कोरोना संक्रमण ने देखते ही देखते पूरी दुनिया के लिए समस्याओं को बढ़ा दिया है। चीन में तो हालात बदतर हैं ही, जापान और अमेरिका में भी खतरा बढ़ता देखा जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में चीन सहित कई देशों में बिगड़ते हालात को देखते हुए अन्य देशों से बेहद सावधानी बरतने की अपील की है।
Covid-19: BF.7 संक्रमितों में देखे जा रहे हैं ये नए लक्षण, महामारी विशेषज्ञ ने इस खतरे को लेकर चेताया
दुनिया की 10% आबादी हो सकती है संक्रमित
अमेरिकन पब्लिक हेल्थ साइंसेज में महामारी विशेषज्ञ एरिक फीगल-डिंग ने लोगों को अलर्ट करते हुए कोरोना को लेकर विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। महामारी विज्ञानी का अनुमान है कि अगले तीन महीने में दुनिया की 10 फीसदी आबादी संक्रमित हो सकती है। इसमें लाखों लोगों की मृत्यु होने की भी आशंका है। कोरोना के इस वैरिएंट्स की संक्रामता दर को देखते हुए अध्ययनकर्ताओं ने अन्य देशों को चीन से सबक लेते हुए बचाव को लेकर सख्ती बरतने की अपील की है। आइए इस बारे में आगे विस्तार से जानते हैं।
संक्रमितों में देखे जा रहे हैं ये लक्षण
मीडिया रिपोर्ट्स बताते हैं कि फिलहाल जिन देशों में कोरोना के मामलों में भारी उछाल आया है वहां संक्रमितों में गंभीर लक्षण कम ही देखे गए हैं। ओमिक्रॉन BF.7 से संक्रमित ज्यादतर लोगों में गला खराब होने, नाक बहने या बंद नाक, छींक या बिना कफ वाली खांसी, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और आवाज में कर्कशता की समस्या देखी जा रही है।
विशेषज्ञों ने पाया है कि कुछ लोगों में इन लक्षणों के साथ लूज मोशन की भी दिक्कत हो सकती है। इनमें से 3-4 लक्षण दिख रहे हैं तो तुरंत किसी विशेषज्ञ से सलाह लेकर जांच कराएं।
ज्यादातर संक्रमित एसिम्टोमेटिक
कोरोने के फिलहाल ज्यादातर संक्रमित एसिम्टोमेटिक हैं, यानी कि संक्रमित होने के बावजूद भी उनमें लक्षण नहीं नजर आ रहे हैं। विशेषज्ञ इस तरह की स्थिति को संक्रमण बढ़ाने वाला मान रहे हैं। ऐसे लोगों के संपर्क में आने से कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में गंभीर खतरा हो सकता है। फिलहाल चीन में संक्रमितों के मौत के बढ़ते मामले भी काफी चिंताकरक हैं।
शवों से भी बढ़ सकता है संक्रमण का जोखिम
स्थानीय चीनी मीडिया की रिपोर्ट्स से पता चलता है कि यहां मृतकों की संख्या काफी बढ़ गई है और शवघरों में भारी भीड़ देखी जा रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में जापान में चिबा विश्वविद्यालय के शोधकर्ता हिसाको सैतोह ने चेतावनी जारी की है। वह कहते हैं, कुछ देशों में संक्रमितों की लाशों को या तो परिजन घरों में वापस ले जा रहे हैं या फिर लाशों को लावारिस छोड़ दिया जा रहा है। यह और भी खतरनाक हो सकता है। शवों में भी वायरस 15-17 दिनों तक रह सकता है जिसके संपर्क में आने के कारण लोगों के संक्रमित होने का खतरा है। लाशों का सही तरीके से अंतिम संस्कार किया जाना आवश्यक है।