दुनिया भर में अब तक करीब 20 संभावित कोरोना वैक्सीन विकसित किए जा चुके हैं, जिन्होंने शुरुआती परीक्षणों में बढ़िया नतीजे दिए हैं और अब वैज्ञानिक इनके अगले चरण के 'क्लीनिकल ट्रायल' कर रहे हैं। अलग-अलग दवा निर्माता कंपनियों और शोध संस्थानों द्वारा करीब 140 और टीकों पर भी काम चल रहा है, जिनसे उम्मीद है कि वो कोरोना वायरस को रोक पायेंगे।
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Coronavirus: क्या कोरोना की वैक्सीन के दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं? जानें ऐसे ही जरूरी सवालों के जवाब
Sat, 25 Jul 2020 02:40 PM IST
निलेश कुमार
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी
Published by: निलेश कुमार
Updated Sat, 25 Jul 2020 02:40 PM IST
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Coronavirus Vaccine
- फोटो : Pixabay/Amar Ujala
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- फोटो : Pixabay
पहला सवाल: क्या कोरोना वैक्सीन 100 प्रतिशत सुरक्षित होगी? क्या इस वैक्सीन के कुछ अवांछित दुष्प्रभाव हो सकते हैं?
- जवाब: कठोर सुरक्षा जांच से गुजरने के बाद ही किसी टीके को व्यापक इस्तेमाल की मंजूरी मिलती है। इसके लिए कई चरणों में टेस्ट किये जाते हैं। लेकिन कोविड-19 की वैक्सीन विकसित करने के लिए रिसर्च का काम बहुत ही तेजी से किया गया है। अनुसंधान का काम भी सामान्य स्थिति की तुलना में काफी तेज गति में चल रहा है। फिर भी क्लीनिकल ट्रायल के दौरान वो सारे परीक्षण किये जा रहे हैं जो एक टीके को मंजूरी देने से पहले जरूरी होते हैं।
- मेडिकल साइंस मानती है कि किसी भी उपचार के कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं, और इस मामले में टीके अलग नहीं होते। मगर टीकों का सबसे आम दुष्प्रभाव भी काफी मामूली होता है, जैसे- शरीर के किसी हिस्से पर सूजन आना या त्वचा पर लाल धब्बे पड़ना, वो भी सिर्फ उस जगह पर, जहाँ टीका लगाया गया हो।
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- फोटो : ANI
दूसरा सवाल: क्या पुराने फ्लू वैक्सीन को ही कोविड-19 के लिए विकसित किया गया है?
- जवाब: मौसमी फ्लू से बचाव के लिए लगने वाला टीका कोरोना वायरस संक्रमण से रक्षा नहीं कर पायेगा। फ्लू (इन्फ्लूएंजा) और कोरोना वायरस संक्रमण, दो पूरी तरह से अलग बीमारियां हैं जो अलग-अलग वायरस से होती हैं। मगर फ्लू का टीका लगवाना एक अच्छा विचार हो सकता है, खासकर कोरोना महामारी के दौर में, क्योंकि ये भी आपकी सेहत की रक्षा तो करता ही है।
- फ्लू के कारण कुछ लोग वाकई गंभीर रूप से बीमार हो जाते हैं। ऐसे में वो लोग जिन्हें कोरोना से खतरा है, यानी 65 से अधिक उम्र वाले लोग, या लंबे वक्त के किसी बीमारी से जूझ रहे लोग, वो सावधानी के तौर पर फ्लू का टीका लगवा सकते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
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तीसरा सवाल: क्या ट्रांसप्लांट (प्रत्यारोपण) करवा चुके लोग भी टीका लगवा सकेंगे?
- जवाब: वैज्ञानिक कई तरह के संभावित टीकों पर काम कर रहे हैं। इन्हें कई तरह से टेस्ट किया जा रहा है। हालांकि, यह अब तक स्पष्ट नहीं है कि इनमें कौनसा टीका सबसे ज्यादा प्रभावी साबित हो सकता है। टीके के विभिन्न संस्करण कुछ लोगों के लिए दूसरों की तुलना में अधिक उपयुक्त हो सकते हैं। इन्हीं सब सवालों के जवाब खोजने के लिए टेस्ट किये जा रहे हैं ताकि ये पता लग सके कि टीकाकरण से किसे-कितना लाभ हो सकता है।
- अब बात विशेष रूप से ट्रांसप्लांट की, तो अगर आपने ट्रांसप्लाट करवाया है और इस वजह से आप इम्युनिटी को दबाने के लिए कुछ दवाएं ले रहे हैं ताकि आपका शरीर उस ट्रांसप्लांट को स्वीकार कर ले, तो कुछ वैक्सीन जैसे कि 'जैव' टीके जिसमें कमजोर स्तर के बैक्टीरिया या वायरस हों, आपको नहीं लेने चाहिए।
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Corona Vaccine
- फोटो : Pixabay/Amar Ujala
चौथा सवाल: अगर ये वायरस अपना रूप बदल लेता है, तो क्या ये संभावित टीका तब भी प्रभावी होगा?
- जवाब: वर्तमान में विकसित होने वाले कोरोनो वायरस के टीके अभी फैल रहे वायरल संक्रमण के नमूनों पर आधारित हैं। ये सच है कि वायरस खुद को बदल सकते हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि इससे टीके का प्रभाव कम हो जायेगा। ऐसे मामले में बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि वायरस में उत्परिवर्तन (बदलाव) कितना बड़ा और महत्वपूर्ण है। तब विज्ञानियों को यह देखना होगा कि क्या वायरस ने उन हिस्सों को ही बदल लिया है जिन हिस्सों पर किसी भी टिके को सबसे पहले अपना असर दिखाना था।