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Hindi News ›   Lifestyle ›   Navratri 2026 Kalash Sthapana: When to Perform Ghatasthapana? Check Muhurat and Puja Samagri

शारदीय नवरात्रि 2026:कलश स्थापना की तैयारी कर लें! नवरात्रि में कब है घटस्थापना, नोट कर लें पूजा सामग्री लिस्ट

Tue, 06 Oct 2026 03:12 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Tue, 06 Oct 2026 03:12 PM IST
सार

Navratri Kalash Sthapna: कलश स्थापना के लिए बहुत सारी चीजों की जरूरत नहीं होती, लेकिन कुछ पारंपरिक सामग्री पहले से तैयार रखना सुविधाजनक रहता है। आइए जानते हैं कलश स्थापना की तारीख और पूजा सामग्री की पूरी सूची, ताकि नवरात्रि के पहले दिन किसी सामान की कमी न रहे।
 

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Navratri 2026 Kalash Sthapana: When to Perform Ghatasthapana? Check Muhurat and Puja Samagri
कलश स्थापना की पूजा सामग्री - फोटो : AI

विस्तार

Ghatsthapana Puja Samagri: शारदीय नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही घरों और मंदिरों में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना शुरू हो जाती है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना या घटस्थापना को विशेष महत्व दिया जाता है। भक्त विधि-विधान से कलश स्थापित करके नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करते हैं। ऐसे में नवरात्रि शुरू होने से पहले यह जानना जरूरी है कि कलश स्थापना कब करनी है और इसके लिए किन-किन चीजों की आवश्यकता होगी।

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साल 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026, रविवार से होगी। घटस्थापना के मुहुर्त में अलग-अलग शहरों के हिसाब से अंतर हो सकता है। पूजा की तैयारी करते समय अपने शहर के अनुसार पंचांग से समय जरूर जांच लें।
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कलश स्थापना के लिए बहुत सारी चीजों की जरूरत नहीं होती, लेकिन कुछ पारंपरिक सामग्री पहले से तैयार रखना सुविधाजनक रहता है। आइए जानते हैं कलश स्थापना की तारीख और पूजा सामग्री की पूरी सूची, ताकि नवरात्रि के पहले दिन किसी सामान की कमी न रहे।
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नवरात्रि 2026 कब से शुरू होगी?

शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 से मानी जा रही है। इसी दिन नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है और कई घरों में इसी दिन घटस्थापना की जाती है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होती है। इसलिए भक्त पहले दिन से ही पूजा स्थल की साफ-सफाई और आवश्यक सामग्री की तैयारी पूरी कर लेते हैं।


कलश स्थापना के लिए जरूरी सामग्री

घटस्थापना से पहले एक जगह सभी सामग्री इकट्ठी कर लें। सामान्य तौर पर इन चीजों की जरूरत पड़ सकती है,
 

  • मिट्टी का कलश या तांबे/पीतल का कलश

  • साफ जल

  • गंगाजल

  • आम या अशोक के पत्ते

  • नारियल

  • मौली या कलावा

  • रोली और अक्षत

  • सुपारी

  • सिक्का

  • फूल और माला

  • धूप और दीपक

  • कपूर

  • लाल या पीला कपड़ा

  • मिट्टी और जौ (स्थापना के साथ जौ बोने की परंपरा होती है। इसके लिए साफ मिट्टी में जौ बोए जाते हैं और नौ दिनों तक इन्हें जल से सींचा जाता है।)

  • पूजा की थाली

  • फल और प्रसाद

ध्यान रखें कि पूजा सामग्री की सूची क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए अपने घर में चली आ रही पूजा विधि के अनुसार सामग्री में बदलाव किया जा सकता है।


घटस्थापना में जौ का क्या महत्व है?

नवरात्रि के दौरान कई घरों में कलश स्थापना के साथ जौ बोने की परंपरा होती है। इसके लिए साफ मिट्टी में जौ बोए जाते हैं और नौ दिनों तक उनकी देखभाल की जाती है।

नवरात्रि के अंत तक जौ के अंकुरित होने को धार्मिक परंपरा में शुभता और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जौ के अंकुरण पर मौसमटस्थापना से पहले पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई कर लें। जहां कलश स्थापित करना है, वहां साफ कपड़ा या पूजा का आसन बिछाएं। सभी सामग्री को पहले से एक जगह रखने से पूजा के, मिट्टी और पानी जैसी प्राकृतिक परिस्थितियों का प्रभाव पड़ता है।


कलश स्थापना से पहले करें ये तैयारी

घटस्थापना से पहले पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई कर लें। जहां कलश स्थापित करना है, वहां साफ कपड़ा या पूजा का आसन बिछाएं। सभी सामग्री को पहले से एक जगह रखने से पूजा के समय भागदौड़ नहीं होगी।

अगर अखंड ज्योति जलाने की परंपरा आपके घर में है, तो उसके लिए सुरक्षित घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए सुविधा के अनुसार किसी भी समय कलश स्थापित करने के बजाय स्थान और पर्याप्त व्यवस्था भी पहले से कर लें।




क्या कलश स्थापना किसी भी समय कर सकते हैं?

धार्मिक परंपरा में घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए सुविधा के अनुसार किसी भी समय कलश स्थापित करने के बजाय स्थानीय पंचांग में दिए गए शुभ समय को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है।मुहूर्त को लेकर परिवार या क्षेत्र की परंपरा अलग हो तो किसी विद्वान पंडित या स्थानीय पंचांग से पुष्टि कर सकते हैं।

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