Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik
भारत में आमतौर पर ऐसा देखने को मिलता है कि लोग धड़ल्ले से दवा दुकानों से दवाइयां खरीदते हैं और बिना सोचे समझे खा लेते हैं। हालांकि कई दवाइयां ऐसी होती हैं, जिन्हें आप बिना डॉक्टर की पर्ची के खरीद सकते हैं, लेकिन कुछ दवाइयां ऐसी भी होती हैं, जिन्हें आप बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं खरीद सकते। दरअसल, ऐसा लोगों की सुरक्षा के लिहाज से होता है। बुनियादी तौर पर अगर समझें तो दवाइयों को ओटीसी, शेड्यूल एच, शेड्यूल एच1, शेड्यूल एक्स, आदि श्रेणियों में बांटा गया है। ओटीसी का मतलब होता है, इसे बिना डॉक्टर की सलाह के आसानी से खरीदा और सेवन किया जा सकता है। पैरासिटामोल, एस्पिरिन आदि प्रचलित ओटीसी दवाइयां हैं। लेकिन ऐसी दवाओं के पैकेट पर बताई अवधि से ज्यादा समय तक इनका सेवन न करें, क्योंकि इससे साइड-इफेक्ट का खतरा रहता है। अब आइए जानते हैं शेड्यूल एच, शेड्यूल एच1 और शेड्यूल एक्स की दवाएं क्या होती हैं?
अलर्ट: क्या होती हैं H-कैटेगरी की दवाएं? सेवन से पहले जान लें खतरे
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शेड्यूल एच दवाएं
- ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत ही शेड्यूल एच दवाओं का निर्माण और उनकी बिक्री की जाती है। शेड्यूल एत की दवाओं को बिना डॉक्टरी सलाह या डॉक्टर की बिना पर्ची के नहीं खरीदा जा सकता है, क्योंकि इन दवाओं की खुराक का निर्धारण खुद डॉक्टर करते हैं। अगर आप बिना डॉक्टरी सलाह के इनका सेवन लंबे समय तक करते हैं, तो स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और कभी-कभी तो जान का भी खतरा रहता है।
शेड्यूल एच में 500 से भी अधिक दवाएं हैं। एजिथ्रोमाइसिन और हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन जैसी दवाएं शेड्यूल एच में ही आती हैं। विशेषज्ञों की मानें तो शेड्यूल एच दवाओं के लेबल पर Rx लिखा होता है और उसके साथ ही इस्तेमाल को लेकर चेतावनी भी लिखी होती है।
शेड्यूल एच1 दवाएं
- विशेषज्ञ कहते हैं कि शेड्यूल एच1 दवा में तीसरे और चौथे जेनेरेशन की एंटीबायोटिक्स, एंटी-ट्यूबरकुलोसिस और साइकोट्रोपिक ड्रग्स जैसी नशीली और आदत बनाने वाली दवाएं शामिल हैं। ऐसी दवाओं को खरीदने के लिए भी डॉक्टर की पर्ची जरूरी है।
शेड्यूल एक्स दवाएं
- शेड्यूल एक्स में नारकोटिक और साइकोट्रोपिक दवाएं आती हैं, जो अत्यंत प्रभावी और नशीली होती हैं। ये दवाएं सीधे दिमाग पर असर करती हैं। ऐसे में इनकी गलत खुराक या ओवरडोज घातक भी साबित हो सकती हैं। इसलिए शेड्यूल एक्स दवाएं खरीदने और उनका सेवन करने के लिए डॉक्टर की पर्ची और सलाह जरूरी है।
नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।