मेनोपॉज शब्द को सुनते ही सबसे पहली बात जो जेहन में आती है वह है महिलाओं की हेल्थ और उनके जीवन के एक महत्वपूर्ण पड़ाव से जुड़ी स्थिति की। मेनोपॉज महिलाओं के जीवन का वह पड़ाव है जहाँ उनके जीवन की एक और महत्वपूर्ण प्रक्रिया 'पीरियड्स' का अंत होता है। इससे संबंधित कई बातें हैं जिनपर अक्सर चर्चा की जाती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि मेनोपॉज़ जैसी ही स्थिति से पुरुष भी गुजरते हैं?
International Men's Day 2022: मेनोपॉज़ से गुजरते हैं पुरुष भी, जानिए और रखिये ध्यान
सामान्य है उम्र के साथ चीजों का बदलना
प्रकृति ने हमें जो शरीर दिया है वह एक रिदम या चक्र में चलता है। समय के साथ उसमें परिवर्तन होते जाते हैं और उम्र बढ़ने के साथ ये परिवर्तन तेजी से होते हैं। महिलाओं की तरह ही पुरुष भी कमजोर होती आँखों की रौशनी, जोड़ों की तकलीफों, पाचन क्षमता में कमजोरी, दांत गिरने आदि की स्थिति से गुजरते हैं। हां, इन परिवर्तनों के होने की उम्र पर कई चीजों का असर हो सकता है। इसलिए कुछ लोगों में ये परिवर्तन जल्दी दिखाई देने लग सकते हैं तो कुछ में देर से। हार्मोनल परिवर्तन भी इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं। यही परिवर्तन पुरुषों में मेनोपॉज़ जैसी स्थिति को जन्म देते हैं।
क्या है मेल मेनोपॉज़?
महिलाओं में होने वाली मेनोपॉज़ की प्रक्रिया के लक्षण एकदम स्पष्टता से सामने आते हैं। इसलिए हमेशा इस एंगल पर चर्चा भी बहुत होती है। महिलाएं चूंकि उम्र के एक बड़े हिस्से में पीरियड्स की प्रक्रिया से गुजरती हैं इसलिए उनके मेनोपॉज़ को लेकर बहुत स्पष्टता होती है। पुरुषों को पीरियड्स नहीं आते इसलिए पुरुषों में यह इतना स्पष्ट नहीं होता। पुरुषों में उम्र के साथ होने वाले हार्मोनल असंतुलन को ही इससे जोड़कर देखा जाता है। लगभग वैसे ही जैसे महिलाओं में मेनोपॉज़ के दौरान होने वाला हार्मोनल असंतुलन। यही कारण है कि पुरुषों और महिलाओं में कुछ लक्षण समान भी दिख सकते हैं।
एण्ड्रोजन या टेस्टोस्टेरॉन का घटना
पुरुषों के शरीर का एक मुख्य हार्मोन होता है टेस्टोस्टेरॉन यानी एण्ड्रोजन। इस हार्मोन का उत्पादन पुरुषों में टेस्टिकल्स में होता है। यह हार्मोन प्रजनन के मामले में तो महत्वपूर्ण भूमिका निभाता ही है, इसके अलावा यह बोन डेंसिटी बनाये रखने, पूरे शरीर में फैट का डिस्ट्रीब्यूशन करने, मांसपेशियों को मजबूती देने, लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में मदद करने आदि में भी सहायता करता है। उम्र के साथ इस हार्मोन के स्तर में कमी आ जाने से इन तमाम फायदों का मिलना कम होने लगता है। कई बार उम्र के अलावा डायबिटीज जैसी स्थितियां भी इस हार्मोन की कमी का कारण बन जाती हैं। यही कमी मेल मेनोपॉज़ के रूप में देखी जाती है।
ये हो सकते हैं लक्षण
एक खास बात यह भी है कि महिलाओं की तरह पुरुषों में एकदम हार्मोन का उत्पादन रुकता नहीं है। टेस्टोस्टेरॉन के स्तर में कमी धीरे धीरे आती है। इसलिए लक्षण भी उसी तरह उभरते हैं। कुछ पुरुषों में यह स्थिति 45 की उम्र के बाद भी बन सकती है तो कुछ में 70 साल तक नहीं बनती। मेल मेनोपॉज़ के कुछ लक्षण महिलाओं में होने वाले लक्षण जैसे भी हो सकते हैं। इसमें सबसे आम है-
* थकान
* कमजोरी
* डिप्रेशन जैसी स्थिति
* यौन संबंधों के लिए अनिच्छा
इसके अलावा हॉट फ्लैशेस, ब्रेस्ट व उसके आस पास सूजन या असहजता, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन आदि लक्षण भी सामने आ सकते हैं। ये लक्षण अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं क्योंकि एक तो अधिकांश लोगों को मेल मेनोपॉज़ की जानकारी ही नहीं होती और दूसरे इन लक्षणों को अक्सर पुरुषों के व्यवहार से जोड़कर देखा जाता है न कि स्वास्थ्य से। कुछ पुरुषों में लक्षण उभरकर सामने आते ही नहीं।