आर्थराइटिस यानी गठिया की समस्या को एक दशक पहले तक उम्र बढ़ने के साथ होने वाली दिक्कत के रूप में जाना जाता था, हालांकि अब कम उम्र के लोग भी इसके शिकार हो रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण हड्डियों में कमजोरी और इससे संबंधित समस्याओं को बढ़ते हुए देखा जा रहा है। आर्थराइटिस की समस्या के कारण रोजमर्रा के कार्यों में बाधा आ सकती है, ये जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित करने वाली हो सकती है।
Arthritis Risk: ऐसी है दिनचर्या तो 35 की उम्र में ही हो सकते हैं आर्थराइटिस के शिकार, ऐसे लोग रहें खास सावधान
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गठिया के बढ़ते मामले
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया अधिक वजन की स्थिति जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डालती है, जिससे गठिया का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा गतिहीन जीवनशैली, ज्यादा देर तक बैठे रहना या व्यायाम न करना भी इस समस्या का कारण बन सकती है।
जीवनशैली में कुछ बदलाव करने से गठिया होने का जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है। आइए जानते हैं कि कौन सी आदतें आर्थराइटिस का कारण बन सकती हैं?
धूम्रपान करते हैं तो हो जाएं सावधान
धूम्रपान की आदत को आर्थराइटिस के प्रमुख कारकों में से एक माना जाता है, ये रूमेटाइड अर्थराइटिस के बढ़ते जोखिमों के लिए भी जिम्मेदार पाया गया है। धूम्रपान के कारण जोड़ों में कठोरता बढ़ने का जोखिम रहता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, धूम्रपान छोड़ने से इसके जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया धूम्रपान करने वाले लोगों को जोड़ों की सेहत को लेकर और भी सावधानी बरतते रहने की जरूरत होती है।
वजन को कंट्रोल रखना जरूरी
अधिक वजन को जोड़ों के लिए समस्याकारक माना जाता है इससे अर्थराइटिस, विशेष रूप से ऑस्टियोआर्थराइटिस का जोखिम बढ़ जाता है। स्वस्थ वजन बनाए रखने से गठिया होने के खतरे को काफी कम किया जा सकता है। वजन को कम रखने के लिए स्वस्थ और पौष्टिक आहार के सेवन के साथ-साथ नियमित व्यायाम करने से भी लाभ मिल सकता है। वजन प्रबंधन में नियमित शारीरिक गतिविधि को सबसे प्रभावी है।
नियमित व्यायाम बहुत जरूरी
शारीरिक गतिविधि जोड़ों की गतिशीलता को बनाए रखने, मांसपेशियों को मजबूत करने और समग्र स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए जरूरी है। यह एंडोर्फिन के स्राव को भी बढ़ावा देता है, जो दर्द को प्रबंधित करने में मदद कर सकता है। अपनी दिनचर्या में नियमित व्यायाम जैसे वॉकिंग, साइकिल चलाना, तैराकी या योग को शामिल करें। व्यायाम की आदत बनाने से वजन को कंट्रोल रखना और जोड़ों की समस्याओं को कम करना दोनों आसान हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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