साल 2019 में पहली बार सामने आए नोवेल कोरोना वायरस के अब तक कई वैरिएंट्स का पता चल चुका है, जिसमें लोगों को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। कुछ वैरिएंट्स को अत्याधिक संक्रामक पाया गया, वहीं कुछ के कारण लोगों में गंभीर रोग के मामले सामने आए। वैज्ञानिकों ने पिछले कुछ समय से वायरस की प्रकृति में एक बड़े बदलाव को नोटिस किया है। विशेषज्ञों ने पाया कि ओमिक्रॉन के सब-वैरिएंट्स, दो वायरस के संयोजन से उत्पन्न वैरिएंट्स और हाल में सामने आया कोरोना का सबसे संक्रामक माना जा रहा एक्सई वैरिएंट, परीक्षण को चकमा दे सकता है।
Covid-19: आरटी-पीसीआर टेस्ट से कैसे बच जा रहे हैं नए वैरिएंट्स, क्या अब हर बार जीनोम सिक्वेंसिंग की होगी जरूरत?
आरटी-पीसीआर टेस्ट से संक्रमण की पुष्टि
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि महामारी की शुरुआत से ही कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि के लिए रियल टाइम आरटी-पीसीआर टेस्ट को गोल्ड स्टैंडर्ड का माना जा रहा है। इस टेस्ट के लिए नाक-मुंह से स्वाब का सैंपल लिया जाता है, जिसके आधार पर संक्रमण की पुष्टि होती है। यह टेस्ट स्थिति की गंभीरता को समझने और वायरल लोड को जानने के लिए सटीक परिणाम वाला माना जाता रहा है। हालांकि कुछ वैरिएंट्स की प्रकृति ऐसी है जो इस टेस्ट से पकड़ में नहीं आती है, ऐसी स्थिति में जीनोम सिक्वेंसिंग टेस्ट कराने की जरूरत होती है।
जीनोम सिक्वेंसिंग टेस्ट क्या है?
जीनोम सिक्वेंसिंग टेस्ट के माध्मय से वायरस के संपूर्ण डीएनए की प्रकृति को जानना आसान होता है। वायरस के स्पाइक प्रोटीन में कैसा परिवर्तन है और इसके कारण किस तरह की दिक्कतें हो सकती हैं, इसको समझने में जीनोम सिक्वेंसिंग टेस्ट को मददगार माना जाता है। वायरस के मूल से इसके म्यूटेंट वर्जन में कितना परिवर्तन आया है इसको समझने में भी जीनोम सिक्वेंसिंग टेस्ट सहायक मानी जाती है। यही कारण है कि ओमिक्रॉन का पता लगाने के लिए यह परीक्षण किया जाता रहा है।
आरटी-पीसीआर टेस्ट से बच जा रहे हैं नए वैरिएंट्स
हाल में हुए कई अध्ययनों में शोधकर्ताओं ने बताया है कि नए म्यूटेंट वैरिएंट्स के स्पाइक प्रोटीन में कुछ ऐसे अंश नहीं हैं जो आरटी-पीसीआर टेस्ट में जांच के लिए आवश्यक होते हैं। इसके अलावा नए वैरिएंट्स की प्रकृति और इसके लक्षणों में कई तरह के बदलाव देखे जा रहे हैं। शुरुआत में जहां कोरोना को श्वसन संक्रमण के तौर पर जाना जाता था, वहीं अब इसके शरीर के अन्य अंगों पर भी असर देखे जा रहे हैं। कुछ लोगों को सिर्फ पेट से संबंधित समस्याएं हो रही हैं, ऐसे में नाक के स्वाब से संक्रमण का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
नए वैरिएंट्स दे रहे हैं आरटी-पीसीआर टेस्ट को चकमा
ब्रिटेन की स्वास्थ्य सेवा एजेंसी (यूकेएचएसए) ने ओमिक्रॉन बीए.2 को लेकर किए एक अध्ययन में बताया कि इसमें वह एक म्यूटेशन नहीं है, जो कोविड-19 का पता लगाने में मदद करता है। ओमिक्रॉन के 'एस' स्पाइक जीन में एक आनुवंशिक विलोपन देखा जा रहा था जिसकी मदद से आरटी-पीसीआर परीक्षण के साथ संक्रमण की पुष्टि कर पाना आसान होता था, हालांकि बीए.2 सब-वैरिएंट में वह एस जीन नहीं है, इस वजह से इसे ट्रैक करना मुश्किल हो सकता है।