मच्छरों के कारण होने वाली तमाम तरह की बीमारियों का खतरा इन दिनों तेजी से बढ़ता जा रहा है। सितंबर-अक्तूबर के महीने में देश में डेंगू-चिकनगुनिया जैसे संक्रमण काफी तेजी से बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। इन संक्रमणों की गंभीर स्थिति जानलेवा भी हो सकती है, जिसके बारे में सभी लोगों को लगातार सावधानी बरतते रहने की सलाह दी जाती है। कई देशों में मच्छरों के काटने के कारण होने वाले जीका संक्रमण के खतरे को लेकर भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सावधानी बरतते रहने की सलाह दी है। एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने यह भी समझने की कोशिश की है कि कैसे मानव कोशिकाएं जीका वायरस की फैक्ट्री बन जाती हैं?
Zika virus: मानव कोशिकाओं को कैसे प्रभावित करता है संक्रमण? अध्ययन में सामने आई यह बड़ी जानकारी
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?
यूसी सैन डिएगो के प्रोफेसर आरोन कार्लिन कहते हैं, जीका संक्रमण का इलाज या रोकथाम कैसे किया जा सकता है? इस बारे में जानने के लिए सबसे पहले यह समझना होगा कि यह मानव कोशिकाओं के साथ कैसे इंटरेक्ट करता है। इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि एक बार जब यह वायरस शरीर में प्रवेश करता है, तो वह सीधे डेंड्राइटिक कोशिकाओं की ओर जाता है। ये कोशिकाएं जन्मजात प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रमुख कोशिकाएं होती हैं।
अध्ययन में क्या पता चला?
इस शोध के लिए वैज्ञानिकों की टीम ने डेंगू या जीका संक्रमण के बाद डेंड्राइटिक कोशिकाओं में होने वाले जीन अभिव्यक्ति में परिवर्तन की जांच की। इसकी मॉक इंफेक्शन के साथ तुलना भी की गई। इस तुलनात्मक अध्ययन में पाया गया कि कैसे जीका वायरस, कोशिकाओं को टेकओवर करके संक्रमण का कारक बनता है।
वैज्ञानिकों ने पाया कि जीका वायरस डेंड्राइटिक कोशिकाओं में उन जीन्स को प्रभावित करता है जो लिपिड मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती हैं। शोधकर्ता एमिल ब्रान्चे के अनुसार, "हमने पाया कि जीका शरीर में स्वयं को बढ़ावा देने के लिए सेलुलर मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है। इस अध्ययन से प्राप्त डेटा के आधार पर भविष्य में हमें जीका की रोकथाम के लिए इलाज प्रक्रियाओं को तैयार करने में मदद मिल सकती है।
जीका का इलाज अभी उपलब्ध नहीं
गौरतलब है कि फिलहाल जीका वायरस के संक्रमण को ठीक करने के लिए कोई विशिष्ट उपचार नहीं है। लक्षणों से राहत पाने के लिए रोगी को आराम करने और निर्जलीकरण को रोकने के लिए खूब सारे तरल पदार्थों के सेवन की सलाह दी जाती है। ओवर-द-काउंटर दवाओं से जोड़ों के दर्द और बुखार से राहत पाई जा सकती है। जीका वायरस संक्रमण के लक्षण अन्य मच्छर जनित बीमारियों जैसे डेंगू बुखार के समान ही होते हैं। इसलिए जांच के आधार पर स्थिति का सही निदान और समय पर सहायक इलाज किया जाना आवश्यक हो जाता है।
कैसे रहें इस संक्रमण से सुरक्षित?
जीका वायरस से बचाव के लिए फिलहाल कोई टीका भी नहीं है, लेकिन आप वायरस के संपर्क में आने के जोखिम को कम करने के लिए कदम उठा सकते हैं। जीका वायरस वाले मच्छर सुबह से शाम तक सबसे अधिक सक्रिय होते हैं, लेकिन वे रात में भी काट सकते हैं। मच्छरदानी में सोने और मच्छरों को पनपने से रोकने को लेकर सावधानी रखना बहुत आवश्यक हो जाता है। पूरी बाजू की शर्ट, फुल पैंट आदि पहनने से मच्छरों के काटने का खतरा कम होता है। मच्छर आमतौर पर स्थिर पानी में प्रजनन करते हैं, सप्ताह में कम से कम एक बार पानी के जमाव वाली चीजों को जरूर साफ कर लेना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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