Medically Reviewed by Dr. Madhur Jain
कोरोना को दुनिया में आए डेढ़ साल से भी अधिक का समय बीत चुका है और इस दौरान इस वायरस ने करोड़ों लोगों को अपना शिकार बनाया, लाखों लोगों की जान ली। संक्रमण के डर से महीनों तक लोग अपने-अपने घरों में दुबके रहे और इसका भी असर उनकी सेहत पर पड़ रहा है। खासकर महिलाओं की सेहत। कोरोना काल में अनियमित दिनचर्या और खानपान में लापरवाही से महिलाओं के हार्मोन असंतुलित हुए हैं, जिससे उनमें मोटापा बढ़ रहा है। इसके अलावा महिलाओं में लिवर संबंधी दिक्कतें, सांस फूलने, उच्च रक्तचाप (हाई बीपी) और शुगर लेवल बढ़ने की भी समस्या पैदा हुई है। इसे मेटाबॉलिज्म डिसऑर्डर कहा जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना काल में महिलाओं के शरीर का रेग्यूलेटरी सिस्टम काफी प्रभावित हुआ है, जिससे वे मेटाबॉलिज्म संबंधी तरह-तरह की समस्याओं से जूझ रही हैं।
सलाह: महिलाओं में बढ़ रही है मेटाबॉलिज्म डिसऑर्डर की समस्या, न करें ये लापरवाही
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विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में हार्मोनल इनबैलेंस यानी हार्मोन असंतुलित होने की वजह से मेनोपॉज, डिप्रेशन, थायराइड, जोड़ों में दर्द, आदि की समस्या भी बढ़ी है। इसके अलावा उनकी आंखें भी कमजोर हो रही हैं और इसका सबसे बड़ा कारण है लगातार कई घंटों तक टीवी देखना या मोबाइल चलाना और लैपटॉप पर काम करना।
महिलाओं में इस वक्त सबसे बड़ी समस्या मोटापा और वजन बढ़ने की है। विशेषज्ञ हमेशा से ये कहते आए हैं कि अच्छी सेहत के लिए लोगों को अपने वजन पर नियंत्रण रखने की जरूरत होती है और इसके लिए स्वस्थ और नियंत्रित खानपान बहुत आवश्यक है।
आज के समय में लोग यह समझ कर जरूरत से ज्यादा खाना खा ले रहे हैं कि करना ही क्या है, घर पर ही तो रहना है। यही आदत दिक्कतें पैदा कर रही है। इसलिए विशेषज्ञ कहते हैं कि हमेशा संतुलित मात्रा में ही खाना खाएं, चाहे आप घर पर हों या बाहर हों। इसके अलावा जल्दी-जल्दी खाने की आदत भी सुधारें, क्योंकि इससे भोजन में पाए जाने वाले पोषक तत्व सही तरीके से शरीर में नहीं पहुंच पाते हैं।
महिलाओं के लिए यह सबसे जरूरी है कि वे घर के कामों के अलावा व्यायाम और योग आदि पर भी ध्यान दें। दरअसल, मेटाबॉलिज्म को नियंत्रण में रखने के लिए एक्सरसाइज बहुत जरूरी होता है। इसके अलावा पर्याप्त नींद लेना और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना भी जरूरी है। तनाव बिल्कुल न लें, क्योंकि तनाव से कम नींद आती है, अधिक भूख लगती है और ऐसे में वजन बढ़ने जैसी परेशानी पैदा हो जाती है।
नोट: डॉ मधुर जैन उजाला सिग्नस अस्पताल, रेवाड़ी में कार्डियोलॉजिस्ट और न्यूरोलॉजिस्ट हैं। इन्होंने तंजावुर मेडिकल कॉलेज, द तमिलनाडु डॉक्टर एमजीआर मेडिकल यूनिवर्सिटी से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसी के साथ डॉक्टर जैन ने नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन से डी.एन.बी मेडिसिन और डी.एन.बी कार्डियोलॉजी किया है। इनके पास एम्स, वी.एम. एम. सी. सी और सफदरजंग अस्पताल सहित कई अस्पतालों में काम करने का 10 सालों से ज्यादा का अनुभव है। डॉक्टर मधुर जैन के पास शरीर रचना विज्ञान, ईसीजी और प्रसूति, और स्त्री रोग में संमान का प्रमाण पत्र भी है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।