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World Polio Day: जिस रोग पर भारत ने पा ली विजय पाकिस्तान अब भी उसकी चपेट में, बच्चे हो सकते हैं लकवाग्रस्त

Thu, 24 Oct 2024 02:39 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 24 Oct 2024 02:39 PM IST
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New Case of Polio Reported In Pakistan Why Is Polio On The Rise In Pakistan
पोलियो का खतरा - फोटो : Freepik.com

दुनिया के कई देशों में बच्चों में रिपोर्ट किया जाने वाला पोलियो का संक्रमण स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का कारण रहा है। पड़ोसी देश पाकिस्तान में इसके कुछ नए मामले सामने आए हैं है। अधिकारियों ने रविवार जानकारी दी है कि सिंध प्रांत में हाल ही में पोलियो के चार नए मामलों की पुष्टि हुई है, इसके साथ पाकिस्तान में इस साल पोलियो के कुल मामले बढ़कर 39 हो गए हैं। स्थानीय अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, पोलियो के नए मामलों को देखते हुए आसपास के शहरों को अलर्ट किया गया है। 



पोलियो उन्मूलन के वैश्विक प्रयासों के बावजूद, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में पोलियो वायरस संक्रमण के मामले रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। अधिकारी बताते हैं कि पाकिस्तान के ग्रामीण क्षेत्रों में पोलियो के केस ज्यादा रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। पिछले दस महीनों में पाकिस्तान में पोलियो वायरस के 20 मामले बलूचिस्तान से, 12 सिंध से, पांच खैबर पख्तूनख्वा से और एक-एक पंजाब और इस्लामाबाद से सामने आए हैं।

पाकिस्तान में पोलियो के नए मामले सामने आने के बाद सभी लोगों को संक्रमण से बचाव को लेकर सावधानी बरतते रहने की सलाह दी गई है। गौरतलब है कि इस वायरस के तेजी से फैलने का खतरा रहता है। संक्रमितों में विकलांगता और कई प्रकार की शारीरिक जटिलताओं का जोखिम हो सकता है।

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पोलियो वायरस के मामले (सांकेतिक) - फोटो : Adobe Stock

पोलियो का खतरा

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, पाकिस्तान और अफगानिस्तान दुनिया के दो देश हैं जहां पोलियो स्थानिक बीमारी बनी हुई है। इससे पहले जुलाई-अगस्त 2022 में भी पाकिस्तान में पोलियों के मामले सामने आ चुके हैं। पोलियो के मामलों ने वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। दुनिया के अधिकतर देश जब इस वायरस से मुक्ति की तरफ आगे बढ़ रहे हैं, इसी बीच इस आउटब्रेक ने पोलियो उन्मूलन अभियानों को अस्त-व्यस्त कर दिया है।

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पोलियो वैक्सीन - फोटो : Freepik.com

पाकिस्तान में क्यों रिपोर्ट किए जाते रहे हैं पोलियो के मामले

पिछले कुछ वर्षों के डेटा देखें तो पता चलता है कि पाकिस्तान में पोलियो वायरस के मामले हर साल सामने आते रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि, बच्चों को पोलियो की खुराक न पिलवाने या पोलियो रोकथाम अभियानों के दौरान कई कारणों से बच्चों को खुराक के लिए सामने न लाने के कारण यह प्रकोप देखा जा रहा है। अशिक्षा और जागरूकता की कमी के कारण माता-पिता बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने से बचते हैं। 

एक ब्रिटिश अखबार की रिपोर्ट में पाकिस्तान के पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़े अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान में पोलियो की खुराक पिलाने को लेकर अब भी अशिक्षा भारी पड़ रही है। यहां बच्चों की उंगली पर नकली निशान लगाकर बता दिया जाता है कि उनको खुराक मिल गई है। इस तरह से टीकाकरण में हुए चूक पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम द्वारा देश को पोलियो मुक्त बनाने की दिशा में बड़ी बाधा बन रही है।

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पोलियो से बचाव के लिए टीकाकऱण - फोटो : Adobe Stock

भारत हो चुका है पोलियो मुक्त

भारत ने अपने अथक प्रयासों और व्यापक वैक्सीनेशन कार्यक्रम के जरिए पोलियो से मुक्ति पा ली है। 13 जनवरी 2011 को पश्चिम बंगाल में संक्रमण का आखिरी केस रिपोर्ट किया गया था। इस रोग के प्रति प्रतिरक्षा को बढ़ाने के लिए भारत सरकार 5 साल से कम उम्र के बच्चों को पोलियो की ओरल वैक्सीन मुफ्त देती है।

1970-90 के दशक में भारत में पोलिया का भयंकर प्रकोप रहा। 90 के दशक में भारत में पोलियो के मामले दुनिया के कुल केसों के 60% से अधिक था। हालांकि देश में 2 अक्तूबर 1994 को पल्स पोलियो टीकाकरण कार्यक्रम शुरू होने के बाद इसमें काफी तेजी से सुधार आया।

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पोलियो के कारण हो सकती है विकलांगता - फोटो : Adobe Stock

पोलियो संक्रमण के बारे में जानिए

पोलियो रोग, पोलियोमाइलाइटिस नामक वायरस के कारण होता है। यह वायरस संक्रमितों के गले और आंतों में पाया जाता है। संक्रमित व्यक्ति के मल के संपर्क में आने के कारण इसके संक्रमण का खतरा सबसे अधिक होता है, छींक या खांसी से निकलने वाली बूंदों से भी यह दूसरे व्यक्ति में संक्रमण का कारण बन सकता है।  इसके लगभग 70 फीसदी मामले एसिम्टोमैटिक या हल्के लक्षणों वाले होते हैं। 

पोलियो वायरस के संक्रमण की गंभीर स्थितियों में इसका असर रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क पर भी हो सकता है, जिसके कारण संक्रमितों में लकवा होने का जोखिम रहता है।



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स्रोत और संदर्भ
Poliomyelitis (polio)


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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