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जानना जरूरी: घाव भरने में ज्यादा समय लगता है? सिर्फ डायबिटीज ही नहीं, इस तत्व की कमी भी हो सकती है इसका कारण

Fri, 02 Dec 2022 06:42 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 02 Dec 2022 06:42 PM IST
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Protein Deficiency causes slow wound healing, know how to fulfill protein intake
घावों के भरने में होने वाली देरी के कारण - फोटो : iStock

शरीर को बेहतर ढंग से काम करते रहने के लिए नियमित रूप से कई प्रकार के पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। आहार के माध्यम से इसकी आसानी से पूर्ति की जा सकती है। हालांकि कुछ स्थितियों में इसकी कमी हो सकती है, आपको समय रहते इसके सही कारणों के बारे में जान लेना बहुत आवश्यक होता है। उदाहरण के लिए घावों के भरने की स्थिति को समझते हैं।



घावों के देर से भरने के लिए आमतौर पर डायबिटीज को प्रमुख कारक माना जाता है। जिन लोगों का ब्लड शुगर बढ़ा हुआ रहता है उनमें अन्य लोगों की तुलना में घाव भरने में अधिक समय लग सकता है। पर हर बार इसके लिए डायबिटीज ही एक कारण हो,  ऐसा आवश्यक नहीं है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पाया कि घावों के देर से भरने या कट ठीक न हो पाने की स्थिति में डायबिटीज के अलावा कुछ प्रकार के पोषक तत्वों की कमी को भी कारण माना जा सकता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों में प्रोटीन की कमी होती है, उनमें घाव देर से भरते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक ज्यादातर वयस्कों को प्रतिदिन 55-60 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है, नियमित रूप से इसका सेवन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

आइए जानते हैं कि प्रोटीन की कमी के कारण शरीर में और किस प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं?

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प्रोटीन की कमी से होने वाली दिक्कतें

खरोंच-घावों को ठीक होने में लगता है समय

प्रोटीन की कमी के इस लक्षण के बारे में अक्सर लोगों में भ्रम की स्थिति देखी जाती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों में प्रोटीन की कमी होती है, उनके घावों को ठीक होने में ज्यादा वक्त लग सकता है। यह शरीर द्वारा पर्याप्त कोलेजन न बनाने के कारण होने वाली दिक्कत हो सकती है, जोकि संयोजी ऊतकों के साथ-साथ आपकी त्वचा में भी पाया जाता है। रक्त का थक्का बनाने के लिए आपको प्रोटीन की आवश्यकता होती है। इस तरह के लक्षणों पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता होती है।

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त्वचा पर प्रोटीन की कमी के लक्षण - फोटो : istock

त्वचा पर दिखते हैं इसके प्रभाव

प्रोटीन की कमी में मांसपेशियों के विकास के अलावा बालों और त्वचा पर भी इसके दुष्प्रभाव दिखाई देते हैं। शोधकर्ता बताते हैं, हमारे बाल, त्वचा और नाखूनों के लिए इलास्टिन, कोलेजन और केराटिन जैसे प्रोटीन की जरूरत होती है, ऐसे में प्रोटीन की कमी होने के कारण बाल भंगुर या पतले हो सकते हैं। प्रोटीन की कमी वाले लोगों में त्वचा के सूखेपन की भी समस्या देखी जा सकती है। प्रोटीन की कमी की स्थिति में आपके नाखूनों पर गहरी लकीरें भी दिखाई देने लगती हैं।

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मूड में अचानक होने वाले बदलाव की समस्या - फोटो : istock

बार-बार होता रहता है मूड स्विंग

मूड स्विंग होने के लिए भी अध्ययनों में प्रोटीन की कमी को एक कारण के तौर पर पाया गया है। शोधकर्ता बताते हैं, कोशिकाओं के बीच सूचनाओं को प्रसारित करने के लिए मस्तिष्क न्यूरोट्रांसमीटर नामक रसायनों का उपयोग करता है। इनमें से कई न्यूरोट्रांसमीटर अमीनो एसिड से बने होते हैं, जो प्रोटीन के तत्व होते हैं। शरीर में प्रोटीन की कमी होने के कारण आपके मस्तिष्क के काम करने के तरीका बदल जाता है। यह बार-बार मूड स्विंग होने का कारण बन सकती है।

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हाथों-पैरों में सूजन की दिक्कत - फोटो : iStock

हाथों-पैरों में बनी रहती है सूजन की दिक्कत

प्रोटीन की कमी के कारण हाथों-पैरों में सूजन बने रहना सबसे आम लक्षण है। शरीर को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन न मिल पाने के कारण पेट, पैरों और हाथों में सूजन की समस्या हो सकती है। यदि आपको भी बिना कारणों के हाथों-पैरों में सूजन की दिक्कत बनी रहती है तो इस बारे में डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें। ज्यादातर मामलों में आहार में प्रोटीन की मात्रा को बढ़ाकर इस तरह की समस्याओं से आराम पाया जा सकता है। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 

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