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Study: नियमित व्यायाम से स्वस्थ रहता है मस्तिष्क, पर इस एक गलती से सारे फायदे हो सकते हैं बेकार

Sat, 08 Jul 2023 03:55 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 08 Jul 2023 03:55 PM IST
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Not getting sufficient sleep could offset the cognitive benefits gained from regular physical activity
मस्तिष्क की सेहत का रखें ध्यान - फोटो : Pixabay

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यदि शरीर को स्वस्थ और फिट रखना चाहते हैं तो इसके लिए सबसे आवश्यक है कि आप नियमित रूप से व्यायाम करें। व्यायाम भले ही हल्के स्तर का हो या तीव्र इससे संपूर्ण स्वास्थ्य को लाभ मिल सकता है। जो लोग योग-व्यायाम की दिनचर्या बनाते हैं, उनकी संज्ञानात्मक क्षमता यानी मस्तिष्क के कार्य करने, सोचने-समझने और निर्णय लेने की शक्ति उम्र बढ़ने के साथ भी बनी रहती है। पर एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने आश्चर्यजनक जानकारी साझा की है। 



शोधकर्ताओं ने कहा, अब तक ये माना जाता रहा है कि नियमित शारीरिक गतिविधि उम्र बढ़ने के साथ संज्ञानात्मक क्षमता में कमी से आपको सुरक्षित रखने में मदद करती है। भले ही आप रोजाना व्यायाम और योग का अभ्यास करते हैं, पर अगर पर्याप्त नींद नहीं ले पा रहे हैं या फिर अनिद्रा के शिकार हैं तो आपके सारे लाभ बेकार हो सकते हैं। मतलब यदि आपको नींद से संबंधित समस्या है, भले ही आप व्यायाम करते हैं तो यह मानसिक स्वास्थ्य और संज्ञानात्मक क्षमता को प्रभावित कर सकती है।

Not getting sufficient sleep could offset the cognitive benefits gained from regular physical activity
नींद विकारों की समस्या - फोटो : istock

नींद की समस्या है तो कम हो सकते हैं व्यायाम के भी लाभ

द लैंसेट हेल्दी लॉन्गविटी जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं की टीम ने इस बारे में बताया है। इसके लिए इंग्लैंड में 50 वर्ष और उससे अधिक आयु के 8,958 लोगों में 10 वर्षों तक संज्ञानात्मक कार्यक्षमता का अध्ययन किया गया। शोध टीम ने इस दौरान प्रतिभागियों की शारीरिक गतिविधि और नींद की गुणवत्ता पर भी ध्यान रखा। 

वैज्ञानिकों ने पाया कि जो लोग शारीरिक रूप से अधिक सक्रिय थे, लेकिन कम नींद लेते थे (औसतन छह घंटे से कम) उनमें तेजी से संज्ञानात्मक गिरावट आई। इसके आधार पर वैज्ञानिकों का कहना है कि नियमित व्यायाम के साथ अच्छी नींद भी सेहत के लिए बहुत जरूरी है।

Not getting sufficient sleep could offset the cognitive benefits gained from regular physical activity
नींद की कमी मस्तिष्क के लिए हानिकारक - फोटो : istock

पहले के अध्ययनों में भी अच्छी नींद पर रहा है जोर

पिछले अध्ययनों में भी नींद और संज्ञानात्मक कार्यों के बीच संबंध पाया गया था। जर्नल स्लीप में प्रकाशित साल 2019 के एक अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों को रात में अच्छी नींद मिलती है, उनकी संज्ञानात्मक क्षमता बेहतर बनी रहती है।  

अध्ययन की शुरुआत में जो लोग शारीरिक रूप अधिक से सक्रिय थे, उनका संज्ञानात्मक कार्य भी बेहतर था, भले ही वे कितनी देर सोते रहे हों। हालांकि 10 साल की अवधि में इसमें बड़ा बदलाव देखा गया। जैसे-जैसे आपकी नींद की गुणवत्ता और अवधि कम होती जाती है, साथ ही साथ आपका व्यायाम से प्राप्त लाभ भी कम होने लगता है।

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Not getting sufficient sleep could offset the cognitive benefits gained from regular physical activity
व्यायाम और नींद दोनों मस्तिष्क के लिए जरूरी - फोटो : Istock

क्या कहते हैं शोधकर्ता?

यूसीएल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड हेल्थ केयर में प्रोफेसर और अध्ययन की मुख्य लेखिका डॉ. मिकाएला कहती है, हमारे शोध से पता चलता है कि शारीरिक गतिविधि से बेहतर संज्ञानात्मक लाभ प्राप्त करने के लिए जरूरी है कि आप पर्याप्त नींद भी लें। यह दर्शाता है कि नींद और शारीरिक गतिविधियों पर विचार करना कितना महत्वपूर्ण है। अध्ययन के निष्कर्षों से पता चला है कि छह से आठ घंटे की निर्बाध नींद के साथ नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि, आपके बेहतर संज्ञानात्मक कार्य में योगदान कर सकती है। 

स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखने के लिए हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि 50-60 की उम्र में पर्याप्त नींद लें, वैसे यह सभी उम्र के लिए लागू होती है। जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती जाती है, हमारे मस्तिष्क की क्षमता कमजोर हो सकती है। अगर व्यायाम और नींद की सामंजस्य बेहतर रखा जाए तो उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्याओं को कम किया जा सकता है।




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स्रोत और संदर्भ
Joint associations of physical activity and sleep duration with cognitive ageing: longitudinal analysis of an English cohort study

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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