फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

वैज्ञानिकों की राय: क्या नए वैरिएंट्स से मुकाबले के लिए वैक्सीन की दो डोज से नहीं चलेगा काम?

Sun, 15 Aug 2021 07:32 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Sun, 15 Aug 2021 07:32 PM IST
विज्ञापन
is only two doses of covid vaccine enough against new corona variants
कोरोना के नए वैरिएंट्स से खतरा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

कोरोना के नए वैरिएंट्स एक बार फिर से दुनिया के कई देशों में तेजी से संक्रमण का कारण बन रहे हैं। कई अध्ययनों में वैज्ञानिकों ने बताया है कि म्यूटेशन के बाद बने यह नए वैरिएंट्स पहले से कहीं ज्यादा संक्रामक और घातक हो सकते हैं। ब्रिटेन और अफ्रीका के कुछ देशों में कोरोना के डेल्टा और लैम्बडा वैरिएंट्स के कारण बढ़ते केस के मामले सामने आ रहे हैं। कुछ अध्ययनों में यह भी दावा किया जा रहा है कि संक्रमण और वैक्सीन से बनी एंटीबॉडीज कुछ महीनों के बाद कम हो जा रही हैं। ऐसे में लोगों के मन में एक सवाल लगातार बना हुआ है कि क्या कोरोना के नए वैरिएंट्स से मुकाबले के लिए वैक्सीनेशन की दो डोज काफी नहीं हैं? क्या अब लोगों को बूस्टर डोज ले लेना चाहिए?


विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना के डेल्टा वैरिएंट्स को दुनिया भर में कोविड के 50 फीसदी मामलों का कारण माना जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने डेल्टा और कोरोना के अन्य नए वैरिएंट्स को चिंता का कारक माना है। भारत में महामारी विज्ञानियों का मानना है कि कोरोना के नए वैरिएंट्स में तीसरी लहर को ट्रिगर करने की क्षमता है। आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं कि क्या वैक्सीन की दो डोज इन नए वैरिएंट्स से मुकाबले के लिए काफी है? या आने वाले दिनों में लोगों को बूस्टर शॉट की आवश्यकता हो सकती है?

is only two doses of covid vaccine enough against new corona variants
कोरोना के नए वैरिएंट्स ने बढ़ा दिया है खतरा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : istock

भारत में कोरोना के संक्रमण की स्थिति
भारत में प्रमुख रूप से कोरोना के अल्फा और डेल्टा वैरिएंट्स के कारण संक्रमण के मामले सबसे ज्यादा देखने को मिले हैं। बीटा और गामा वैरिएंट भी कुछ स्थानों पर संक्रमण के मामलों का कारण माने जा रहे हैं। दुनियाभर के वैज्ञानिकों का कहना है कि डेल्टा वैरिएंट्स, वैक्सीनेशन से तैयार शरीर की प्रतिरक्षा को चकमा देने की क्षमता रखते हैं, हालांकि टीके, संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने के खतरे को जरूर कम कर सकते हैं। कई अध्ययनों में कहा जा रहा है कि शरीर में वैक्सीन से बनी एंटीबॉडीज कुछ महीनों में कमजोर पड़ने लगती हैं, ऐसे में लोगों को आने वाले दिनों में बूस्टर शॉट की आवश्यकता हो सकती है।

is only two doses of covid vaccine enough against new corona variants
कोरोना के वैक्सीनों कितने प्रभावी? - फोटो : पिक्साबे

कितनी प्रभावी मानी जा रही हैं वैक्सीन?
पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड द्वारा किए गए एक अध्ययन में फाइजर और एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को डेल्टा वैरिएंट्स से मुकाबले के लिए प्रभावी माना गया है। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि फाइजर वैक्सीन की दो खुराक डेल्टा वैरिएंट के कारण सिम्टोमेटिक मामलों को रोकने में 87.9 फीसदी तक प्रभावी हो सकते हैं, वहीं एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की दो डोज को डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ 59.8 फीसदी तक असरदार पाया गया है। हालांकि यह सुरक्षा कितने दिनों तक बना रहता है, इस बारे में लगातर जानने की कोशिश की जा रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
is only two doses of covid vaccine enough against new corona variants
बूस्टर शॉट की पड़ सकती है जरूरत - फोटो : PTI

क्या बूस्टर डोज जरूरी है?
वैज्ञानिक उन जैविक मार्करों की खोज कर रहे हैं जिससे यह पता लगाया जा सके कि वैक्सीन से तैयार सुरक्षा कब पर्याप्त मात्रा में बनी रह सकती है? फिलहाल कहा जा रहा है कि लोगों को दोनों डोज लेने के बाद जल्द ही तीसरी डोज की आवश्यकता पड़ सकती है। गौरतलब है कि हाल ही में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के संस्थापक साइरस पूनावाला ने एक संबोधन में तीसरी डोज की आवश्यकता पर जोर दिया था। उन्होंने कहा, सामान्यतौर पर छह महीने के बाद शरीर में एंटीबॉडीज कम हो जाती हैं, ऐसे में तीसरी खुराक की आवश्यकता पड़ सकती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मैंने और कंपनी के सात से आठ हजार कर्मचारियों ने वैक्सीन की बूस्टर डोज ले ली है।

-------------------
नोट: यह लेख वैक्सीन की प्रभाविकता को लेकर तमाम अध्ययनों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed