हृदय रोगों का जोखिम वैश्विक स्तर पर काफी तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण हार्ट की दिक्कतें काफी तेजी से बढ़ी हैं, कोरोना के जोखिमों ने इसे और गंभीर बना दिया है। कुछ दशकों पहले तक हृदय रोग, हार्ट अटैक जैसी दिक्कतों को उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या के रूप में जाना जाता था, पर अब कम उम्र के लोग भी इसके शिकार हो रहे हैं।
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कम उम्र में हार्ट अटैक की समस्या
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जताते हुए कहा, कम उम्र के लोगों में बढ़ती हृदय रोगों की समस्या काफी गंभीर हो सकती है, जिसको लेकर विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। कुछ वर्षों पहले तक, दिल का दौरा मुख्य रूप से वृद्ध लोगों में होने वाली समस्या थी। 40 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति में हार्ट अटैक जैसी समस्याएं काफी दुर्लभ मानी जाती थीं। हालांकि अब हर 5 में से 1 हार्ट अटैक का मरीज़ 40 साल से कम उम्र का है।
20-30 की आयु वालों में भी दिल का दौरा पड़ना आम होता जा रहा है। वर्ष 2000-2016 के बीच इस युवा आयु वर्ग में हर साल दिल का दौरा पड़ने की दर 2% बढ़ गई है।
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में दिल्ली स्थित कार्डियोलॉजिस्ट डॉ सुयश निरंजन कहते हैं, कई कारण हैं जिसकी वजह से कम उम्र के लोगों में तेजी से हृदय रोगों के मामलों का निदान किया जा रहा है। कोरोना संक्रमण के कारण हृदय स्वास्थ्य पर तो गंभीर असर देखा ही गया है साथ ही लाइफस्टाइल में गड़बड़ी के कारण होने वाली कुछ समस्याओं ने भी हृदय रोगों के खतरे को बढ़ा दिया है।
पहले के शोध में भी पाया गया है कि मोटापा के शिकार लोगों में दिल का दौरा पड़ने का जोखिम बढ़ जाता है।
युवाओं में बढ़ रही है ब्लड प्रेशर की दिक्कत
डॉक्टर कहते हैं, हाई ब्लड प्रेशर हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ाने वाला प्रमुख कारण है। इसे कार्डियोवस्कुलर समस्याओं के लिए बड़ा खतरा माना जाता रहा है। अधिक वजन की समस्या भी हाई ब्लड प्रेशर का कारण बन सकती है, इसके कारण धमनियों पर दबाव बढ़ने का जोखिम रहता है जो न सिर्फ हार्ट अटैक का बड़ा जोखिम कारक है साथ ही इसकी वजह से स्ट्रोक भी हो सकता है। सभी लोगों को हृदय रोगों से बचाव के लिए प्रयास करते रहना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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