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Sugar Vs Jaggery: क्या गुड़ खाना सच में चीनी से बेहतर है? डॉक्टर ने खोला चौंकाने वाला राज

Mon, 11 May 2026 10:25 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Mon, 11 May 2026 10:25 PM IST
सार

क्या गुड़ वास्तव में पूरी तरह हेल्दी है? क्या डायबिटीज या वजन घटाने वाले लोग इसे बिना चिंता के खा सकते हैं? अगर आपके मन में भी ये सवाल बना रहता है तो आइए डॉक्टर से इस बारे में विस्तार से समझ लेते हैं।

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गुड़ खाते हैं तो जान लीजिए ये बातें - फोटो : Amarujala.com/AI

खान-पान की जिस गड़बड़ी को सेहत के लिए सबसे नुकसानदायक माना जाता है,चीनी वाली चीजें उनमें से एक हैं। चाय से लेकर मिठाइयों तक, चीनी का इस्तेमाल हर घर में होता है। हालांकि अगर आप बहुत ज्यादा चीनी वाली चीजें खाते रहते हैं तो सावधान हो जाइए, ये आपको कई खतरनाक बीमारियों का शिकार बना सकती है।



ज्यादा चीनी के खाने को मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, फैटी लिवर, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों को बढ़ाने वाला माना जाता है। यही वजह है कि अब चीनी की जगह लोग गुड़ को हेल्दी विकल्प के रूप में अपनाने लगे हैं। आयुर्वेद में भी इसे पाचन सुधारने और शरीर को गर्म रखने वाला बताया गया है। इतना ही नहीं गुड़ में आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम और कुछ एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं जिनसे शरीर को कई तरह के लाभ हो सकते हैं।

हालांकि सवाल यह है कि क्या गुड़ वास्तव में पूरी तरह हेल्दी है? क्या इसे चीनी का विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है?

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चीनी या गु़ड़ - फोटो : Amarujala.com/AI

क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

वरिष्ठ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (जीआई) सर्जन डॉ अंशुमान कौशल कहते हैं, गुड़ हो या चीनी इसका शरीर पर लगभग एक जैसा ही असर होता है। ये जब हमारे शरीर में जाता है तो वहां ग्लूकोज बनाता है। हमारा पैंक्रियाज चीनी और गुड़ में कोई फर्क नहीं करता है।
 

  • चीनी 100% शुक्रोज है, जिसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 65 होता है।
  • गुड़ 65-85% शुक्रोज और  ग्लाइसेमिक इंडेक्स 84 है।


मतलब गुड़ का ग्लाइसेमिक इंडेक्स चीनी से ज्यादा होता है। ग्लाइसेमिक इंडेक्स वह पैमाना है जो बताता है कि  भोजन कितनी तेजी से शुगर बढ़ाता है। हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली चीजें खाने से अक्सर मना किया जाता है।

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गुड़ खाने से क्या होता है? - फोटो : Adobe stock

गुड़ में न्यूट्रिएंट्स
 
डॉक्टर कहते हैं, जब गुड़ की बात होती है तो अक्सर कहा जाता है कि इसमें आयरन और मिनरल्स होते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि इसकी मात्रा असल में बहुत कम होती है?
 

  • 100 ग्राम गुड़ में 11 मिलीग्राम आयरन होता है, ये सुनने में तो बड़ा लगता है पर आप 100 ग्राम गुड़ रोज नहीं खाते हैं। ज्यादातर लोग 10-15 ग्राम गुड़ ही खाते हैं यानी इससे आपको सिर्फ 1.1 मिलीग्राम आयरन ही मिलता है जो एक पालक के पत्ते से भी आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।
  • पर आप गुड़ के साथ शरीर को अनजाने में शुगर और कैलोरी भी दे रहे होते हैं। 
  • आयरन के लिए गुड़ खाना वैसे ही है जैसे विटामिन-सी के लिए शराब में नींबू निचोड़ के पीना। 
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ज्याादा चीनी तो नहीं खाते हैं आप - फोटो : Freepik.com

चीनी या गुड़ कौन सा बेहतर?

डॉक्टर कहते हैं जब हमें ये बता दिया जाता है कि गुड़ हेल्दी है तो हम बिना किसी चिंता के इसका ज्यादा सेवन शुरू कर देते हैं। 2017 में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चलता है कि अगर किसी पैकेट पर नेचुरल लिख दिया जाए तो लोग उसे 35% ज्यादा खाते हैं।

डॉक्टर कहते है, चीनी और गुड़ असल में दोनों एक ही तरह की चीजें हैं। दोनों ही फैटी लिवर, इंसुलिन रेजिस्टेंस और बेली फैट का कारण बन सकते हैं। चीनी और गुड़ में चयन से ज्यादा जरूरी है कि आप इसकी मात्रा पर ध्यान दें। एक चम्मच चीनी, दो चम्मच गुड़ से कहीं बेहतर है।

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गुड़ खाते हैं तो जान लीजिए ये बातें - फोटो : Adobe stock

गुड़ खाने को लेकर बरतें सावधानियां

डॉक्टर कहते हैं, गुड़ को हेल्दी मानकर जरूरत से ज्यादा खाना कई समस्याएं बढ़ा सकता है। 
 

  • इसमें कैलोरी और शुगर दोनों अधिक होती हैं, इसलिए अधिक सेवन वजन बढ़ाने का कारण बन सकता है। 
  • डायबिटीज रोगियों को भी गुड़ खाने को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। 
  • इसके अलावा बाजार में मिलने वाले कुछ गुड़ में सफाई और प्रोसेसिंग के दौरान केमिकल्स या अशुद्धियां भी हो सकती हैं। 
  • अधिक मात्रा में सेवन करने पर कुछ लोगों को गैस, अपच या एलर्जी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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