सफर के दौरान गाड़ी के शीशे से बाहर झांकिए, एक चीज जो आपको सबसे कॉमन दिखेगी वह है- सड़क किनारे दीवारों पर छपे 'स्वप्नदोष' और 'बचपन की गलतियों' के इलाज के विज्ञापन। इस स्टोरी का शुरुआत यहीं से होती है। हस्तमैथुन, स्वप्नदोष, शीघ्रपतन और यौन अंगों से संबंधित ये विज्ञापन स्वाभाविक तौर पर हमें आकर्षित करते हैं, कारण- इससे संबंधित कई सवाल हमारे दिमाग बचपन से ही होते हैं, पर सामाजिक दायरों ने हमें ऐसा बांध रखा होता है कि इन विषयों पर चाहकर भी हम चर्चा नहीं कर पाते। दुर्भाग्यवश हमारी इसी झिझक और सीमित सोच के दायरों ने नीम-हकीमों और 'सेक्स मेडिसिन मार्केट' का एक ऐसा 'रैकेट' खड़ा कर दिया है, जो हमारी अज्ञानता का जबरदस्त फायदा उठाते हैं। रैकेट इसलिए कहा जाएगा कि इसमें स्व-घोषित डॉक्टर और हकीम इलाज ही उन चीजों कर रहे होते हैं जिसे मेडिकल साइंस असल में कोई बीमारी या समस्या मानता ही नहीं।
Exclusive: हस्तमैथुन को लेकर हमारी अज्ञानता-संकोच की नींव पर खड़ा है 'बड़ा रैकेट', जो समस्या ही नहीं उसका भी हो रहा है इलाज
हस्तमैथुन को लेकर अपराधबोध की भावना
सेक्स और इससे संबंधित अन्य क्रियाओं को लेकर चूंकि हमारे समाज में बात करने को 'गलत' माना जाता है, जो स्वाभाविक तौर पर हमारे जिज्ञासु दिमाग में कई तरह की गलत जानकारियों का कारण बनता है। हस्तमैथुन को लेकर भी अक्सर लोगों के मन में ऐसी ही गलत जानकारियों और अपराधबोध-पाप की भावना देखने को मिलती है।
एक ऐसे ही मामले में युवक के मन में इसे लेकर इतना अपराधबोध घर कर गया कि वह रात में हाथों को बंधवाकर सोने लगा, ताकि वह खुद को नियंत्रित कर सके। उसे लगने लगा कि अगर वह हस्तमैथुन करता रहा तो इससे भगवान नाराज हो जाएंगे, सामाजिक नजरिए से उसके लिए जीवन जीना कठिन हो जाएगा। इस डर का फायदा तांत्रिक और जड़ी-बूटी वाले बाबाओं ने खूब उठाया। अंत में डॉक्टरी जांच के दौरान उसमें इस अपराधबोध भावना के कारण 'क्रोनिक स्ट्रेस डिसऑर्डर' का निदान किया गया। ऐसी भावना अममून हर किसी के दिमाग में कभी न कभी आती ही है, शायद आपके मन में भी?
मनोचिकित्सकों का कहना है कि हस्तमैथुन को लेकर खुद को नियंत्रित करने, अपराध, पाप या ग्लानि जैसी भावनाओं का अनुभव करने की आवश्यकता ही क्यों है? हस्तमैथुन, अप्राकृतिक नहीं है। यह मस्तिष्क में उपजने वाली एक सामान्य सी इच्छा है, जिसे हमारी नासमझी का फायदा उठाकर वर्षों से असामान्य क्रिया के तौर पर प्रस्तुत किया जाता रहा है।
हस्तमैथुन कितना गलत-कितना सही?
यह सवाल युवावस्था से गुजर रहे, या संभवत: हर आयुवर्ग के मन में रहता ही है, पर कभी इसपर न तो खुल कर बात की गई, न ही लोगों को सटीक जानकारी मिल पाती है। हस्तमैथुन के बारे में समझने के लिए हमने कंसलटेंट साइकेट्रिस्ट एंड साइकोसेक्सुअल एक्सपर्ट डॉ सत्यकांत त्रिवेदी से बात की। डॉ सत्यकांत कहते हैं, सेक्स और सेक्सुअल डिजायर को लेकर बातचीत करना सामाजिक रूप से निषेध माना जाता है, ऐसा करने वालों के प्रति लोगों के देखने का नजरिया बदल जाता है। पर जरूरत यह है कि इन विषयों पर गंभीरता से बात की जानी चाहिए।
हस्तमैथुन पूरी तरह से सामान्य मानवीय क्रिया है, इससे किसी भी तरह का शारीरिक-मानसिक कोई नुकसान नहीं होता है, तब तक, जबतक यह आपके कंट्रोल में है। जब आप हस्तमैथुन के कंट्रोल में हो जाएं तब यह स्थिति समस्याजनक मानी जाती है। ऐसे में हस्तमैथुन के गलत-सही का प्रश्न ही नहीं है। रिसर्च बताते हैं कि 90-95 फीसदी पुरुष और 70-75 फीसदी महिलाएं हस्तमैथुन करती हैं।
हस्तमैथुन के क्या नुकसान हैं?
यह प्रश्न सबसे महत्वपूर्ण है, अमूमन हर युवा मन में इसके इर्द-गिर्द कई सारे सवाल घूमते रहते हैं। डॉ सत्यकांत बताते हैं, हस्तमैथुन पूरी तरह से स्वस्थ क्रिया है, यह हमारी सेक्स की इच्छाओं की पूर्ति का एक साधन है। इसको लेकर समाज में व्याप्त अशिक्षा और गलत जानकारियों ने इससे नुकसान, जैसे प्रश्न मन में पैदा कर दिए हैं।
हस्तमैथुन क्रिया पूर्णत: सामान्य है, इसके कोई नुकसान नहीं हैं और न ही इससे भगवान नाराज होते हैं। हां, हस्तमैथुन के बारे में दिमाग में गलत जानकारियां रखना, हस्तमैथुन करने के बाद ऐसा लगना जैसे कोई पाप किया है, यह भावनाएं आपके लिए जरूर नुकसानदायक हैं। अगर यह लंबे समय तक दिमाग में बनी रहती हैं तो इससे चिंता-तनाव, अवसाद, जैसी दिक्कतें जरूर हो सकती हैं। महिला-पुरुष, दोनों हस्तमैथुन करते हैं, और यह दोनों के लिए स्वस्थ है।
सीधा फंडा है- अगर आप अपने आनंद के लिए हस्तमैथुन कर रहे हैं तो यह पूर्णत: स्वस्थ है, पर अगर यह आपकी मजबूरी बन गया है और आपको करना ही पड़ रहा है, तो यह स्थिति समस्याकरक है।
हस्तमैथुन को लेकर फैली गलत जानकारियां
चूंकि सेक्स-हस्तमैथुन समाज में चर्चा के लिए 'निषेध विषय' हैं, ऐसे में गलत जानकारियों का फैलना या दिमाग में बैठ जाना स्वाभाविक है। डॉ सत्यकांत ने इसपर विस्तार से जानकारी दी।
लिंग के आकार पर असर- हस्तमैथुन से लिंग के साइज, शेप, टेस्टोस्टेरोन या इस्ट्रोजन लेवल (क्रमश: पुरुषों और महिलाओं को सेक्स के लिए प्रेरित करने वाला हार्मोन), यौन क्षमता, फर्टीलिटी में कोई कमी नहीं आती। क्या शरीर में कोई ऐसा अंग है जिसका उपयोग करने पर उसके साइज पर फर्क पड़ता है? हाथ, आंख, कान, पैर?
कितनी बार किया जा सकता है?- यह सोशल मीडिया और यूट्यूब के वीडियो को खूब रीच देने वाला सबसे पसंदीदा सवाल है। डॉ सत्यकांत कहते हैं, शादी के बाद दिन में कितनी बार संभोग करना है, प्रेमी-प्रेमिका के संभोग की क्या कोई तय संख्या होती है? तो हस्तमैथुन को लेकर यह सवाल क्यों? हां, पर इसका एक पहलू यह भी है कि अगर हमें दिन में बार-बार इसी की इच्छा होती रहती है, सारा काम छोड़कर यही करना पड़ता है तो इसपर जरूर विचार करने की आवश्यकता है।
वीर्य की गुणवत्ता पर असर- आमतौर पर धारणा रही है कि 100 बूंद खून से 1 बूंद वीर्य निर्मित होता है, ऐसे में हस्तमैथुन करने से वीर्य की गुणवत्ता में कमी आ जाती है। डॉ सत्यकांत कहते हैं, यह सेक्स की दवाइयों की बिक्री के लिए फैलाया गया मायाजाल है। संभोग और हस्तमैथुन दोनों ही स्थितियों में चरमोत्कर्ष में वीर्य निकलता है, तो संभोग के दौरान निकलने वाला वीर्य स्वस्थ और हस्तमैथुन करने से निकलने पर अस्वस्थ या इसकी गुणवत्ता में कमी कैसे आ सकती है? वीर्य तो एक ही है। अगर ऐसा होता, तो हर शादीशुदा व्यक्ति कमजोरी का शिकार ही होता।
हस्तमैथुन और वीर्य की गुणवत्ता के संबंध को और अच्छे से जानने के लिए हमें पहले यह समझना आवश्यक है कि शरीर में वीर्य बनता कैसे है?