फरवरी के मध्य से मौसम में बदलाव की शुरुआत होने लगती है। सर्दियों के बाद अचानक तापमान में आए बदलाव के साथ कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है। इस मौसम में मौसमी फ्लू के साथ-साथ तमाम तरह की संक्रामक बीमारियों का जोखिम भी अधिक होता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को मौसम में होने वाले बदलाव के साथ सेहत पर विशेष ध्यान देते रहने की सलाह देते हैं।
Health Tips: बदलता मौसम और संक्रामक बीमारियों का खतरा, कहीं आप भी न हो जाएं शिकार? डॉक्टर ने बताए बचाव के उपाय
इंफ्लुएंजा का खतरा सबसे अधिक
बदलते मौसम के साथ बढ़ रही बीमारियों के जोखिम और इससे बचाव के उपायों के बारे में जानने के लिए हमने डॉ श्रेय श्रीवास्तव (इंटरनल मेडिसिन, ग्रेटर नोएडा) से संपर्क किया। डॉ श्रेय बताते हैं, भारत में, इन्फ्लुएंजा वायरस का परिसंचरण आमतौर पर मानसून के मौसम और सर्दियों की शुरुआत और इसके खत्म होने के दिनों में अधिक देखा जाता है। इस दौरान वातावरण ऐसा होता है जिसमें यह वायरस तेजी से बढ़ सकता है।
इसके कारण मौसमी फ्लू, जिसमें सर्दी-जुकाम, शरीर में दर्द और गले में संक्रमण की दिक्कत अधिक देखी जाती है। मौसमी फ्लू का समस्या देश में काफी सामान्य है।
फ्लू का जोखिम
डॉ श्रेय कहते हैं, वैसे तो फ्लू का संक्रमण किसी को भी हो सकता है, पर जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर होती है उनमें इस प्रकार के संक्रमण के मामले अधिक देखे जाते रहे हैं। ज्यादातर मामलों में हमारी इम्युनिटी स्वयं इस वायरस को निष्क्रिय कर देती है, यही कारण है कि अधिकतर संक्रमित बिना दवाइयों के भी 2-3 दिनों में ठीक हो जाते हैं।
सर्दी-जुकाम और बुखार के उपचार के लिए पैरासीटामॉल दी जाती है, जो लक्षणों को कम करने में सहायक है। चूंकि यह श्वसन संक्रमण है ऐसे में संक्रमित व्यक्ति से दूसरे में इसके संचार का खतरा अधिक होता है। इससे बचाव करते रहना बहुत जरूरी है।
चिकनपॉक्स संक्रमण से बचाव जरूरी
डॉक्टर श्रेय कहते हैं, इन्फ्लूएंजा के साथ इस मौसम में चिकनपॉक्स संक्रमण के मामले भी अधिक रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। वैसे तो यह संक्रमण किसी भी महीने में हो सकता है पर वसंत के दिनों में संक्रमण सबसे आम है। चिकनपॉक्स 10 साल से कम उम्र के बच्चों में अधिक होता है, हालांकि वयस्क भी इसके शिकार हो सकते हैं। वैरिसेला जोस्टर वायरस के कारण होने वाले इस संक्रमण में त्वचा पर दाने और खुजली होती है और ये दाने द्रव से भरे फफोले में बदल जाते हैं। ज्यादातर मामलों में एक सप्ताह में यह संक्रमण ठीक हो जाता है।
कैसे रहें इन संक्रामक बीमारियों से सुरक्षित?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए सबसे आवश्यक है इम्युनिटी को मजबूत रखना। इसके लिए मौसमी फलों-सब्जियों और औषधियों का सेवन, नियमित व्यायाम बहुत आवश्यक है। कुछ घरेलू उपाय भी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती देने में आपके लिए मददगार हो सकते हैं।
श्वसन संक्रमण से बचाव के लिए भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनना और हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखना आवश्यक है। अगर आपकी इम्युनिटी बेहतर है तो मौसमी फ्लू और अन्य संक्रामक बीमारियों से आसानी से बचाव किया जा सकता है।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।