Monkeypox Infection: दुनिया के कई देशों में मंकीपॉक्स संक्रमण के मामले बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं, जिसकी वजह से एक बार फिर से विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) में हड़कंप का माहौल है। पाकिस्तान और स्वीडन के बाद अब फिलीपींस में मंकीपॉक्स का पहला केस मिलने से हड़कंप मच गया है।
Monkeypox Infection: पाकिस्तान और स्वीडन के बाद अब फिलीपींस में मिला मंकीपॉक्स का पहला मामला
स्वीडन और पाकिस्तान के बाद अब फिलीपींस में भी सोमवार को मंकीपॉक्स का केस मिला है। रिपोर्ट्स की मानें तो ये देश का पहला केस है।
इन लक्षणों के बाद सामने आई रिपोर्ट
फिलीपींस डीओएच ने एक बयान जारी करके बताया कि, जो व्यक्ति मंकीपॉक्स से संक्रमित पाया गया है, उसे एक हफ्ते से काफी बुखार आ रहा था। बुखार के चार दिन बाद उसके चेहरे, पीठ, गर्दन, धड़, कमर के साथ-साथ हथेलियों और तलवों पर बड़े-बड़े दाने निकलने लगे। जब जांच की गई तो मंकीपॉक्स के संक्रमण का पता लगा। ऐसे में मरीज को आइसोलेट करके उसका इलाज शुरू कर दिया गया है।
WHO ने घोषित किया ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित
आपको बता दें कि कई अफ्रीकी देशों में बढ़ते संक्रमण के खतरे को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया था। अब इस रोग के मामले एशियाई देशों में भी देखे जा रहे हैं। फिलीपींस से पहले पाकिस्तान में शुक्रवार (16 अगस्त) को मंकीपॉक्स के तीन केस मिले थे। तीनों मरीज UAE की यात्रा करके लौटे थे।
लापरवाही बन सकती है प्रसार का कारण
वहीं, स्वीडन में गुरुवार (15 अगस्त) को मंकीपॉक्स का मामला सामने आया था। अफ्रीका के बाद यह पहला मामला था। यहां के मरीज में मंकीपॉक्स का क्लेड आई वैरिएंट पाया गया, जो कि एक जानलेवा वैरिएंट है। ऐसे में ये बीमारी चिंता का विषय बनती जा रही है। अध्ययनों के मुताबिक एमपॉक्स अति संक्रामक और जानलेवा संक्रमण का कारण बन सकता है, थोड़ी सी भी लापरवाही इस संक्रमण के व्यापक प्रसार का कारण बन सकती है।
भारत में भी अलर्ट
इस भयानक बीमारी के लक्षण वैसे तो फ्लू जैसे ही होते हैं, लेकिन जब ये बढ़ने लगती है तो शरीर पर मवाद वाले दाने पड़ने लगते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार इस साल अब तक अफ्रीकी देशों में एमपॉक्स के 14,000 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 524 मौतें दर्ज की गई हैं, जो पिछले साल के आंकड़ों से कहीं ज्यादा हैं। इनमें से 96% से ज्यादा मामले और मौतें अकेले कांगो में हुई हैं। इसी के चलते भारत में भी इसके लिए अलर्ट घोषित कर दिया गया है।