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Intermittent Fasting: वजन घटाने का असरदार तरीका या सेहत के लिए खतरा? जानिए इंटरमिटेंट फास्टिंग का सच
Tue, 21 Jul 2026 11:49 AM IST
Shruti Gaur
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Tue, 21 Jul 2026 11:49 AM IST
सार
Intermittent Fasting: आज के समय में इंटरमिटेंट फास्टिंग का काफी ट्रेंड चल रहा है। ये क्या है और ये कितनी सुरक्षित है, आज हम इसी बारे में बात करेंगे।
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इंटरमिटेंट फास्टिंग कितनी सुरक्षित है?
- फोटो : AI
Intermittent Fasting: आजकल वजन घटाने और फिट रहने के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग का चलन तेजी से बढ़ रहा है। सोशल मीडिया, फिटनेस इंफ्लुएंसर्स और कई सेलिब्रिटीज भी इसे हेल्दी लाइफस्टाइल का हिस्सा बताते हैं। इंटरमिटेंट फास्टिंग कोई खास डाइट नहीं, बल्कि खाने का एक पैटर्न है, जिसमें तय समय तक भोजन किया जाता है और बाकी समय उपवास रखा जाता है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग कितनी सुरक्षित है?
- फोटो : Adobe Stock
इंटरमिटेंट फास्टिंग क्या है?
इंटरमिटेंट फास्टिंग खाने का एक पैटर्न है, जिसमें खाने और उपवास के समय को तय किया जाता है। इसमें इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता कि क्या खाना है, बल्कि इस पर फोकस होता है कि कब खाना है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग खाने का एक पैटर्न है, जिसमें खाने और उपवास के समय को तय किया जाता है। इसमें इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता कि क्या खाना है, बल्कि इस पर फोकस होता है कि कब खाना है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग कितनी सुरक्षित है?
- फोटो : AI
इंटरमिटेंट फास्टिंग के लोकप्रिय तरीके
16:8 Method क्या है?
16:8 इंटरमिटेंट फास्टिंग का सबसे लोकप्रिय और आसान तरीका माना जाता है। इसमें दिन के 24 घंटों में से 16 घंटे उपवास रखा जाता है और बाकी 8 घंटे के दौरान भोजन किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि आप दोपहर 12 बजे पहला भोजन करते हैं, तो रात 8 बजे तक अपना आखिरी भोजन कर सकते हैं। इसके बाद अगले दिन दोपहर 12 बजे तक केवल पानी, बिना चीनी की ग्रीन टी, ब्लैक कॉफी या अन्य कैलोरी-फ्री पेय लिए जाते हैं।
5:2 Diet क्या है?
5:2 डाइट इंटरमिटेंट फास्टिंग का एक ऐसा तरीका है, जिसमें सप्ताह के 5 दिन सामान्य और संतुलित भोजन किया जाता है, जबकि बाकी 2 दिन कैलोरी का सेवन काफी कम कर दिया जाता है। आमतौर पर इन दो दिनों में महिलाओं को लगभग 500 कैलोरी और पुरुषों को 600 कैलोरी तक सीमित रहने की सलाह दी जाती है। ये दोनों दिन लगातार होना जरूरी नहीं है। उदाहरण के लिए, आप सोमवार और गुरुवार को कम कैलोरी वाला भोजन ले सकते हैं और बाकी दिनों में सामान्य डाइट का पालन कर सकते हैं।
16:8 Method क्या है?
16:8 इंटरमिटेंट फास्टिंग का सबसे लोकप्रिय और आसान तरीका माना जाता है। इसमें दिन के 24 घंटों में से 16 घंटे उपवास रखा जाता है और बाकी 8 घंटे के दौरान भोजन किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि आप दोपहर 12 बजे पहला भोजन करते हैं, तो रात 8 बजे तक अपना आखिरी भोजन कर सकते हैं। इसके बाद अगले दिन दोपहर 12 बजे तक केवल पानी, बिना चीनी की ग्रीन टी, ब्लैक कॉफी या अन्य कैलोरी-फ्री पेय लिए जाते हैं।
5:2 Diet क्या है?
5:2 डाइट इंटरमिटेंट फास्टिंग का एक ऐसा तरीका है, जिसमें सप्ताह के 5 दिन सामान्य और संतुलित भोजन किया जाता है, जबकि बाकी 2 दिन कैलोरी का सेवन काफी कम कर दिया जाता है। आमतौर पर इन दो दिनों में महिलाओं को लगभग 500 कैलोरी और पुरुषों को 600 कैलोरी तक सीमित रहने की सलाह दी जाती है। ये दोनों दिन लगातार होना जरूरी नहीं है। उदाहरण के लिए, आप सोमवार और गुरुवार को कम कैलोरी वाला भोजन ले सकते हैं और बाकी दिनों में सामान्य डाइट का पालन कर सकते हैं।
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इंटरमिटेंट फास्टिंग कितनी सुरक्षित है?
- फोटो : AI
इंटरमिटेंट फास्टिंग के संभावित फायदे
- खाने का समय सीमित होने से कुल कैलोरी का सेवन कम हो सकता है, जिससे वजन घटाने में मदद मिलती है।
- कुछ अध्ययनों के अनुसार, इंटरमिटेंट फास्टिंग इंसुलिन संवेदनशीलता को बेहतर बना सकती है, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल में मदद मिल सकती है।
- यह कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और सूजन जैसे जोखिम कारकों को कम करने में सहायक हो सकती है।
- कुछ शोध बताते हैं कि सीमित समय तक उपवास शरीर की फैट बर्निंग प्रक्रिया को बढ़ावा दे सकता है।
- उपवास के दौरान शरीर में ऑटोफैजी नामक प्रक्रिया सक्रिय हो सकती है, जिसमें पुरानी और क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की सफाई होती है।
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इंटरमिटेंट फास्टिंग कितनी सुरक्षित है?
- फोटो : AI
क्या इंटरमिटेंट फास्टिंग पूरी तरह सुरक्षित है?
हर व्यक्ति के लिए इसका जवाब नहीं है। यह कुछ लोगों के लिए लाभदायक हो सकती है, लेकिन सभी के लिए नहीं।
किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?
हर व्यक्ति के लिए इसका जवाब नहीं है। यह कुछ लोगों के लिए लाभदायक हो सकती है, लेकिन सभी के लिए नहीं।
किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?
- गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं
- टाइप-1 डायबिटीज के मरीज
- बार-बार लो ब्लड शुगर होने वाले लोग
- 18 साल से कम उम्र के बच्चे और किशोर
- बुजुर्ग जिनकी पोषण संबंधी जरूरतें अधिक हैं
- खाने से जुड़ी मानसिक समस्याओं से जूझ रहे लोग
- गंभीर बीमारी या लंबे समय से दवा लेने वाले मरीज