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Mental Health Studies: पीजी में रहने वालों में डिप्रेशन का खतरा अधिक, महामारी में नए रोगियों की बढ़ी संख्या

Sat, 26 Nov 2022 12:46 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 26 Nov 2022 12:46 PM IST
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युवाओं में बढ़ रही है मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं - फोटो : Pixabay

मानसिक स्वास्थ्य विकारों का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। हालिया अध्ययनों में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसके बढ़ते गंभीर खतरों के बारे में लोगों को अलर्ट किया है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेस (निमहंस) के हालिया अध्ययन के अनुसार शहर में पेइंग गेस्ट (पीजी) में रहने वाले युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य की समस्या, जो गंभीर स्थितियों में अवसाद का भी कारण बन सकती है इसका खतरा काफी तेजी से बढ़ता हुआ देखा गया है। इस साल 18 से 29 की आयुवर्ग वाले 300 से अधिक लोगों में से 10 फीसदी ने मेजर डिप्रेसिव एपिसोड (एमडीई) और 13.9 प्रतिशत ने तनाव विकारों के बारे में जानकारी दी। 



इसी तरह कनाडा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने हालिया अध्ययन में पाया कि कोरोना महामारी के बाद मानसिक स्वास्थ्य विकारों के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं। महामारी के दौरान हर आठ में से एक व्यक्ति को पहली बार अवसाद का शिकार पाया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि महामारी की प्रतिकूल परिस्थितियों ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि सभी उम्र के लोगों को अपने मानसिक सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है, क्योंकि इसके गंभीर मामलों का जोखिम तेजी से बढ़ता जा रहा है। लगभग हर उम्र के लोगों पर इसके दुष्प्रभाव देखे जा रहे हैं।

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एंग्जाइटी और न्यूरोटिक स्वास्थ्य समस्याएं - फोटो : Pixabay

मानसिक स्वास्थ्य का बढ़ रहा है जोखिम

निमहंस के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि लोगों में मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं तो तेजी से बढ़ी हैं, हालांकि कई कारणों से लोग चिकित्सकों तक नहीं जा रहे हैं। निमहंस में महामारी विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अरविंद कहते हैं, मानसिक स्वास्थ्य विकारों के जोखिम तेजी से बढ़ रहे हैं। साल 2015-16 के राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, 2.8 प्रतिशत भारतीय लोगों में मूड से संबंधित विकार देखे गए हैं, वहीं 3.5 प्रतिशत में एंग्जाइटी और न्यूरोटिक स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में पता चला। सभी लोगों को इस तरह के जोखिमों के लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। 

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युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं - फोटो : iStock

पीजी में रहने वालों में देखी जा रही हैं समस्याएं

अध्ययनकर्तांओं ने पाया कि पीजी में रहने वाले जिन लोगों में मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं का निदान हुआ उनमें से अधिकतर लोगों को मादक द्रव्यों का शिकार पाया गया। इनमें से कुछ को शराब जबकि कुछ को तंबाकू के सेवन की आदत थी। शोधकर्ताओं ने पाया कि पीजी में रहने वाले लोगों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए दो कारकों को जिम्मेदार पाया। 

पहला- वे घर से दूर एक नए शहर में रहते हैं और लंबे समय तक काम करते हैं।
दूसरा- उनमें इमोशनल सपोर्ट की कमी होती है। ऐसे लोगों अपनी भावनाओं को शेयर कर पाना कठिन होता है।

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तनाव की बढ़ती समस्या - फोटो : istock

कोरोना महामारी ने बढ़ा दी है मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं

कोरोना महामारी ने मानसिक स्वास्थ्य विकारों के जोखिम को काफी बढ़ा दिया है। इसी संबंध में कनाडा में हाल ही में हुए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों की टीम ने इसके बढ़ते जोखिमों को लेकर लोगों को अलर्ट किया है। 20 हजार से अधिक लोगों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि महामारी के दौरान हर 8 वयस्कों में से एक ने पहली बार अवसाद का अनुभव किया। वहीं जो लोग पहले से ही तनाव-अवसाद विकारों के शिकार थे, उनमें लक्षणों में गंभीरता अधिक देखी गई। 

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कोरोना महामारी ने बढ़ा दी हैं मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं - फोटो : Pixabay

कोरोना महामारी के साइड-इफेक्ट्स

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ़ एनवायर्नमेंटल रिसर्च एंड पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि कोरोना महामारी ने कई प्रकार से लोगों की मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया है। इसके लिए जिन कारकों को जिम्मेदार पाया गया उसमें कम आय और बचत की समस्या, अकेलापन, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में कठिनाई आदि प्रमुख थे।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सभी लोगों को मानसिक स्वास्थ्य विकारों के जोखिम को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। अगर आपमें इससे संबंधित लक्षण दिखते हैं तो इस बारे में विशेषज्ञ की सलाह जरूर ले लेनी चाहिए। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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