देश में कोरोना संक्रमण के दूसरी लहर की रफ्तार अब लगभग थम गई है, स्थिति के दोबारा से सामान्य होता देख कई राज्यों ने स्कूलों को खोलने का फैसला कर लिया है। कोविड की मौजूदा स्थिति की बात करें तो फिलहाल रोजाना के मामले 40 हजार के आसपास बने हुए हैं। पंजाब और छत्तीसगढ़ ने सोमवार से स्कूल खोल दिए हैं वहीं उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश 16 अगस्त से स्कूलों को फिर से खोलने की तैयारी में हैं। कोरोना के तीसरी लहर की आशंकाओं बीच यह फैसला कितना सही और चुनौतीपूर्ण हो सकता है, इसे लेकर चर्चा जारी है। इन सबके बीच माता-पिता के लिए बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा दोनों ही चिंता का विषय बनी हुई है।
कोरोना से बचाव: बच्चों को भेज रहे हैं स्कूल तो इन बातों का जरूर रखें ध्यान, विशेषज्ञों ने बताए सुरक्षा के उपाय
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बच्चों की सुरक्षा में न हो कोई लापरवाही
अमर उजाला से बातचीत में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ रिचा सक्सेना कहती हैं, कुछ देशों में बच्चों को टीके दिए जाने की शुरुआत हो चुकी है, हालांकि इसकी संख्या काफी कम है। मोटे तौर पर देखें तो बच्चों को अब तक कोरोना से सुरक्षा के लिए वैक्सीन की एक भी खुराक नहीं मिल पाई है, ऐसे में उनके लिए संक्रमण का खतरा वैसा ही बना हुआ है जैसा कि दूसरी लहर के पहले था। ज्यादातर स्कूलों ने 50 फीसदी की क्षमता के साथ शुरुआत की है, लेकिन संक्रमण के लिए इसे भी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। बच्चे, कोविड से सुरक्षा के उपायों का खुद से कितना पालन करते हैं यह भी बड़ा सवाल है, शिक्षकों को यह सुनिश्चित करना होगा। इसके अलावा सरकार को जल्द से जल्द बच्चों के लिए वैक्सीन उपलब्ध कराने की दिशा में कोशिश करनी होगी जिससे इन्हें भी सुरक्षात्मक डोज मिल सके।
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक स्कूलों में आमतौर अलग-अलग स्थानों से बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं, ऐसे में इन्हें दोबारा से खोलने की योजना बनाते समय विद्यालयों को तमाम स्तर पर सुरक्षा के इंतजाम कर लेने चाहिए। सभी स्कूलों को सुरक्षा के उपाय सुनिश्चित करने चाहिए जिससे किसी भी तरह से संक्रमण का खतरा न होने पाए। इसके लिए कुछ बातों को ध्यान में रखना बेहद आवश्यक है।
- वैक्सीनेशन को बढ़ावा- सीडीसी के मुताबिक स्कूल के शिक्षकों और अन्य लोगों का टीकाकरण अवश्यक होना चाहिए। इसके अलावा सरकारों को भी जल्द से जल्द बच्चों के लिए वैक्सीन उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास करने चाहिए। फिलहाल कोरोना के संक्रमण से सुरक्षित रहने के लिए यही सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है। भारत के संदर्भ में बात करें तो यहां अभी तक बच्चों के लिए वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
- बच्चों के लिए मास्क जरूरी- सीडीसी के सुझावों के मुताबिक चूंकि बच्चों का टीकाकरण नहीं हुआ है, ऐसे में स्कूलों में बच्चे मास्क लगाकर रखें, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। स्कूल के भीतर और बाहर दोनों जगह बच्चों को मास्क लगाकर रखने के लिए कहें।
- फिजिकल डिस्टेंसिंग- विशेषज्ञों के सुझावों के अनुसार स्कूल के भीतर कक्षा में बच्चों के फिजिकल डिस्टेंसिंग का विशेष ध्यान रखें। सीट को ऐसे व्यवस्थित किया जाना चाहिए जिससे कि एक बच्चे से दूसरे के बीच पर्याप्त दूरी बनी रहे। स्कूल के साथ-साथ अभिभावक भी इस बारे में बच्चों को प्रेरित और शिक्षित करें। कोरोना संक्रमण की रोकथाम में फिजिकल डिस्टेंसिंग की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
- वेंटिलेशन और स्क्रीन टेस्टिंग- स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोनावायरस की रोकथाम के लिए कक्षाओं में अच्छी तरह से वेंटिलेशन होना आवश्यक है। सभी स्कूल सुनिश्चित करें कि क्लासरूम में बाहर से स्वच्छ हवा आने की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए। कई अध्ययनों में पाया गया है कि वेंटिलेशन की व्यवस्था अच्छी न होने पर संक्रमण के बढ़ने का खतरा अधिक हो सकता है। इसके अलावा समय-समय पर बच्चों का स्क्रीन टेस्टिंग किया जाना चाहिए, जिससे खतरे से बचा जा सके।
- हाथों की स्वच्छता का विशेष ध्यान- विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल और माता-पिता दोनों सुनिश्चित करें कि बच्चे अपने हाथों की साफ-साफई करते रहें। उन्हें इस बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए। सभी को बार-बार हाथ धोने और छोटे बच्चों को हाथ धुलाने में मदद करें। यदि हाथ धोना संभव नहीं है, तो हैंड सैनिटाइज़र का उपयोग सुनिश्चित करें।
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नोट: यह लेख डॉ. रिचा सक्सेना (बाल रोग विशेषज्ञ, गोरखपुर, उत्तरप्रदेश) और सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।