फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

विशेषज्ञ की चेतावनी: कोरोना के कम होते मामलों के बीच इन बीमारियों ने बढ़ाई चिंता, लापरवाही पड़ सकती है भारी

Sun, 11 Jul 2021 11:48 AM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Sun, 11 Jul 2021 11:48 AM IST
विज्ञापन
rise in zika virus and dengue cases in india, expert warn
देश में तेजी से बढ़ते जीका और डेंगू के मामले (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik


डॉ. परवेश मलिक 
फिजिशियन, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एमडी (जनरल मेडिसिन)


इसी साल अप्रैल में आई कोरोना की दूसरी लहर ने देश में खूब अफरा-तफरी मचाई। पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर की संक्रामता अधिक रही जिसका असर देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के बुनियादी ढांचे पर स्पष्ट रूप से देखने को मिला। फिलहाल कोरोना की दूसरी लहर की रफ्तार थम गई है और देश दोबारा से सामान्य स्थिति में लौट रहा है। हालांकि इन सबके बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को अन्य बीमारियों के प्रति सचेत रहने की सलाह दी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना के कम होते मामलों में बीच देश में मानसून से संबंधित कई मौसमी बीमारियां तेजी से बढ़ रही है। इनमें से कई बीमारियां मच्छरों जनित हैं जिनका हाल के वर्षों में देश पर बुरा असर देखने को मिला है। कोरोना के कम होते मामलों के बीच हम स्वास्थ्य को लेकर आस्वस्त हो गए हैं, जोकि सही नहीं है। हालिया रिपोर्टस में कई बीमारियों के गंभीर रूप लेने की भी खबर है, ऐसे में सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

rise in zika virus and dengue cases in india, expert warn
जीका वायरस के मामलों में बढ़ोतरी - फोटो : iStock

जीका वायरस के बढ़े मामले
हालिया मीडिया रिपोर्टस में देश के कई राज्यों में जीका वायरस के बढ़ते मामलों की खबर है। केरल में जीका वायरस के 14 मामले सामने आए हैं, जिसके बाद से स्वास्थ्य अधिकारी अलर्ट पर हैं। इसी तरह कर्नाटक सरकार ने भी जीका के बढ़ते मामलों से बचने के लिए गाइडलाइंस जारी कर दिए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक मानसून के मौसम में इस तरह के संक्रमण के मामले पहले भी आते रहे हैं, इनको लेकर सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इस समय स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही बरतना भारी पड़ सकता है।

rise in zika virus and dengue cases in india, expert warn
जीका वायरस से बचाव जरूरी - फोटो : Social media

कैसे करें जीका वायरस से बचाव?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जीका के लक्षण डेंगू से मिलते-जुलते हैं। इनमें भी लोगों को बुखार, त्वचा पर चकत्ते और जोड़ों का दर्द की शिकायत हो सकती हैं। हां पर दोनों बीमारियां अलग हैं, इनकी पहचान पर समय पर इलाज कराना बेहद आवश्यक होता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की ओर से जारी एक परिपत्र में कहा गया है कि मानसून का मौसम एडीज मच्छरों के प्रसार के लिए अनुकूल होता है, यही मच्छर जीका वायरस के लिए जिम्मेदार होते हैं। जीका से बचाव के उपायों को प्रयोग में लाएं, मच्छरों के प्रजनन को रोकने पर विशेष ध्यान दें। सुरक्षात्मक उपायों को अपनाकर जीका वायरस और अन्य मच्छर जनित रोगों से बचाव किया जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
rise in zika virus and dengue cases in india, expert warn
मानसूम में बढ़ जाते हैं डेंगू बुखार के मामले - फोटो : Social media

डेंगू से बचाव करें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मानसून के समय में डेंगू के मामलों में भी हर साल इजाफा देखने को मिलता है। यह बीमारी भी एडीज मच्छरों के काटने के कारण फैलती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक हाल के दशकों में दुनियाभर में डेंगू के मामलों में नाटकीय रूप से वृद्धि हुई है। दुनिया की लगभग आधी आबादी इसके खतरे में है। हर साल अनुमानित 100-400 मिलियन (10-40 करोड़) लोग इस संक्रमण की चपेट में आते हैं। हालिया रिपोर्टस के मुताबिक पंजाब के पटियाला शहर में 158 स्थानों पर डेंगू के लार्वा मिलने की खबर है। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक सभी लोगों को इस समय डेंगू से भी सतर्क रहने की आवश्यकता है। डेंगू से बचाव ही सबसे बेहतर उपाय है।

विज्ञापन
rise in zika virus and dengue cases in india, expert warn
कालरा रोग से भी रहें सावधान (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

मानसून में कालरा से भी बचकर रहने की जरूरत
डॉक्टरों की मानें तो मानसून का मौसम अपने साथ कई तरह की बीमारियों को लेकर आता है। कालरा भी उन्हीं में से एक है। विब्रियो कालरा नामक बैक्टीरिया के कारण होने वाली यह बीमारी कई बार गंभीर रूप ले सकती है। मुख्य रूप से यह बीमारी जल की अशुद्धता के कारण फैलती है और इसमें रोगी का गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट प्रभावित हो जाता है। रोगी को गंभीर निर्जलीकरण और दस्त की समस्या हो सकती है। ऐसी स्थिति में त्वरित उपचार बेहद आवश्यक होता है। कालरा से बचाव के लिए सभी लोगों को  उबला हुआ या शुद्ध पानी पीना चाहिए।

------------------
नोट: यह लेख डॉ. परवेश मलिक के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। डॉ. परवेश एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed