दुनियाभर में पिछले डेढ़ साल से जारी कोरोना का संक्रमण स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। लोगों को संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए दुनियाभर में कई तरह की वैक्सीन बन चुकी हैं, जिन्हें तमाम अध्ययनों में बेहद असरदार बताया गया है। देश में फिलहाल कोरोना से सुरक्षा देने के लिए 6 वैक्सीनों को आपातकालीन उपयोग को मंजूरी मिल चुकी है। जिनमें से तीन स्वदेशी वैक्सीन कोवाक्सिन, कोविशील्ड और जाइकोब-डी के साथ रूस की स्पूतनिक-वी तथा अमेरिका की माडर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन शामिल है। दुनिया के कई देशों में कोरोना के तेजी से बढ़ते संक्रमण को देखते हुए विशेषज्ञ सभी लोगों से जल्द से जल्द टीकाकरण कराने की अपील कर रहे हैं।
वैक्सीन एक-काम अनेक: कोरोना के साथ अन्य वायरस से मुकाबले के लिए एक ही वैक्सीन विकसित करने की तैयारी
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एक ही वैक्सीन से अनेक संक्रमण से सुरक्षा की योजना
We are also testing each of these COVID19 vaccines for variants of COVID19. We are now looking at developing a vaccine that can be pan-corona so that if any other virus comes in then the vaccine can respond to it: Dr Renu Swarup, Secretary, Dept of Biotechnology, GoI
क्या एक ही वैक्सीन से कोरोना के साथ कई अन्य गंभीर वायरल संक्रमणों से सुरक्षा मिल सकती है? इस बारे में देश के वैज्ञानिक लगातार शोध कर रहे हैं। भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव डॉ रेणु स्वरूप कहती हैं, देश में कोरोना संक्रमण और नए वैरिएंट्स के खतरे को कम करने के लिए कोविड की वैक्सीनों का परीक्षण किया जा रहा है। इसके अलावा वैज्ञानिक पैन-कोरोना भी एक वैक्सीन को विकसित करने की संभावनाओं पर शोध कर रहे हैं, जिससे भविष्य में यदि कोरोना की तरह अन्य कोई वायरस आता है तो यह वैक्सीन उससे भी मुकाबला कर सके। वैज्ञानिक ऐसी संभावनाओं के बारे में अध्ययन कर रहे हैं।
भारत में कोरोना से मुकाबले के लिए मौजूद हैं असरदार टीके
We've a pipeline of vaccines-EUA given for the DNA vaccine,our own MRNA candidate likely to move into ph-3 soon, Biological E candidate may go to the regulator for approval by Sept end&nasal vaccine given Ph2-3 approval:Dr Renu Swarup, Secy, Dept of Biotechnology, GoI on vaccines pic.twitter.com/6EjQG3cbyg
देश में वैक्सीन की स्थिति और उनकी प्रभाविकता को लेकर डॉ रेणु स्वरूप कहती हैं, हमारे पास कोरोना के टीकों की एक पाइपलाइन है। हाल ही में कोविड की डीएनए वैक्सीन को आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी मिली है, इसके अलावा हमारे अपने एमआरएनए वैक्सीन के जल्द ही तीसरे चरण के परीक्षण में जाने की संभावना है। इसके अलावा बायोलॉडिकल ई कैंडिडेट सितंबर के अंत तक अनुमोदन के लिए ड्रग नियामक में आवेदन कर सकते हैं। नेजल वैक्सीन को भी दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षण की मंजूरी मिल चुकी है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि भारत कम समय में ही कोरोना से मुकाबले के लिए मजबूत स्थिति में है।
कोरोना की पहली डीएनए वैक्सीन बनी है भारत में
भारत ने कोरोना से मुकाबले के लिए दुनिया की पहली डीएनए आधारित वैक्सीन विकसित की है। अहमदाबाद स्थित फार्मास्युटिकल प्रमुख कंपनी जायडस कैडिला द्वारा विकसित की जाइकोब-डी डीएनए तकनीक पर आधारित वैक्सीन है। यह एक प्लास्मिड डीएनए वैक्सीन है जो प्लास्मिड नामक डीएनए अणु के गैर-प्रतिकृति वर्जन का उपयोग करके तैयार की गई है। यह शरीर में सार्स-सीओवी-2 वायरस के मेंब्रेन पर मौजूद स्पाइक प्रोटीन का एक हानिरहित वर्जन तैयार करने में मदद करेगी, जिससे भविष्य में संक्रमण के खिलाफ आसानी से सुरक्षा प्राप्त की जा सकेगी। कई परीक्षणों में इसके अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं। ड्रग नियामक की ओर से इस वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल को मंजूरी मिल चुकी है।
बच्चों के लिए दो वैक्सीन हैं लाइन में
दुनियाभर में बच्चों के लिए कोरोना के टीके फिलहाल सबसे बड़ी मुश्किल बने हुए हैं। जिस तरह के कोरोना के नए वैरिएंट्स सामने आ रहे हैं, ऐसे में बच्चों में संक्रमण के ज्यादा खतरे को लेकर विशेषज्ञ आगाह कर रहे हैं। भारत में बच्चों के लिए फिलहाल जाइकोब-डी वैक्सीन को आपातकालीन उपयोग की मंजूरी मिल चुकी है, वहीं कुछ रिपोर्टस में बताया जा रहा है कि सरकार जल्द ही कोवाक्सिन को भी बच्चों के लिए मंजूरी दे सकती है। फिलहाल इस टीके का ट्रायल चल रहा है।
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नोट: यह लेख एएनआई की ट्वीट और तमाम मीडिया रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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