डॉ सुनील बालियान
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर कई तरह से लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। वायरस के म्यूटेशन के कारण न सिर्फ लोगों में इस बार गंभीर लक्षण देखे जा रहे हैं, साथ ही पहली लहर की तुलना में इस बार मौत के आंकड़े भी अधिक रहे हैं। हालांकि पिछले कुछ दिनों से देश में कोविड के मामलों में कमी जरूरी देखी जा रही है, लेकिन ब्लैक फंगस (म्यूकोरमाइकोसिस) के बढ़ते मामले अब भी चिंता का विषय बने हुए हैं। भारत में अबतक म्यूकोरमाइकोसिस के 11,000 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। गुजरात और महाराष्ट्र इससे सबसे प्रभावित राज्य हैं। कई राज्यों ने म्यूकोरमाइकोसिस को अधिसूचित महामारी घोषित कर दिया है।
हाल ही में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने म्यूकोरमाइकोसिस संक्रमण के एक ऐसे कारक के बारे में बताया है जिसका कोरोना की दूसरी लहर में बहुत ज्यादा प्रयोग किया गया है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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अलर्ट: सामने आई ब्लैक फंगस संक्रमण फैलने की एक और गंभीर वजह, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
Sun, 30 May 2021 11:22 AM IST
Abhilash Srivastava
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Abhilash Srivastava
Updated Sun, 30 May 2021 11:22 AM IST
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ब्लैक फंगस संक्रमण (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
स्टेरॉयड के कारण बढ़े ब्लैक फंगस के मामले
- फोटो : Pixabay
ब्लैक फंगस के सामान्य कारक
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोविड-19 के इलाज के दौरान स्टेरॉयड का बहुत ज्यादा प्रयोग, लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना, ऑक्सीजन थेरेपी का उपयोग और मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों को म्यूकोरमाइकोसिस के प्रमुख संभावित कारकों के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन के उपयोग को भी इसके एक कारण के रूप में देखा जा रहा है। आइए इस बारे में जानते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोविड-19 के इलाज के दौरान स्टेरॉयड का बहुत ज्यादा प्रयोग, लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना, ऑक्सीजन थेरेपी का उपयोग और मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों को म्यूकोरमाइकोसिस के प्रमुख संभावित कारकों के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन के उपयोग को भी इसके एक कारण के रूप में देखा जा रहा है। आइए इस बारे में जानते हैं।
औद्योगिक ऑक्सीजन सिलेंडरों का उपयोग
- फोटो : Social media
औद्योगिक ऑक्सीजन का उपयोग
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोविड के इलाज के लिए औद्योगिक ऑक्सीजन का उपयोग संभावित कारण हो सकता है। लोगों को मेडिकल और इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन में फर्क नहीं पता है, संभवत: इस कारण हुई चूक ने इतनी गंभीर समस्या को जन्म दे दिया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोविड के इलाज के लिए औद्योगिक ऑक्सीजन का उपयोग संभावित कारण हो सकता है। लोगों को मेडिकल और इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन में फर्क नहीं पता है, संभवत: इस कारण हुई चूक ने इतनी गंभीर समस्या को जन्म दे दिया है।
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मेडिकल और औद्योगिक ऑक्सीजन के बारे में जानिए
- फोटो : Pixabay
मेडिकल और इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन में फर्क
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि मेडिकल ऑक्सीजन को बनाते समय इसे कई स्तरों पर फ़िल्टर किया जाता है। इससे फंगस को दूर रखने के लिए भी विभिन्न उपाय किए जाते हैं। जबकि औद्योगिक ऑक्सीजन का उत्पादन करते समय इतने चरणों की आवश्यकता नहीं होती है। दोनों तरह के ऑक्सीजन का उपयोग भिन्न होता है। औद्योगिक ऑक्सीजन को ट्रकों और वैन से ले जाया जाता है, इस दौरान स्वच्छता का ध्यान भी नहीं रखा जाता होगा, संभवत: इस वजहों से ब्लैक फंगस के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि मेडिकल ऑक्सीजन को बनाते समय इसे कई स्तरों पर फ़िल्टर किया जाता है। इससे फंगस को दूर रखने के लिए भी विभिन्न उपाय किए जाते हैं। जबकि औद्योगिक ऑक्सीजन का उत्पादन करते समय इतने चरणों की आवश्यकता नहीं होती है। दोनों तरह के ऑक्सीजन का उपयोग भिन्न होता है। औद्योगिक ऑक्सीजन को ट्रकों और वैन से ले जाया जाता है, इस दौरान स्वच्छता का ध्यान भी नहीं रखा जाता होगा, संभवत: इस वजहों से ब्लैक फंगस के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
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रोगी के ऑक्सीजन मास्क को उपयोग के बाद नष्ट कर दें।
- फोटो : iStock
इन उपकरणों से भी खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि ह्यूमिडिफायर में इस्तेमाल होने वाले पानी के कारण भी फंगल संक्रमण हो सकता है। जारी प्रोटोकॉल के मुताबिक इसमें साफ पानी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, साथ ही समय-समय पर इस पानी को बदलते रहना भी जरूरी होता है। विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि मरीजों द्वारा इस्तेमाल कैनुला और ऑक्सीजन मास्क को फेंक देना चाहिए, इसका अन्य लोगों द्वारा उपयोग भी नुकसानदायक हो सकता है।
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नोट: यह लेख ग्रेटर नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल में मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ सुनील बालियान से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें तथा किसी भी दवा का सेवन बिना डॉक्टरी सलाह के न करें।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि ह्यूमिडिफायर में इस्तेमाल होने वाले पानी के कारण भी फंगल संक्रमण हो सकता है। जारी प्रोटोकॉल के मुताबिक इसमें साफ पानी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, साथ ही समय-समय पर इस पानी को बदलते रहना भी जरूरी होता है। विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि मरीजों द्वारा इस्तेमाल कैनुला और ऑक्सीजन मास्क को फेंक देना चाहिए, इसका अन्य लोगों द्वारा उपयोग भी नुकसानदायक हो सकता है।
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नोट: यह लेख ग्रेटर नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल में मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ सुनील बालियान से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
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