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Health Alert: वर्क लाइफ बैलेंस गड़बड़ तो नहीं? इससे भी बढ़ सकता है हृदय रोगों का खतरा, रहें सावधान

Thu, 15 May 2025 06:07 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 15 May 2025 06:07 PM IST
सार

वर्क-लाइफ बैलेंस का अर्थ है कि व्यक्ति अपने पेशेवर जिम्मेदारियों और निजी जीवन (परिवार, स्वास्थ्य, आराम, मनोरंजन) के बीच संतुलन कैसे बनाए रखता है।  वर्क लाइफ बैलेंस ठीक न होने के कारण मानसिक थकावट और तनाव होने का जोखिम रहता है। पर कई अध्ययन इस बात पर जोर देते रहे हैं कि वर्क लाइफ का बैलेंस ठीक न होने का  हृदय स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

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Poor Work Life Balance Can Increase Risk of Heart Disease Know symptoms and healthy precautionary steps
वर्क लाइफ बैलेंस इंबैलेंस - फोटो : Adobe stock photos

लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण कई प्रकार की बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। आलम ये है कि 20 से कम उम्र के लोग भी डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों का शिकार हो रहे हैं। कई अध्ययन इस बात पर भी जोर देते रहे हैं कि ऑफिस में आठ-दस घंटे रोजाना बिताने वाले लोगों में बीमारियों के बढ़ने का खतरा हो सकता है। 



वर्क लाइफ इंबैलेंस की हाल के दिनों में काफी चर्चा रही है, क्या आप जानते हैं कि इसमें होने वाली गड़बड़ी के कारण भी आप कई तरह की बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। एक स्वस्थ वर्क-लाइफ बैलेंस बनाना आपके मेंटल और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों के लिए जरूरी है। 

अध्ययनों से पता चलता है कि अगर आपका वर्क लाइफ बैलेंस ठीक नहीं है तो इसका असर हृदय की सेहत को भी प्रभावित करने वाला हो सकता है।

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हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Freepik.com

हार्मोन्स की समस्या और ब्लड प्रेशर का जोखिम

चूंकि ऑफिस के काम के कारण खुद के और परिवार के लिए समय न निकाल पाने से तनाव बढ़ता है, वहीं अगर ये तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो इससे शरीर में कॉर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन बढ़ने लगते हैं।

इन हार्मोन्स के कारण रक्तचाप और शरीर में इंफ्लेमेशन का जोखिम भी बढ़ जाता है जिसका हृदय स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।

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कर्मचारियों में बढ़ती हृदय रोगों की समस्याएं - फोटो : Freepik.com

वर्क-लाइफ बैलेंस में गड़बड़ी का असर

वर्क-लाइफ बैलेंस खराब होने पर लोग अक्सर पर्याप्त नींद नहीं ले पाते। अध्ययनों से पता चला है कि कम नींद या असंतुलित नींद पैटर्न भी हृदय गति और रक्तचाप को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं। यही कारण है कि जिन लोगों का वर्क-लाइफ बैलेंस ठीक नहीं होता है ऐसे लोगों में ब्लड प्रेशर और हृदय से संबंधित समस्याओं का जोखिम काफी बढ़ जाता है।

अध्ययन में क्या पता चला?

60,000 से अधिक लोगों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि हफ्ते में 55 घंटे या उससे अधिक काम करने वाले लोगों में हार्ट अटैक का खतरा 33% अधिक हो सकता है। वहीं यूरोपियन हार्ट जर्नल में 2020 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में पाया गया है कि नौकरी का अत्यधिक तनाव सीधे तौर पर हृदय रोगों और स्ट्रोक के जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती है।

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सेहत का रखें ख्याल - फोटो : Freepik.com

इन समस्याओं को कैसे कम किया जा सकता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अपने सेहत को लेकर सभी लोगों को निरंतर सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।  वर्क-लाइफ बैलेंस को ठीक रखने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं। 

  • सबसे जरूरी है समय का प्रबंधन, इसमें काम और आराम के समय की समय की योजना बनाएं। 
  • काम के बीच नियमित छोटे-छोटे ब्रेक लेते रहें। 
  • प्रतिदिन 30 मिनट की हल्की-तेज वॉक करें। इससे ब्लड प्रेशर के खतरे को कम किया जा सकता है 
  • डिजिटल डिटॉक्स बहुत जरूरी है। ऑफिस के बाद या छुट्टी के दिनों में फोन-लैपटॉप आदि से दूरी बनाकर रखने का प्रयास करें। 



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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