गुलाबी आंखें जो तेरी देखी.... ये गाना तो आपने जरूर सुना होगा? पर क्या आंखों का गुलाबी होना सही है? जवाब है- नहीं। गुलाबी आंखों का अंग्रेजी अनुवाद होता है, पिंक आइज और पिंक आइज असल में एक मेडिकल कंडिशन है। इसे कंजंक्टिवाइटिस के नाम से भी जाना जाता है। कंजंक्टिवाइटिस को पिंक आइज इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस समस्या में आंख का सफेद रंग वाला हिस्सा गुलाबी या लाल हो जाता है। आमतौर पर गर्मी के दिनों में यह दिक्कत अधिक होती है जिसमें आंखों में दर्द के साथ चिपचिपाहट और खुजली होती रह सकती है।
Pink Eyes:'गुलाबी आंखें जो तेरी देखी...' वैसे आंखों का गुलाबी होना एक बीमारी है, जानिए इसके कारण-बचाव के तरीके
पिंक आइज के बारे में जानिए
पिंक आइज की ये दिक्कत अक्सर गर्मी के दिनों में वायरल संक्रमण के कारण होती है। यह दिक्कत आपको असहज करने वाली जरूर होती है पर इसके कारण दृष्टि से संबंधित विकारों के विकसित होने का खतरा नहीं होता है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि कंजंक्टिवाइटिस की यह समस्या संक्रामक भी हो सकती है, यानी कि संक्रमित व्यक्ति से इसके दूसरे लोगों में होने का जोखिम भी हो सकता है। समय रहते इसके लक्षणों पर ध्यान देना और उपचार प्राप्त करना आवश्यक माना जाता है।
इसके लक्षणों के बारे में जानिए
पिंक आइज की इस समस्या में आंखों में लालिमा, जलन-चुभन और दर्द हो सकती है। एक या दोनों आंखों में लाली, खुजली या किरकिरापन होता रहता है। कई बार सुबह के समय आंखें चिपक जाती हैं, जिसे खोलने में भी दिक्कत हो सकती है। पिंक आइज की इस समस्या में कई लोगों को प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता का भी अनुभव होता रह सकता है, तेज धूप-रोशनी में आपकी दिक्कतें और बढ़ने लगती हैं।
आंखों की कुछ गंभीर स्थितियां भी इसी तरह के लक्षणों वाली हो सकती हैं, इसलिए यदि आप इन लक्षणों का अनुभव करते हैं, तो तत्काल किसी डॉक्टर की सलाह लें।
क्यों होती है ऐसी दिक्कत?
पिंक आइज की समस्या के कई कारण हो सकते हैं, इसमें वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण का होना सबसे सामान्य है। पिंक आई के अधिकांश मामले एडेनोवायरस के कारण होते हैं। जो लोग कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं, अगर वह ठीक से साफ नहीं किया गया है तो इसके कारण भी आंखों में बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा हो सकता है। इसके अलावा कुछ और जोखिम कारक भी आपके लिए समस्या बढ़ाने वाले हो सकते हैं।
- कंजंक्टिवाइटिस के शिकार किसी व्यक्ति के संपर्क में आना।
- एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस तब होती है जब आप किसी ऐसी चीज के संपर्क में आते हैं जिससे आपको एलर्जी है।
- अधिक धूप में रहने से भी इसका खतरा हो सकता है।
पिंक आइज का इलाज और बचाव
पिंक आइज आमतौर पर सामान्य इलाज से ठीक हो जाती है। ज्यादातर मामलों में एंटीबायोटिक आई ड्रॉप्स लेने की सलाह दी जाती है। चूंकि यह वायरल संक्रमण के कारण भी होता है, इसलिए हर बार एंटीबायोटिक्स की जरूरत नहीं होती है। यही कारण है कि बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा आंखों में नहीं डालनी चाहिए।
इस तरह की दिक्कतों से बचे रहने के लिए आंखों की साफ-सफाई का ध्यान रखें, आंखों को ठंडे पानी से धोते रहें। आंखों को छूने से पहले हाथों को साफ करें और गर्मी के दिनों में ज्यादा देर धूप में जाने से बचें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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