क्यूलेक्स मच्छर जिसके कारण फाइलेरिया का संक्रमण फैलता है आम तौर पर शाम और सुबह के वक्त काटता है। इस बीमारी को अंग्रेजी में फाइलेरिया और हिंदी में हाथी पांव कहते हैं। फाइलेरिया बीमारी का संक्रमण आमतौर से बचपन में होता है। मगर इस बीमारी के लक्षण 7 से 8 वर्ष के उपरान्त ही दिखाई देते हैं।फाइलेरिया बिमारी फाइलेरिया संक्रमण मच्छरों के काटने से फैलती है। ये मच्छर फ्युलेक्स एवं मैनसोनाइडिस प्रजाति के होते हैं। जिसमें मच्छर एक धागे समान परजीवी को छोड़ता है। यह परजीवी हमारे शरीर में प्रवेश कर जाता है।
मलेरिया-डेंगू के अलावा इस भयानक रोग की वजह भी बनते है मच्छर, सालों बाद चलता है इसका पता
-अपने पैर को साधारण साबुन या साफ पानी से रोज धोएं।
-इसके बाद एक मुलायम और साफ कपड़े से अपने पैर को पोंछिये।
-पैर की सफाई करते समय ब्रश का प्रयोग न करें, इससे पैरों पर घाव हो सकते हैं।
-फटे घाव को खुजलाने की भूल न करें बल्कि प्रतिदिन घाव पर दवा का लेप लगाएं।
फाइलेरिया से बचाव-
- ठंडे कमरे में सोएं।
-मच्छरदानी का प्रयोग करें।
-ऐसे कपड़े पहनें जिनसे पांव और बांह पूरी तरह से ढक जाएं।
-मच्छरों को मारने के लिए कीट स्प्रे का छिड़काव करें।
-इलाज बीमारी की प्रारंभिक अवस्था में ही शुरू हो जाना चाहिए।
-यदि आप तीव्र दर्द और बुखार से पीड़ित है तो तुरंत घर के पास बने स्वास्थ्य केंद्र से सम्पर्क करें।
-जितना हो सके अपने पैर को आरामदायक स्थिति में उठाकर रखें।
-जितना हो सके व्यायाम करें, कहीं भी, कभी भी पैदल चलने और व्यायाम करने का मौका न छोड़ें।
फाइलेरिया के प्रकार-
-लिम्फेटिक फाइलेरिया
-सबक्यूटेनियस फाइलेरिया
-सीरियस केविटी फाइलेरिया
फाइलेरिया में ये खाएं-
-कम वसा और प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करें।
- तरल पदार्थों का सेवन करें।
-अजवायन की पत्तियां फाइलेरिया से पीड़ित लोगों के लिए लाभदायक होती है।
-विटामिन सी युक्त आहार का सेवन करें।