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अध्ययन: लॉन्ग कोविड में बढ़ती ब्रेन फॉग की समस्या, शोधकर्ताओं ने बताया इन चीजों के सेवन से मस्तिष्क कोशिकाएं होंगी स्वस्थ

Sat, 30 Apr 2022 07:21 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 30 Apr 2022 07:21 PM IST
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लॉन्ग कोविड की समस्याओं को लेकर रहें सावधान - फोटो : Pixabay

कोरोना महामारी की शुरुआत से ही संक्रमण की गंभीरता और इसके कारण होने वाली स्वास्थ्य जटिलताएं रोगियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। देश में दूसरी लहर के बाद से ठीक हो चुके लोगों में लॉन्ग कोविड के रूप में कई तरह की समस्याएं भी तेजी से रिपोर्ट की जा रही हैं, यानि की संक्रमण के साथ-साथ लॉन्ग कोविड की दिक्कतें, इस समय महमारी से संबंधित दो बड़ी चुनौतियां हैं। कई मामलों में देखा गया है कि लॉन्ग कोविड के केस गंभीर समस्याओं का भी कारण बन सकते हैं, साथ ही कुछ लोगों में यह दिक्कतें छह महीने से लेकर एक साल तक भी बनी रह सकती हैं।



लॉन्ग कोविड से प्रभावित लोगों में ब्रेन फॉग भी एक ऐसी ही गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। इस स्थिति में लोगों को मस्तिष्क से संबंधित कई तरह की दिक्कतें जैसे एकाग्रता की कमी, भ्रम और अस्पष्ट विचार न होना, याददाश्त में कमजोरी महसूस हो सकती है। कुछ स्थितियों में ब्रेन फॉग के कारण लोगों के लिए सामान्य जीवन के काम-काज तक करना कठिन हो जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों को इसके लक्षणों को लेकर विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए, जिससे समय रहते स्थिति का पता चल सके और रोगी का उचित इलाज किया जा सके। आइए आगे इस बारे में विस्तार से समझते हैं। 

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कोरोना का मस्तिष्क पर असर - फोटो : istock

लॉन्ग कोविड में ब्रेन फॉग की समस्या

कई शोध इस ओर इशारा करते हैं कि कोरोना का संक्रमण शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है। कुछ लोगों के मस्तिष्क पर भी संक्रमण का असर हो सकता है, जोकि लॉन्ग कोविड के रूप में लंबे समय तक भी बना रह सकता है। यूके की एक रिपोर्ट में प्रोफेसर गुडविन बताते हैं कि शोध से पता चलता है कि कोरोना वायरस मस्तिष्क कोशिकाओं की माइटोकॉन्ड्रिया को नुकसान पहुंचा सकता है।

मस्तिष्क के भीतर वायरस खुद को बढ़ाना शुरू कर देता है, जिसके कारण लोगों को संक्रमण के दौरान और ठीक होने के बाद भी कई तरह की जटिलताओं का अनुभव होता रह सकता है। ब्रेन फॉग उसी में से एक समस्या है। 

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ब्रेन फॉग की समस्या की पहचान करें - फोटो : pixabay

ब्रेन फॉग की पहचान कैसे करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक ब्रेन फॉग की स्थिति में आपको ऐसा अनुभव हो सकता है जैसे आपको पुरानी चीजें याद ही न हो, आप किसी भूलभुलैया में खो गए हैं। ऐसी स्थिति में भ्रमित, अकेला, निराश महसूस करना, यादादाश्त में कठिनाई, ध्यान न लगना या मानसिक स्पष्टता से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। यदि संक्रमण से ठीक होने के बाद आपमें इस तरह की समस्याएं बनी रहती हैं तो इस बारे में किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें।

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ब्रेन फॉग के लक्षणों को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : iStock

ब्रेन फॉग के लक्षणों को कैसे ठीक करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मस्तिष्क की कोशिकाओं में वायरस के प्रभाव के कारण प्रतिरक्षा प्रणाली पर भी असर हो सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इसकी जटिलताओं से बचे रहने के लिए आहार का विशेष ध्यान रखना बहुत जरूरी है। पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ, मस्तिष्क कोशिकाओं के पुनर्जनन में मदद कर सकते हैं।

विशेष रूप से ओमेगा-3 फैटी एसिड और प्रोटीन से भरपूर चीजों का सेवन ऐसे लोगों के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। आहार में अलसी, चिया सीड्स, मछली, अखरोट, टोफू, शेलफिश, स्प्राउट्स और एवोकाडो जैसी चीजों को शामिल करके लाभ पाया जा सकता है। 

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स्वस्थ आहार का सेवन बहुत जरूरी - फोटो : iStock

इन बातों का भी रखें ध्यान

ब्रेन फॉग की स्थिति में आहार के साथ दिनचर्या को भी ठीक रखना बहुत आवश्यक हो जाता है। जीवनशैली में स्वस्थ बदलाव से भी आपको आराम मिल सकती है।

  • कंप्यूटर और मोबाइल फोन पर कम समय बिताएं। 
  • सकारात्मक सोच रखें, तनाव कम करें।
  • पर्याप्त नींद लें, रात में 7-8 घंटे जरूर सोएं।
  • नियमित व्यायाम से लाभ मिलता है। 
  •  शराब, धूम्रपान और कॉफी के अधिक सेवन से बचें।
  • आनंददायक गतिविधियों में समय बिताएं। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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