राजस्थान के कोटा स्थित एक सरकारी अस्पताल में एक महीने में 105 बच्चों के मौत के बाद राज्य सरकार ने एक जांच दल गठित किया था। जांच दल के रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि इन बच्चों की मौत हाइपोथर्मिया के कारण हुई है। बता दें कि हाइपोथर्मिया शरीर के लिए एक तरह से आपात स्थिति होती है। शरीर का तापमान जब 35 डिग्री सेल्सियस से कम हो जाता है तो हाइपोथर्मिया की स्थिति उत्पन्न होती है। स्वस्थ शरीर के लिए सामान्य तापमान हमेशा 37 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए जबकि नवजात शिशु के शरीर का तापमान 36.5 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। हाइपोथर्मिया की स्थिति इतनी खतरनाक होती है कि अगर समय पर इलाज नहीं हुआ तो तो यह जानलेवा हो सकती है। आइए जानते हैं हाइपोथर्मिया के बारे में विस्तार से...
हाइपोथर्मिया ने ले ली राजस्थान में कई बच्चों की जान, जानिए इस बीमारी के लक्षण और बचाव के बारे में
हाइपोथर्मिया के लक्षण
- सांस में धीमापन
- बेहोशी
- कमजोरी
- घबराहट होना
- थकान महसूस होना
- शिशुओं का चेहरा लाल और त्वाता ठंडी पड़ जाती है।
हाइपोथर्मिया के दौरान क्या होता है?
खासकर सर्दियों के मौसम में हाइपोथर्मिया के मामले देखने को मिलते हैं। इस स्थिति में शरीर का तापमान गिरने लगता है। बच्चों और बुजुर्गों के शरीर का तापमान जब बहुत कम हो जाता है तो हार्ट, नर्वस सिस्टम समेत कई अंग ढंग से काम नहीं करते हैं। हाइपोथर्मिया शरीर के लिए बहुत ही खतरनाक होती है।
हाइपोथर्मिया के कारण
हाइपोथर्मिया की स्थिति उस समय उत्पन्न होती है जब शरीर तेजी से गर्मी खो देता है। इस स्थिति का सबसे आम कारण ठंड का मौसम है। इसके अलावा ठंडे पानी में रहने के कारण भी यह स्थिति पैदा होती है।
बचाव के तरीके
- ठंड से बचने के लिए खूब कपड़े पहनें जिससे कि शरीर गर्म रहे।
- वॉर्म कूलर के सीधे एक्सपोजर से बचें।
- ठंड के मौसम में घर से बाहर निकलते वक्त आपके शरीर के हर अंग पूरी तरह से ढका हुए हो।
- अगर आप काफी थके हुए हैं तो आराम कर लें क्योंकि थकान के दौरान खुद को गर्म रखना थोड़ा मुश्किल होता है।
- हाइपोथर्मिया के लक्षण दिखने पर सबसे पहले डॉक्टर से संपर्क करें ताकि स्थिति ज्यादा खराब न हो।