देश पिछले डेढ़ साल से कोरोना से जंग लड़ रहा है। वर्ल्डोमीटर के आंकड़े के अनुसार 28 मई तक भारत में कोरोना के कुल संक्रमितों की संख्या 2 करोड़ 75 लाख के आंकड़े को पार कर गई है। देश में कोरोना की दूसरी लहर के चलते लोगों को तमाम तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा, फिलहाल पिछले एक हफ्ते से रोजाना संक्रमितों के मिल रहे आंकड़ों में कमी देखी गई है।
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ICMR का अध्ययन: इस वजह से 56 फीसदी कोरोना संक्रमितों की हो जाती है मौत, न करें ऐसी गलती
Fri, 28 May 2021 02:22 PM IST
Abhilash Srivastava
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Abhilash Srivastava
Updated Fri, 28 May 2021 02:22 PM IST
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सेकेंडरी इंफेक्शन के कारण ज्यादातर लोगों का मौत
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कोविड में अन्य संक्रमणों का खतरा
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सेकेंडरी इंफेक्शन क्या होता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक किसी संक्रमण के इलाज के दौरान या बाद में एक अन्य संक्रमण का हो जाना सेकेंडरी इंफेक्शन कहलाता है। इससे पहले एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने भी सेकेंडरी इंफेक्शन को लेकर चिंता जताते हुए कहा था कि यह कोरोना संक्रमितों में अधिक मौत का कारण बन रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक किसी संक्रमण के इलाज के दौरान या बाद में एक अन्य संक्रमण का हो जाना सेकेंडरी इंफेक्शन कहलाता है। इससे पहले एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने भी सेकेंडरी इंफेक्शन को लेकर चिंता जताते हुए कहा था कि यह कोरोना संक्रमितों में अधिक मौत का कारण बन रहा है।
आईसीएमआर का अध्ययन
- फोटो : social media
आईसीएमआर का अध्ययन
देश के 10 अस्पतालों में 17,534 रोगियों पर किए गए अध्ययन के आधार पर आईसीएमआर ने बताया कि इनमें से 3.6 फीसदी लोगों में सेकेंडरी इंफेक्शन के मामले देखे गए। इनमें मृत्यु दर 56.7 फीसदी के करीब पाई गई। जून से लेकर अगस्त 2020 तक आईसीयू और अन्य वार्डों में भर्ती लोगों पर यह अध्ययन किया गया।
देश के 10 अस्पतालों में 17,534 रोगियों पर किए गए अध्ययन के आधार पर आईसीएमआर ने बताया कि इनमें से 3.6 फीसदी लोगों में सेकेंडरी इंफेक्शन के मामले देखे गए। इनमें मृत्यु दर 56.7 फीसदी के करीब पाई गई। जून से लेकर अगस्त 2020 तक आईसीयू और अन्य वार्डों में भर्ती लोगों पर यह अध्ययन किया गया।
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कोरोना वायरस का संक्रमण
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
रक्त और श्वसन तंत्रिका हो रही है प्रभावित
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि कोविड-19 रोगियों में उपचार के दौरान या बाद में सेकेंडरी बैक्टीरियल या फंगल इंफेक्शन के मामले देखने को मिले हैं। आश्चर्यजनक यह है कि इनमें से आधे से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। आईसीएमआर ने इस अध्ययन में पाया कि ज्यादातर लोग रक्त और श्वसन तंत्रिका संबंधी सेकेंडरी इंफेक्शन के शिकार हो रहे हैं। मौजूदा समय में ब्लैक, व्हाइट और येलो फंगस को भी सेकेंडरी इंफेक्शन के रूप में देखा जा रहा है।
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एंटीबायोटिक दवाओं के ज्यादा उपयोग ने बढ़ाई चिंता
- फोटो : Pixabay
सेकेंडरी इंफेक्शन के कारण क्या हैं?
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि सेकेंडरी इंफेक्शन के पीछे दवा प्रतिरोधी रोगजनकों (ड्रग रेजिस्टेंस पैथाजन) को महत्वपूर्ण कारण माना जा सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कोविड के समय में एंटी बायोटिक दवाओं का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ा है, जोकि इस तरह के बैक्टीरियल या फंगस संक्रमण का कारण हो सकता है।
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि सेकेंडरी इंफेक्शन के पीछे दवा प्रतिरोधी रोगजनकों (ड्रग रेजिस्टेंस पैथाजन) को महत्वपूर्ण कारण माना जा सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कोविड के समय में एंटी बायोटिक दवाओं का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ा है, जोकि इस तरह के बैक्टीरियल या फंगस संक्रमण का कारण हो सकता है।