भारत में कोरोना वायरस के तीन मरीजों की पुष्टि हुई है। कोरोना वायरस से संक्रमित ये तीनों मरीज केरल के हैं और चीन से भारत लौटकर आने के बाद इनमें कोरोना के लक्षणों की पुष्टि हुई है। दुनियाभर में कोरोना वायरस ने हाहाकार मचा रखा है और 125 से ज्यादा देशों में इस वायरस ने दस्तक दी है। चीन के वुहान शहर से विश्व में फैले इस खतरनाक वायरस ने लोगों के मन में एक अलग तरह की दशहत पैदा कर दी है। इस वायरस की बदौलत चीन में 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है और दुनियाभर में 20,627 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस वायरस के खतरे को देखते हुए इसका आयुर्वेदिक इलाजबताया है।
कोरोना वायरस: भारत ने दिया 400 से ज्यादा लोगों की जान लेने वाले इस विषाणु का आयुर्वेदिक इलाज
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आयुष मंत्रालय के अनुसार आयुर्वेद में कोरोना वायरस का इलाज है। आयुर्वेदिक परंपराओं के अनुसार, रोकथाम प्रबंधन के लिए ये उपाय सुझाए गए हैं –
- साबुन और पानी से अपने हाथों को कम से कम 20 सेकैंड तक धोएं।
- कम से कम 20 सेकंड के लिए अपने हाथों को अक्सर साबुन और पानी से धोएं।
- शदांग पनिया (मुस्ता, परपाट, उशीर, चंदन, उडिच्य़ा और नागर) प्रसंस्कृत पानी (1 लीटर पानी में 10 ग्राम पाउडर डाल कर उबालें, जब तक यह आधा तक कम न हो जाए) पी लें। इसे एक बोतल में स्टोर करें और प्यास लगने पर पिएं।
- बिना धोए हाथों से अपनी आंखें, नाक और मुंह छूने से बचें।
आयुर्वेदिक प्रथाओं के अनुसार रोगनिरोधी उपाय / इम्यूनोमॉड्यूलेटरी ड्रग्स
- स्वस्थ आहार और जीवन शैली के माध्यम से प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए उपाय किए जाएंगे।
- अगस्त्य हरितकी 5 ग्राम, दिन में दो बार गर्म पानी के साथ।
- शेषमणि वटी 500 मिलीग्राम दिन में दो बार।
- त्रिकटु (पिप्पली, मारीच और शुंठी) पाउडर 5 ग्राम और तुलसी 3-5 पत्तियां (1-लीटर पानी में उबालें, जब तक यह ½ लीटर तक कम नहीं हो जाता है और इसे एक बोतल में रख लें) इसे आवश्यकतानुसार और जब चाहे तब घूंट में लेते रहें।
- प्रतिमार्स नास्य : प्रत्येक नथुने में प्रतिदिन सुबह अनु तेल / तिल के तेल की दो बूंदें डालें।
नोट- यह सलाह केवल सूचना के लिए है और इसे केवल पंजीकृत आयुर्वेद चिकित्सकों के परामर्श से अपनाया जाएगा।