दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। भारत में भी ओमिक्रॉन के पांच मामले सामने आ चुके हैं, हाल ही में राजधानी दिल्ली में तंजानिया से लौटे एक व्यक्ति में कोरोना के इस नए वैरिएंट से संक्रमण की पहचान की गई है। देश में बढ़ते ओमिक्रॉन के केस को लेकर स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। अध्ययनों के मुताबिक कोरोना के इस वैरिएंट में 30 से अधिक म्यूटेशन देखे गए हैं जो इसे अन्य वैरिएंट्स की तुलना में अधिक संक्रामक और वैक्सीन से शरीर में बनीं प्रतिरक्षा को चकमा देने के योग्य बनाते हैं।
राहत भरी खबर: ओमिक्रॉन वैरिएंट को लेकर विशेषज्ञ का बड़ा दावा, इन बातों को ध्यान में रखने की दी सलाह
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ओमिक्रॉन से बचाव के लिए बूस्टर डोज की आवश्यकता
ओमिक्रॉन को लेकर अब तक हुए कई अध्ययनों में दावा किया जा रहा है कि यह वैक्सीन से बनी प्रतिरक्षा को बेअसर करने में सक्षम है। वैज्ञानिकों का कहना है कि लोगों को, विशेषकर जिनकी इम्यूनिटी पहले से ही बहुत कमजोर है, उन्हें वैक्सीन के बूस्टर डोज की आवश्यकता हो सकती है। हालांकि एक अन्य रिपोर्ट में लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन में वायरोलॉजी के प्रोफेसर पोली रॉय ने कहा है कि लोगों को इससे ज्यादा घबराने की आवश्यकता नहीं है, ओमिक्रॉन गंभीर संक्रमण का कारण बनता हुआ नहीं दिख रहा है।
ज्यादा खतरनाक नहीं है ओमिक्रॉन
प्रोफेसर पोली रॉय कहते हैं, इसमें कोई दो राय नहीं है कि कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट में सबसे ज्यादा म्यूटेशनों के बारे में पता चला है, लेकिन इसकी प्रकृति को लेकर किए गए अब तक के अध्ययनों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि कोरोना के अन्य वैरिएंट्स की तुलना में यह अधिक खतरनाक नहीं होगा। जहां तक संक्रमण का सवाल है, मौजूदा कोविड-19 टीकों को ओमिक्रॉन के खिलाफ 100 फीसदी प्रभावी तो नहीं माना जा सकता हैं, लेकिन फिर भी संक्रमण को रोकने में वह मदद जरूर होंगे।
क्या कहता है विश्व स्वास्थ्य संगठन
विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जारी हालिया बयान में कहा गया है कि प्रारंभिक आंकड़ों से पता चलता है कि दक्षिण अफ्रीका के अस्पतालों में संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है। हालांकि अधिकतर रोगियों में मध्यम स्तर का संक्रमण देखने को मिल रहा है। इससे दो बातें पता चलती हैं, पहला ओमिक्रॉन वैरिएंट की संक्रामक अधिक है, और दूसरा यह फिलहाल गंभीर संक्रमण का कारण नहीं बन रहा है।
ओमिक्रॉन से बचाव के लिए वैक्सीनेशन बहुत आवश्यक
प्रोफेसर पोली रॉय कहते हैं, भले ही ओमिक्रॉन में कुछ बदलाव देखे गए हैं, लेकिन यह पूरी प्रतिरक्षा प्रणाली को चकमा नहीं दे सकता है। फिलहाल वैक्सीन ही एकमात्र तरीका है जिससे हम वास्तव में वायरस के प्रसार को रोक सकते हैं। मास्क और सोशल डिस्टेंसिग जरूरी है, लेकिन गंभीर खतरे से बचे रहने के लिए वैक्सीन की दोनों डोज अब भी सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच हैं। सभी लोगों को वैक्सीनेशन जरूर करा लेना चाहिए।
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नोट: यह लेख सोशल मीडिया से प्राप्त जानकारियों आधार पर तैयार किया गया है।
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