आज वर्ल्ड मेन्स डे हैं, एक खास दिन जब पुरुषों के मुद्दों पर चर्चा की जाती है। इसमें स्वास्थ्य भी एक बड़ा विषय है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मेन्स डे पर उन स्वास्थ्य समस्याओं पर भी गंभीरता से चर्चा किया जाना आवश्यक हो जाता है जिससे दुनियाभर में पुरुष आबादी प्रभावित होती है। मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि पुरुष अपने मानसिक और शरीर स्वास्थ्य को गंभीरता से नहीं लेते हैं, जिसके कारण उनमें गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं विकसित हो सकती हैं। "मेडिकल जेंडर गैप" को लेकर सीडीसी के आंकड़े भी बताते हैं कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों की मृत्यु लगभग पांच साल पहले हो जाती है।
International Men's Day: पुरुषों में सबसे ज्यादा रिपोर्ट की जाती हैं ये चार बीमारियां, इनमें से दो 'जानलेवा'
हृदय रोगों की समस्या
दुनियाभर में हृदय रोग मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। मृत्यु के किसी भी अन्य कारणों की तुलना में हृदय रोग पुरुषों में मृत्यु का प्रमुख कारण है। धूम्रपान और सेंडेंटरी लाइफस्टाइल इस जोखिम को और भी बढ़ा देती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी के लिए जरूरी है कि आप अपने दिल को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक उपाय करें। फलों और सब्जियों के साथ संतुलित आहार का सेवन, धूम्रपान से दूरी और शारीरिक रूप से सक्रिय रहकर हृदय को स्वस्थ रखा जा सकता है।
कैंसर भी बड़ा खतरा
सीडीसी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका सहित दुनियाभर के पुरुषों में मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण हृदय रोग के बाद कैंसर ही है। पुरुषों में त्वचा, प्रोस्टेट, कोलोरेक्टल और फेफड़ों के कैंसर सबसे ज्यादा देखे जाते रहे हैं। इसमें से ज्यादातर के लिए गड़बड़ लाइफस्टाइल और आहार की गड़बड़ी को प्रमुख कारक माना जाता रहा है। धूप में सनस्क्रीन लगाना, प्रोसेस्ड और रेड मीट का सेवन कम करना, धूम्रपान छोड़ना कैंसर के जोखिम को कम करने में काफी मदद कर सकती है।
मधुमेह का जोखिम
महिलाओं और पुरुषों दोनों में टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। पुरुषों के शरीर में पेट की चर्बी अधिक होती है, जो इस क्रोनिक बीमारी के खतरे को बढ़ा देती है। वजन को नियंत्रित करने और नियमित व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाकर मधुमेह के खतरे को कम किया जा सकता है। यदि आपके परिवार में पहले से किसी को डायबिटीज की समस्या रही है तो आपको इसके जोखिमों को लेकर सावधान रहना चाहिए।
अवसाद का बढ़ रहा है खतरा
मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर समस्या है, पुरुषों में इसका जोखिम अधिक रिपोर्ट किया जाता रहा है। यही कारण है कि कुछ रिपोर्ट्स में पुरुषों में बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और आत्महत्या को लेकर अलर्ट किया जाता रहा है। आंकड़ों के मुताबिक हर साल लगभग 6 मिलियन (60 लाख) पुरुष अवसाद और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के शिकार पाए जाते हैं। शारीरिक स्वास्थ्य के साथ भावनात्मक स्थितियों को कंट्रोल में रखना आपके लिए बहुत जरूरी है।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।