चीन के वुहान से दुनियाभर में फैले कोरोना वायरस ने कई देशों में तबाही मचा रखी है। देश और दुनिया के लोग जल्द इस महामारी संकट से निजात पाना चाहते हैं। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच इसकी वैक्सीन बनाने को लेकर दुनियाभर के वैज्ञानिक लगे हुए हैं। पिछले कई शोध अध्ययन में कोरोना वायरस को 'बहरूपिया' कहा जा चुका है, क्योंकि अबतक इसने तेजी से अपना रूप बदला है। वैज्ञानिकों के मुताबिक अबतक कोरोना के 24 रूप यानी स्ट्रेन सामने आ चुके हैं। इसके म्यूटेशन यानी रूप बदलने के कारण भी यह वैक्सीन बनाने की राह में यह बड़ी चुनौती बन रहा था। लेकिन अब इसके म्यूटेशन की दर धीमी हो गई है। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि अब पहले की अपेक्षा आसानी से और बेहतर वैक्सीन तैयार की जा सकती है।
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शोध में खुलासा- कमजोर हुआ कोरोना वायरस, आसानी से तैयार हो सकती है असरदार वैक्सीन
Sat, 11 Jul 2020 02:01 AM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Sat, 11 Jul 2020 02:01 AM IST
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Coronavirus Vaccine
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Coronavirus Update
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म्यूटेशन दर हुई धीमी
- अमेरिका के शीर्ष विश्वविद्यालयों में शामिल जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक कोरोना वायरस के रूप बदलने की दर (म्यूटेशन रेट) धीमी हो गई है। रूप बदलता कोरोना वायरस, वैज्ञानिकों के लिए उससे निपटने में चुनौती की तरह था, लेकिन अब म्यूटेशन दर धीमी होने से यह एक तरह से कमजोर हुआ है। इसलिए अब बेहतर वैक्सीन तैयार की जा सकती है।
Coronavirus
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20 हजार से अधिक नमूनों का अध्ययन
- जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने दुनियाभर से 20 हजार से अधिक कोरोना सैंपलों का अध्ययन किया है। इस अध्ययन में पाया कि कोरोना वायरस के सबसे बड़े हथियार समझे जाने वाले स्पाइक प्रोटीन में अब बदलाव नहीं हो रहा है। मालूम हो कि अबतक कोरोना के 24 स्ट्रेन सामने आ चुके हैं।
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Coronavirus
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वैक्सीन बनाने के लिए मुफीद समय
- दुनिया के कई विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस समय वैक्सीन तैयार कर ली जाए तो इसकी एक डोज कई सालों तक इंसानों को संक्रमण से बचाएगी। जॉन हॉपकिंस अप्लायड फिजिक्स लैब के मॉलिक्युलर बायोलॉजिस्ट डॉ. पीटर थीलेन का कहना है कि पिछले साल के अंत से लेकर अब कोरोना वायरस में जेनेटिक बदलाव हुए हैं।
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Coronavirus
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आरएनए को समझना आसान
- डॉ. पीटर थीलेन का कहना है कि कोरोना वायरस अब लगभग स्टेबल यानी स्थिर है और यह समय वैक्सीन तैयार करने के लिए यह बेहतरीन समय है। इस समय कोरोना वायरस के आरएनए को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।