लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी ने हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित किया है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी क्रॉनिक बीमारियों का शिकार होते जा रहे हैं। शारीरिक स्वास्थ्य के जोखिमों को देखते हुए हम सभी इसमें सुधार के लिए तो निरंतर प्रयास करते रहते हैं, पर मेंटल हेल्थ को अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। हालांकि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के आंकड़े काफी चिंता बढ़ाने वाले हैं।
Mental Health: मेंटल हेल्थ का सीक्रेट फॉर्मूला, रोजाना बस 1 घंटे की आदत 40% तक कम कर सकती है डिप्रेशन का खतरा
Depression Risk Factors: लगातार उदासी रहना, किसी काम में मन न लगना, चिड़चिड़ापन, नींद या भूख में कमी, खुद को बेकार महसूस करना, थकान और फोकस की कमी डिप्रेशन के आम संकेत हैं। समय रहते इन लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है। शुरुआती स्तर पर इलाज और लाइफस्टाइल बदलाव से स्थिति को संभाला जा सकता है।
एक घंटे की आदत कम करती है डिप्रेशन का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मेंटल हेल्थ की समस्याओं, डिप्रेशन के बढ़ते मामलों के लिए वैसे तो कई कारणों को जिम्मेदार माना जा सकता है, पर अगर हम सभी टीवी देखने या मोबाइल चलाते रहने के बजाय इसी समय को शारीरिक गतिविधियों-व्यायाम के लिए इस्तेमाल में लाना शुरू कर देते हैं तो इससे मिडलाइफ में डिप्रेशन का खतरा काफी कम हो सकता है।
- यूरोपियन साइकियाट्री जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने कहा कि टीवी देखने की जगह सिर्फ एक घंटे दूसरी एक्टिविटीज जैसे खेल-कूद, व्यायाम, रनिंग यहां तक कि शरीर को आराम देने या फिर नींद लेने में ही लगा दिया जाए तो इससे आगे चलकर डिप्रेशन होने के खतरे को 40% तक कम किया जा सकता है।
- स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, जिस गति से दुनियाभर में मेंटल हेल्थ की समस्या और डिप्रेशन के मामले बढ़ते जा रहे हैं, ऐसे में ये छोटा सा बदलाव आपके जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, दुनियाभर में 280 मिलियन (28 करोड़) से ज्यादा लोगों को डिप्रेशन है। इससे बचे रहने के लिए विशेषज्ञों ने बताया है कि सिर्फ एक घंटे टीवी देखने की जगह दूसरी एक्टिविटीज में यही समय लगाने से भी आपको काफी लाभ मिल सकता है।
- टीवी या किसी अन्य प्रकार की स्क्रीन पर समय बिताने की जगह अगर सिर्फ आधे घंटे अगर खेल-कूद में लगा दिए जाएं तो इससे डिप्रेशन का खतरा 18% तक कम होता देखा गया है।
- ज्यादा उम्र के लोगों में, इस आसान बदलाव से खतरा लगभग 30 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
- टीवी या स्क्रीन देखने के बजाय अगर आप एक घंटे की अधिक नींद भी लेते हैं तो इससे भी डिप्रेशन के खतरे में कमी आ सकती है।
टीवी या स्क्रीन टाइम कितना नुकसानदायक
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा देना, आपके मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की सेहत को ठीक रखने में मददगार हो सकता है। गतिहीन जीवनशैली से मोटापा, टाइप 2 मधुमेह, कैंसर और यहां तक कि असमय मृत्यु का खतरा भी बढ़ जाता है। लाइफस्टाइल में छोटा सा बदलाव करके आप इस तरह की कई समस्याओं के खतरे को कम कर सकते हैं।
नीदरलैंड्स की यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रोनिंगन के विशेषज्ञों ने कहा, यह सिर्फ एक जगह बैठे रहने के समय के बारे में नहीं है।
- टीवी या स्क्रीन देखने जैसी दिमागी तौर पर पैसिव एक्टिविटीज से डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है।
- ये आदत डोपामाइन के रेगुलेशन में गड़बड़ी, अनहेल्दी खान-पान और सोशल आइसोलेशन का कारण बनती है जिसका मेंटल हेल्थ पर नकारात्मक असर होता है।
मेंटल हेल्थ ठीक रखने के लिए क्या करें?
शोधकर्ता कहते हैं, टीवी-मोबाइल देखने का हर अतिरिक्त घंटा डिप्रेशन के 5 प्रतिशत तक खतरे को बढ़ाने वाला हो सकता है।
विशेषज्ञ कहते हैं, लगातार उदासी रहना, किसी भी काम में मन न लगना, चिड़चिड़ापन, नींद या भूख में कमी, खुद को बेकार महसूस करना, थकान और फोकस की कमी डिप्रेशन के आम संकेत हैं। समय रहते इन लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है, क्योंकि शुरुआती स्तर पर इलाज और लाइफस्टाइल बदलाव से स्थिति को संभाला जा सकता है।
नियमित व्यायाम की आदत तनाव हार्मोन को कम करती है और मूड को बेहतर बनाती है। रोज 7-8 घंटे की नींद लेना दिमाग को रिकवर करने में मदद करती है। माइंडफुलनेस या मेडिटेशन अपनाना भी तनाव कम करता है और आपको डिप्रेशन से बचाने वाला हो सकता है।
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स्रोत
Effects of substituting TV-watching time with physical activities or sleep on incident major depression. Results from the lifelines cohort study
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