होगी प्रभावी टीकों की जरूरत (सांकेतिक) - फोटो : पीटीआई

बच्चों को भी सुरक्षित करना जरूरी
बच्चों में संक्रमण के खतरे को लेकर प्रोफेसर रेड़्डी कहते हैं, सभी लोगों के टीकाकरण का मतलब इसमें बच्चों को भी शामिल करने से है। कई अध्ययनों से स्पष्ट हो चुका है कि 12 साल से कम उम्र के बच्चों में टीकाकरण से कोई खतरा नहीं है। ठंड का मौसम में एक बार फिर से संक्रमण के मामलों में तेजी आ सकती है। इससे पहले सभी सरकारों को ज्यादा से ज्यादा लोगों का टीकाकरण कराने का लक्ष्य रखना होगा। 

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Scientist warnings for super Corna variant 'Covid-22, more dangerous than delta variant
गंभीर जटिलताएं उत्पन्न कर सकता है कोरोना का सुपर वैरिएंट (प्रतीकात्मक) - फोटो : पिक्साबे

सुपर वैरिएंट को लेकर अभी से सतर्क रहने की जरूरत
कोरोना के सुपर वैरिएंट को लेकर प्रोफेसर रेड़्डी कहते हैं, हमें ऐसे टीकों को विकसित करने की जरूरत है जो लगातार सामने आ रहे कोरोना के नए वैरिएंट्स से मुकाबले के अनुकूल हों। कोविड-22 से मुकाबले के लिए फिलहाल यही एक उपाय हो सकता है। कोरोना का यह नया रूप कितना घातक और संक्रामक हो सकता है, इसे जानने के लिए अध्ययन किया जा रहा है। फिलहाल इससे बचाव के लिए अभी से तैयार रहने की आवश्यकता है। कोरोना के मामलों के कम होने को कोरोना खत्म हो गया, यह समझ लेना हमारी सबसे बड़ी भूल साबित हो सकती है। सुपर वैरिएंट की स्थिति में इस तरह की भूल के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।


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स्रोत और संदर्भ: 
ETH-Forscher warnt vor neuer Corona-Super-Variante

अस्वीकरण नोट: यह लेख एक स्विस अखबार को दिए गए ईटीएच ज्यूरिख विश्वविद्यालय के इम्यूनोलॉजिस्ट के इंटरव्यू के आधार पर तैयार किया गया है। अमर उजाला किसी भी दावे की जिम्मेदारी नहीं लेता है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं।

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