बच्चों के न पैदा होने का कारण केवल महिलाएं ही नहीं बल्कि पुरुषों की कमियां भी जिम्मेदार होती हैं। सही शब्दों में कहे तो कई दंपतियों में महिलाएं नहीं बल्कि पुरुष बांझ होते हैं। हांलाकि पुरुष अपनी इस कमी को स्वीकारते नहीं है और जीवन भर दुखी रहते हैं। हांलाकि आईवीएफ जैसी तकनीक की मदद से अब पुरुषों की भी कमी को दूर किया जा सकता है।तो चलिए जानें कि किस नई तकनीक की मदद से पुरुषों के बांझपन को भी दूर किया जा सकता है।
इंट्रासाइटोप्लास्मिक स्पर्म इंजेक्शन (ICSI) पुरुष बांझपन के उपचार का सफल तरीका है। ICSI को IVF (इन विंट्रो फर्टिलाइजेशन) की उन्नत तकनीक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। ICSI पुरुष बांझपन के उपचार के सबसे सफल तरीके के रूप में सामने आया है। जिन पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या बहुत कम होती है, वहां आईवीएफ तकनीक ज्यादा कारगर नहीं होती है ऐसी स्थिति में ICSI तकनीक से लाभ होने की संभावनाए अधिक रहती हैं । इस प्रक्रिया महिला के अंडों को शरीर से बाहर निकल कर लैब में हर परिपक्व अंडे के केंद्र में एक शुक्राणु को इंजेक्ट किया जाता है जिससे भ्रूण बन जाता है जिसे बाद में महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है।
क्या है ICSI के लाभ
पुराने समय में पुरुष बांझपन की परिस्थिति में शुक्राणुदाता की शरण में जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता था, लेकिन ICSI ट्रीटमेंट ने उन पुरुषों को भी पिता बनने का सुख दिया है, जिनमें शुक्राणुओं की संख्या बेहद कम होती है या निल होती है ।ICSI का काम है मेल पार्टनर के शुक्राणुओं में से स्वस्थ शुक्राणु चुनना और उसके प्रयोग से गर्भधारण को संभव बनाना।
आई वी एफ में लैब में महिला के अंडो के सामने पुरुष के शुक्राणुओ को छोड़ दिया है, शुक्राणु अंडो में प्रवेश कर जाते है जिससे निषेचन की प्रक्रिया होती है जबकि इक्सी में एक अंडे में एक शुक्राणु का प्रवेश करवाया जाता है इससे निषेचन की संभावनाए अधिक रहती है | इस तकनीक का सफलता प्रतिशत अधिक होने का कारण यह है पुरुष के कम अच्छे शुक्राणुओ से भी गर्भधारण किया जा सकता है।
शुन्य शुक्राणुओं की स्थिति में संभव है इलाज
कई पुरुषों में शून्य स्पर्म की समस्या भी सामने आती है ऐसी परिस्थिति में इक्सी तकनीक कारगर साबित हुई है। कई पुरुष ऐसे होते हैं जिनके अंडकोष में शुक्राणु बनते तो हैं लेकिन बाहर नहीं आ पाते है, ऐसे में टेस्टीक्यूलर बायप्सी के माध्यम से अंडकोष से शुक्राणु लेकर गर्भधारण करवाया जा सकता है ।