क्या अक्सर बैठे-बैठे आपका भी हाथ या पैर तेजी से कांपने लगता है? शरीर को बेहतर तरीके से कंट्रोल करने में दिक्कत होती है? कहीं यह पार्किसंस डिजीज के कारण तो नहीं? पार्किंसंस डिजीज को प्रगतिशील विकार के रूप में जाना जाता है जो तंत्रिका तंत्र और तंत्रिकाओं द्वारा नियंत्रित शरीर के हिस्सों को प्रभावित करती है। जहां पहले तंत्रिकाओं के माध्यम से जब आप चाहें तब हाथों-पैरों को हिला-डुला सकते थे, वहीं पार्किंसंस रोग की स्थिति में यह क्रियाएं अनियंत्रित रूप से होती रह सकती हैं।
Parkinson’s Disease: इस बीमारी में शरीर पर नहीं रह जाता है कंट्रोल, अपने आप ही हिलने लगते हैं हाथ-पैर
पार्किंसंस रोग के बारे में जानिए
एक अनुमान के मुताबिक हर साल पार्किंसंस रोग के 60,000 नए मामलों का निदान किया जाता है। यह स्थिति आमतौर पर 55 वर्ष की आयु के बाद विकसित होती है हालांकि 30-40 वर्ष के लोगों को भी ये प्रभावित कर सकती है। पार्किंसंस रोग कुल मिलाकर बहुत आम है। यह सबसे आम मोटर (गति-संबंधी) मस्तिष्क रोग भी है।
जैसे-जैसे पार्किंसंस रोग बढ़ता है, इसके लक्षण भी बढ़ने लग जाते हैं। बीमारी के बाद के चरणों में अक्सर आपके मस्तिष्क की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है जिससे डिमेंशिया जैसे लक्षण और अवसाद का भी खतरा होता है।
पार्किंसंस रोग के लक्षण
पार्किंसंस रोग शरीर में कई प्रकार की समस्याओं का कारण बन सकती है।
- कंपकंपी या हाथ-पैर और जबड़े का अनैच्छिक रूप से हिलना।
- मांसपेशियों में अकड़न, कंधों या गर्दन में दर्द सबसे आम है।
- मानसिक कौशल या प्रतिक्रिया के समय में कमी।
- पलकों के झपकने की गति में कमी।
- अस्थिर चाल या संतुलन में दिक्कत होना।
- अवसाद या डिमेंशिया का जोखिम।
क्यों होता है पार्किंसंस रोग?
शोधकर्ताओं ने पाया कि पार्किंसंस रोग से पीड़ित लोगों के दिमाग में कई बदलाव होते हैं, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ये बदलाव क्यों होते हैं।
यदि आपके परिवार में पहले किसी को यह समस्या रही है तो आपमें भी इसका जोखिम हो सकता है। इसके अलावा महिलाओं की तुलना में पुरुषों में पार्किंसंस रोग विकसित होने की आशंका अधिक होती है। कुछ शोध में पाया गया है कि जो लोग विषाक्त पदार्थों के संपर्क में अधिक रहते हैं उनमें भी इसके होने का जोखिम हो सकता है।
पार्किंसंस रोग का इलाज और बचाव
पार्किंसंस रोग के रोगियों की स्थिति के आधार पर दवाइयों और थेरपी के माध्यम से इसके लक्षणों को नियंत्रित करने और जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।
पार्किंसंस रोग आनुवंशिक कारणों से या अप्रत्याशित रूप से होता है। ऐसे में आप इसके विकसित होने के जोखिम को भी कम नहीं कर सकते। हालांकि कुछ शोधों से पता चला है कि नियमित एरोबिक व्यायाम से पार्किंसंस रोग का खतरा कम हो सकता है।
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