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China Pneumonia Outbreak: इस बढ़ती बीमारी को लेकर WHO का अलर्ट, कितना तैयार है भारत?

Mon, 27 Nov 2023 07:06 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 27 Nov 2023 07:06 PM IST
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mysterious pneumonia and respiratory illness outbreak in China know its risk in india
चीन में श्वसन रोगों का खतरा - फोटो : iStock

 China Pneumonia News: चीन इन दिनों तेजी से बढ़ती श्वसन संबंधी बीमारी की चपेट में है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां 'मिस्टीरियस निमोनिया' का जोखिम तेजी से बढ़ता जा रहा है, विशेषतौर पर छोटे बच्चे इसके अधिक शिकार हो रहे हैं। असल में कोरोना महामारी के बाद तीन साल में ऐसा पहली बार है जब चीन बिना प्रतिबंधों के सर्दी के मौसम में प्रवेश कर रहा है। इसकी शुरुआत में ही पूरे देश में श्वसन संबंधी बीमारियों की लहर देखी जा रही है। 





छोटे बच्चों में सांस से संबंधित बीमारियों और निमोनिया के मामले रिपोर्ट हो रहे हैं। इसको लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अलर्ट जारी करते हुए सभी देशों को सावधानी बरतते रहने की सलाह दी है।

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया - फोटो : एएनआई

भारत की तैयारियों पर क्या बोले स्वास्थ्य-मंत्री?

चीन में विशेषकर बच्चों में माइकोप्लाज्मा निमोनिया और इन्फ्लूएंजा फ्लू के मामलों में वृद्धि के मद्देनजर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने शनिवार को कहा, सरकार स्थिति पर नजर रख रही है और बचाव के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे है।

वैश्विक चिंता का कारण बने इस प्रकोप के बारे में पूछे जाने पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, आईसीएमआर और स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक चीन में निमोनिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए भारत को इस तरह के जोखिमों से कैसे बचाया जा सकता है, इसपर गंभीरता से ध्यान दे रहे हैं।

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बच्चों में सांस की बीमारी का खतरा - फोटो : iStock

आखिर क्या है ये बीमारी?

माइकोप्लाज्मा निमोनिया जिसे मिस्टीरियस निमोनिया कहा जा रहा है ये एक प्रकार के बैक्टीरिया के कारण होने वाली समस्या है जो मुख्यरूप से बच्चों को अपना शिकार बनाती है। इसके कारण सूखी खांसी, बुखार और शारीरिक मेहनत करने पर सांस की तकलीफ हो सकती है। माइकोप्लाज्मा निमोनिया के बैक्टीरिया सभी मानव रोगजनकों में से सबसे अधिक प्रचलित हैं।

माइकोप्लाज्मा निमोनिया स्कूल, कॉलेज परिसर और नर्सिंग होम जैसे भीड़-भाड़ वाले इलाकों में खांसने-छींकने से निकलने वाली ड्रॉपलेट्स के संपर्क से तेजी से फैलता है। पांच साल से कम आयु के बच्चों, बुजुर्गों, कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों, फेफड़ों की बीमारी के शिकार, सिकल सेल एनीमिया वाले लोगों में इसका खतरा अधिक देखा जाता रहा है।

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श्वसन संक्रमण और इसका जोखिम - फोटो : istock

चीन में बढ़ते खतरे की क्या है वजह?

चीन में पिछले कुछ दिनों से बढ़ती इस बीमारी के लिए चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के अधिकारियों ने कोविड-19 प्रतिबंध हटाने को जिम्मेदार ठहराया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इसी तरह की समस्या यूके में भी प्रतिबंधों के हटने के बाद देखी गई थी, इसे "लॉकडाउन एग्जिट वेव" नाम दिया गया है। 

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में जेनेटिक इंस्टीट्यूट के निदेशक फ्रेंकोइस बेलौक्स कहते हैं, चीन अपने लंबे लॉकडाउन के बाद पहली बार सर्दी के दिनों में प्रतिबंधों से मुक्त हुआ है। सख्त प्रतिबंधों के कारण यहां श्वसन जैसे रोगों के कारक वायरस का खतरा कम हो गया था। वर्तमान स्थिति को देखते हुए एक नए रोगजनक के उभरने को लेकर जो कयास लगाए जा रहे हैं उसकी कोई पुष्टि नहीं है। 

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श्वसन रोगों के बढ़ते मामले - फोटो : istock

चीन में निमोनिया के प्रकोप के बारे में महत्वपूर्ण बातें

  • 13 नवंबर को, चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने एक संवाददाता सम्मेलन में श्वसन रोगों में वृद्धि की सूचना दी।
  • चीन में बीमारियों पर निगरानी रखने वाली संस्था  प्रोग्राम फॉर मॉनिटरिंग इमर्जिंग डिजीज (प्रोमेड) ने बच्चों में निमोनिया के जोखिमों को लेकर सूचना दी। 
  • WHO ने चीन से हालिया प्रकोप पर जानकारी जारी करने के लिए कहा है।
  • शहर के एक प्रमुख अस्पताल की रिपोर्ट के मुताबिक हर दिन औसतन लगभग 1,200 मरीज आपातकालीन विभाग में भर्ती हो रहे हैं।
  • कई स्कूलों में कम से कम एक सप्ताह के लिए छुट्टी का ऐलान कर दिया गया है। माता-पिता को अतिरिक्त सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है।
  • स्वास्थ्य अधिकारी कहते हैं कि, सर्दी के मौसम के कारण संक्रमण के प्रसार को बढ़ोतरी आ सकती है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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