मेडिकल क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को क्रांति माना जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में तकनीकि विकास की मदद से स्वास्थ्य क्षेत्र पर पड़ने वाला अनावश्यक दबाव कम होगा। हालिया शोध में वैज्ञानिकों ने बताया कि एआई की मदद से कैंसर की स्क्रीनिंग आसान होगी, समय पर रोग का पता लगाने और रोग के उपचार में मदद मिल सकेगी। गौरतलब है कि कैंसर, वैश्विक स्तर पर मृत्यु के प्रमुख कारणों में से है, हर साल इसके कारण लाखों लोगों की मौत हो जाती है।
AI & Health: एआई की मदद से कैंसर का निदान होगा आसान, विशेषज्ञों को उम्मीद- मृत्युदर में भी आएगी कमी
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ब्रेस्ट कैंसर की स्क्रीनिंग में मिलेगी मदद
स्विडन स्थित यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि एआई सपोर्टेड मैमोग्राफी की मदद से स्तन में ट्यूमर के बारे में आसानी से पता लगाने में मदद मिल सकती है। इससे रेडियोलॉजिस्ट पर दबाव तो कम होगा ही साथ ही समय पर स्तन कैंसर के मामलों की जांच में भी मदद मिल सकेगी।
80 हजार से ज्यादा स्वीडिश महिलाओं पर किए गए शोध में एआई के माध्यम से अधिक बेहतर तरीके से कैंसर की स्क्रीनिंग के बारे में जानने को मिला। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में एआई की मदद से वैश्विक स्तर पर बढ़ रहे कैंसर के जोखिमों को कम किया जा सकेगा।
अध्ययन में क्या पता चला?
शोध में शामिल 80 हजार महिलाओं को दो समूहों में बांटा गया। पहले में इंटरवेशन (40,003 महिलाएं) और दूसरे में एआई सपोर्टेड स्क्रीनिंग से गुजरी महिलाएं (40,030) थीं। इस अध्ययन में मानक कैंसर स्क्रीनिंग की तुलना में एआई द्वारा की गई स्क्रीनिंग को अधिक प्रभाविकता वाला पाया है।
अध्ययन की रिपोर्ट के मुताबिक एआई की मदद से 20 प्रतिशत अधिक सटीकता के साथ समस्या का पता लगाना आसान था। इसमें गलत रिपोर्ट आने का भी जोखिम काफी कम होता है। कैंसर विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते समस्या का निदान हो जाता है तो इससे रोग का इलाज तो आसान होता ही है साथ ही रोगी के जान बचने की संभावना भी काफी बढ़ जाती है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
विश्वविद्यालय में डायग्नोस्टिक रेडियोलॉजी में प्रमुख शोधकर्ता और एसोसिएट प्रोफेसर क्रिस्टीना लैंग कहती हैं, कैंसर के बढ़ते जोखिमों के बीच समय पर निदान में एआई से लाभ मिल सकेगा।
इसके अलावा, रेडियोलॉजिस्ट के लिए स्क्रीन-रीडिंग में भी 44 प्रतिशत की कमी देखी गई है। अनुमान लगाया गया है कि एआई समूह में लगभग 40,000 स्क्रीनिंग टेस्ट की रिपोर्ट को समझने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करके रेडियोलॉजिस्ट के पांच महीने के समय की बचत की है।
रेडियोलॉजिस्ट पर पड़ने वाला दबाव होगा कम
शोधकर्ताओं की टीम का कहना है कि औसतन एक रेडियोलॉजिस्ट एक घंटे में 50 मैमोग्राम की रीडिंग कर सकता है। अध्ययन में कहा गया है कि एआई के माध्यम से इसे दोगुना किया जा सकता है, साथ ही खास बात ये भी है कि इसमें फाल्स रिपोर्ट की आशंका भी कम होती है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि अब तक के परिणाम काफी आशाजनक रहे हैं और हम उम्मीद करते हैं कि कैंसर के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी एआई की मदद से समस्याओं का निदान करना पहले की तुलना में अधिक आसान हो सकेगा।
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स्रोत और संदर्भ
Artificial intelligence-supported screen reading versus standard double reading in the Mammography Screening with Artificial Intelligence trial (MASAI): a clinical safety analysis of a randomised, controlled, non-inferiority, single-blinded, screening accuracy study
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