Monkeypox virus Symptoms: इन दिनों मंकीपॉक्स बीमारी की काफी चर्चा है और इसका कारण है इसका लगातार बढ़ते जाना। आप इसको इस बात से भी समझ सकते हैं कि कोविड-19 के बाद अब मंकीपॉक्स को भी विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ ने हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है। डब्ल्यूएचओ की मानें तो दुनिया भर के एक दर्जन से भी ज्यादा देशों में मंकीपॉक्स के मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि आप भी इस बीमारी से बचकर रहें। इसके लिए जरूरी है कि आपको पता हो कि इसके लक्षण क्या हैं और आप जरूरत पड़ने पर इससे कैसे बचाव कर सकते हैं। तो चलिए जानते हैं इस बारे में...
सावधान: कहीं आपको भी तो नहीं मंकीपॉक्स? ऐसे करें लक्षणों की पहचान और जानें बचाव के तरीके
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कैसे फैलता है मंकीपॉक्स?
- डॉक्टर मानते हैं कि ये एक संक्रामक रोग है जो संपर्क में आने से फैलता है। स्किन से संपर्क होने पर, जो व्यक्ति संक्रमित है उसके करीब आने से और यौन संबंध बनाने से आदि फैलता है।
- आंख, मुंह, नाक और कान के जरिए ये हमारे शरीर में प्रवेश करता है
- वहीं, संक्रमित चूहे, बंदर और गिलहरी के संपर्क में अगर आप आते हैं तो ये वायरस फैलता है।
लक्षण पहचानने जरूरी:-
- तेज सिर दर्द और सूजन होने पर
- मांसपेशियों और पीठ में दर्द होना
- तेज बुखार आना
- बुखार कम होने पर शरीर में चकत्ते हो जाना
- ध्यान रखें कि ये चकत्ते चेहरे से शुरू होते हैं और फिर पूरे शरीर में हो जाते हैं और फिर इनमें खुजली और दर्द होता है।
बचाव कैसे कर सकते हैं?
- बचाव करने के लिए सबसे पहले तो आपको लक्षणों की पहचान करनी होती है और फिर ऐसे व्यक्ति से दूरी बनाना जरूरी है। आप संक्रमित व्यक्ति को अलग रख सकते हैं
- पूरी तरह सफाई का ध्यान रखें और हाथों को बार-बार धोएं
- शारीरिक संबंध न बनाएं
- अपने डॉक्टर से संपर्क करें और वैक्सीन जरूर लगवाएं।
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डॉ. राजन गांधी
फिजिशियन
अनुभव- 25 साल
Medically Reviewed by Dr. Rajan Gandhi
https://ujalacygnus.com/doctors/#team_profile
नोट: डॉ. राजन गांधी अत्याधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह आईसीएचएच से वह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है।