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जानिए क्यों चर्चा में है हेपेटाइटिस के लिए प्रयोग में लाई जाने वाली यह दवा? क्या कोरोना संक्रमितों को भी इससे मिल सकता है लाभ?
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला
Published by: Abhilash Srivastava
Updated Sat, 24 Apr 2021 03:14 PM IST
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कोरोना वायरस और रेमेडिसविर
- फोटो : पीटीआई
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कोरोना वायरस के मामलों में बीते दिनों देखा गया उछाल लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। आलम यह है कि अस्पतालों में कई सारी आवश्यक सुविधाओं की भारी कमी आ गई है। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए इस समय एंटीवायरल ड्रग, रेमेडिसविर की मांग भी तेजी से बढ़ी है। माना जा रहा है कि इसका इंजेक्शन कोविड-19 से पीड़ित रोगियों के लक्षणों को कम करने में प्रभावी हो सकता है। कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि रेमेडिसविर कोई जीवनरक्षक दवा नहीं है और इसका अनावश्यक उपयोग नुकसानदायक भी हो सकता है।
आइए जानते हैं कि आखिर रेमेडिसविर से कोविड-19 संक्रमितों को किस तरह से लाभ हो सकता है और इस बारे में विशेषज्ञों का क्या कहना है?
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देश में रेमडेसिविर की बढ़ी मांग
- फोटो : Amar Ujala
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ बलराम भार्गव के अनुसार, चूंकि 45 साल और उससे अधिक आयु के लोगों का टीकाकरण हो रहा है ऐसे में वह काफी हद तक कोविड-19 की दूसरी लहर से सुरिक्षत माने जा सकते हैं, जबकि युवा इस बार संक्रमण के ज्यादा शिकार हो रहे हैं। इस तरह के संकट के दौरान ऑक्सीजन वेंटिलेटर, प्लाज्मा और रेमेडिसविर जैसी एंटीवायरल दवाओं की मांग तेजी से बढ़ी है।
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गिलियड (यूएस) द्वारा निर्मित है यह दवा
- फोटो : Social Media
रेमेडिसविर, गिलियड (यूएस) द्वारा निर्मित एक पेटेंट एंटीवायरल दवा है, जिसे शुरू में वायरल हेपेटाइटिस और रेस्पोरेटरी सिंक्रोटीलियल वायरस (आरएसवी) के इलाज के लिए प्रयोग में लाया जाता था। कोरोना के मामले में शुरुआती दौर में देखा गया कि इससे लोगों को लाभ मिल रहा है, इसी वजह से यूएस एफडीए ने इस दवा को कोविड-19 के इलाज के लिए मंजूरी दे दी।
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रेमडेसिवीर का उपयोग सिर्फ गंभीर रोगियों के लिए
- फोटो : Social Media
भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी कोविड-19 प्रबंधन प्रोटोकॉल दस्तावेज़ में आवश्यकतानुसार डॉक्टरी सलाह के अनुसार इसके उपयोग को मंजूरी दी है, हालांकि विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि यह "जीवन रक्षक दवा" नहीं है। यानी कोरोना में जरूरी नहीं कि इससे लोगों की जान बचाई जा सके।
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रेमडेसिविर कोई जादू नहीं है
- फोटो : social media
भारत चूंकि मौजूदा समय में एक घातक वायरस से जूझ रहा है, जिसका असर स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी देखने को मिल रहा है, ऐसे में लोग जिंदा रहने के लिए तमाम तरह के उपायों को प्रयोग में ला रहे हैं। इसी संबंध में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया कहते हैं कि "रेमेडिसवियर न तो जादू की गोली है न ही ऐसी दवा जिसका उपयोग मृत्युदर को कम कर सकता है।''
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