Lip Cancer Symptoms : लिप कैंसर मुंह के कैंसर (ओरल कैंसर) का एक प्रकार है जो कि आमतौर पर होंठ के निचले हिस्से पर अधिक देखने को मिलता है। यह होंठों की कोशिकाओं में असामान्य वृद्धि के कारण होता है। शुरुआत में यह हल्का दिखता है, जिसको लोग नजरअंदाज कर देते हैं। मुख्य रूप से धूम्रपान, तंबाकू चबाने, शराब का सेवन और सूरज की हानिकारक किरणों के अधिक संपर्क में आने से हो सकता है। आइए जानते हैं होंठ के कैंसर के शुरुआती लक्षण और लिप कैंसर के कारण क्या हैं, ताकि इस तरह के कैंसर से समय रहते बचाव और इलाज प्राप्त किया जा सके।
Lip Cancer: क्यां होंठ पर भी हो सकता है कैंसर? जानिए इसके कारण और शुरुआती लक्षण
आइए जानते हैं होंठ के कैंसर के शुरुआती लक्षण और लिप कैंसर के कारण क्या हैं, ताकि इस तरह के कैंसर से समय रहते बचाव और इलाज प्राप्त किया जा सके।
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लिप कैंसर के कारण
तंबाकू और धूम्रपान
बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तंबाकू चबाने से होंठों की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं।
अत्यधिक शराब
अधिक मात्रा में शराब पीने से कैंसर का खतरा बढ़ता है।
सूरज की UV किरणें
बिना सनस्क्रीन या सुरक्षा के लंबे समय तक सूरज के संपर्क में रहना।
मानव पेपिलोमा वायरस (HPV)
यह एक वायरल संक्रमण है, जो मुंह और होंठों के कैंसर का कारण बन सकता है।
खराब ओरल हाइजीन
गंदे दांत और मसूड़े, लंबे समय तक मुंह में जमी गंदगी कैंसर का कारण बन सकती है।
जेनेटिक कारण
अगर परिवार में किसी को ओरल कैंसर हुआ है, तो इसका खतरा बढ़ सकता है।
होठों के कैंसर के शुरुआती लक्षण
अगर समय रहते लक्षणों को पहचान लिया जाए तो इसका इलाज संभव है। जानिए लिप कैंसर के शुरुआती लक्षण
- होंठों पर लगातार रहने छाले या घाव रहते हैं, जो लंबे समय तक ठीक नहीं होते हैं।
- होंठों की त्वचा पर लाल या सफेद धब्बे दिखने लगते हैं।
- लिप्स पर गांठ या सूजन महसूस होना।
- बोलने या खाने में कठिनाई होना।
- होंठों और आसपास के क्षेत्र में सुन्नपन या झुनझुनी महसूस होना।
- अचानक होंठों का रंग बदलना या असामान्य रूप से मोटा होना।
- मसूड़ों या जबड़ों में दर्द।
होंठ के कैंसर से बचाव के तरीके
ओरल कैंसर से बचाव के लिए लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव और सावधानी को अपनाने की जरूरत होती है।
- लिप कैंसर का सबसे प्रमुक कारण तंबाकू या शराब का सेवन है। आपको इसके इस्तेमाल से बचना चाहिए।
- सूरज की किरणों से बचाव करें। इसके लिए बाहर जाने से पहले सनस्क्रीन व लिप बाम लगाएं और टोपी पहनें।
- ओरल हाइजीन का ध्यान रखते हुए नियमित रूप से दांतों और मुंह की सफाई करें।
- स्वस्थ आहार लें। फलों और सब्जियों से भरपूर भोजन करें।
- डॉक्टर से नियमित जांच कराएं। अगर किसी भी लक्षण का संदेह हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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